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डॉ कफील खान का दर्दनाक पत्र…. एक जूनियर डॉक्टर गुनाहगार हो गया और सभी जिम्मेदार सीनियर बेगुनाह हो गए :. जावेद अख्तर

 जावेद अख्तर, सलाम छत्तीसगढ़…

रायपुर (24 अप्रैल 2018)

 

आठ महीने बिना जमानत के जेल में क्योंकि डॉ कफील को जमानत नहीं दी जा रही है। डॉ कफील की पत्नी ने दिल्ली मीडिया के सामने अपना दर्द बयां किया और डॉ कफील का लिखा हुआ पत्र रखा…  एक बार ज़रूर पढ़ें पत्र को…

हालांकि पत्र को पढ़कर समझ आएगा कि डॉक्टर इंसानियत और रहम से बचना ही चाहेगा, सिर्फ अपनी ड्यूटी करके जिम्मेदारी पूर्ण करेगा, वही सही है।
मासूम बच्चे, रोगी महिलाएं एवं वृद्ध कितनी भी तकलीफ में क्यों ना हो मगर डॉक्टर इंसानियत के नाते कुछ भी नहीं करेगा… जो मर रहें उन्हें उनके हाल पर छोड़ ऊपर बैठे जिम्मेदारों के भरोसे छोड़ देना ही बेहतर।
इंसानियत के नाते बचाने का प्रयास किया तो सीएम योगी अंदर करवा देंगे, जमानत नहीं मिलेगी…
मुख्यमंत्री तो पूरे प्रदेश का होता है, सभी के प्रति नज़रिया एक समान होता है, प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा करना और न्याय दिलाना कर्तव्य होता है।
मगर मुख्यमंत्री योगी के नज़र में ऊपर बैठे जिम्मेदार अफसर बेगुनाह हैं और एक जूनियर डॉक्टर गुनाहगार है।
ये कैसा नज़रिया है?
अवकाश पर होने के बावजूद भी एक जूनियर डॉक्टर, अपने चिकित्सकीय धर्म को वरीयता देता है, और विपरीत परिस्थितियों एवं परेशानियों का सामना करने की हिम्मत करता है, हालात को बेहतर करने के लिए जी जान से जुटता है, ऊपर बैठे अफसरों को फोन पर फोन लगाता है, सिलेंडर का इंतेज़ाम करने के लिए भाग दौड़ करता है, बच्चों को बचाने की भरपूर कोशिशें करता हैं। 
जबकि सिलेंडर का जिम्मा डॉ कफील पर नहीं था। फिर भी डॉ कफील ही गुनाहगार है।
आखिरकार क्या किसी ने भी सरकारी रोस्टर चेक करना जरूरी नहीं समझा। 
सरकारी रजिस्टर, दस्तावेज़ और रोस्टर चेक करिए, और पूछिए जूनियर डॉ कफील से कि क्यों अवकाश पर होने के बाद भी तुम हास्पिटल आए?
ऊपर बैठे जिम्मेदारों की बजाए जूनियर होकर क्यों प्रयास किए? 
सिलेंडर का जिम्मा तुम पर नहीं था तो क्यों इंतेज़ाम किए?
नियमानुसार चलना चाहिए था, जो मर रहे थे उन्हें सरकार के भरोसे छोड़ देना चाहिए था?
क्या यही गलती है मेरे शौहर की, जिसका खामियाज़ा पूरा परिवार भुगत रहा है।

मुख्यमंत्री जी बताइए कि क्या गलत किया है डॉ कफील ने? इतने बड़े हास्पिटल में हुए हादसे का सिर्फ एक जूनियर डॉक्टर ही गुनाहगार हो? क्या यह किसी भी तरीके से तार्किक है।  
जिन पर सिलेंडर की जिम्मेदारी थी, वे गुनाहगार नहीं थे?
वे सब बेगुनाह हो गए क्योंकि अपने कर्तव्य और दायित्व का पालन करने नहीं आए। 
जिस जूनियर डॉक्टर की जिम्मेदारी सिलेंडर के इंतेज़ाम की नहीं थी, उसने इंतेज़ाम किया, फिर भी वह जूनियर डॉक्टर ही गुनाहगार हो गया? 

     डॉ कफील की जान को खतरा – 
डॉ कफील की पत्नी ने संदेह जताया है कि जेल के अंदर ही मार डालेंगें डॉ कफील को, ताकि ऊपर बैठे अफसर और सरकार खुद का बचाव कर सके और जांच का हवाला देकर मामले को दबाया जा सके। इसीलिए ज़मानत नहीं होने दे रहे क्योंकि डॉ कफील के बाहर आते ही हादसे के लिए असली जिम्मेदारों की सच्चाई दुनिया के सामने आ जाएगी, और सरकार का घिनौना चेहरा सार्वजनिक हो जाएगा, चारों ओर थू थू हो जाएगी। 
बीते कई महीनों से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा ताकि डॉ कफील दिमागी रूप से पागल हो जाएं या फिर डिप्रेशन में सुसाइड कर लें, मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ इसीलिए अब संभावना है कि उनकी हत्या कर आत्महत्यादिखा दिया जाएगा। 

    पढ़िए पत्र को क्या लिखा डॉ कफील ने –
डॉ. कफील खान ने खत में लिखा है कि 10 अगस्त की उस भयानक रात जब व्हाट्सएप पर मुझे ऑक्सीजन खत्म होने की खबर मिली, तो फौरन मैंने वो सब किया जो एक डॉक्टर, पिता और देश के जिम्मेदार नागरिक को करना चाहिए। ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे बच्चों को बचाने की मैंने पूरी कोशिश की।
मैंने सभी लोगों को फोन किया, मैंने खुद ऑक्सीजन का ऑर्डर किया। मुझसे जो कुछ हो सकता था, मैंने वो सब किया। मैंने एचओडी, बीआरडी के प्रिंसिपल, एक्टिंग प्रिंसिपल, गोरखपुर के डीएम सभी को कॉल किया। सभी को स्थिति की गंभीरता के बारे में बताया। मैंने अपने दोस्तों को भी फोन कर उनसे मदद ली।

बच्चों की जान बचाने के लिए मैंने गैस सिलेंडर सप्लायर से मिन्नतें तक कीं। मैंने कुछ पैसों का इंतजाम कर कहा कि बाकी पैसा सिलेंडर मिल जाने के बाद पे कर दिया जाएगा। मैं बच्चों को बचाने के लिए एक वार्ड से दूसरे वार्ड भाग रहा था। पूरी कोशिश कर रहा था कि कहीं भी ऑक्सीजन सप्लाई की कमी न हो। आसपास के अस्पताल से सिलेंडर का इंतजाम करने के लिए मैं खुद गाड़ी चलाकर गया।

खत में डॉ. कफील ने बताया कि मैंने एसएसबी के डीआईजी से बात की। उन्होंने काफी मदद की. उन्होंने सिलेंडर लाने के लिए न सिर्फ ट्रक मुहैया कराया, बल्कि कुछ सैनिक भी साथ में भेजे। इसके लिए उनका शुक्रिया।
ऑक्सीजन की कमी दूर करने के साथ-साथ हम लोगों ने उस समय टीम के रूप में काम किया।
कफील ने बताया कि 13 अगस्त की सुबह योगी महाराज अस्पताल आए थे। उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या आप ही डॉ. कफील हैं जिन्होंने सिलेंडर का इंतजाम किया? मैंने हां कहां तो वे मुझ पर भड़क गए। उन्होंने कहा कि सिलेंडर का इंतजाम कर लेने से आपको लग रहा कि आप हीरो बन जाएंगे? मैं इसे देखता हूं।  
इस पूरी घटना के बारे में मीडिया को पता चल जाने से योगी जी गुस्से में थे। मैंने मीडिया को कुछ भी नहीं बताया था,बल्कि वे तो खुद पहुंच गए थे। 

इसके बाद से मेरे परिवार को तंग किया जाने लगा, पुलिस घर आने लगी, मुझे धमकी दी जाने लगी, मेरा परिवार इन सब बातों से बुरी तरह डर गया था। परिवार को बचाने के लिए मैंने सरेंडर किया। मुझे लगा कि जब मैंने कुछ गलत नहीं किया तो मुझे कैसा डर? मुझे लगा कि इंसाफ मिलेगा, लेकिन कई महीने बीत गए
 मुझे लग रहा था कि मुझे बेल मिल जाएगी, लेकिन अब मुझे लग रहा कि न्यायपालिका दबाव में काम कर रही है।मेरे साथ-साथ मेरे परिवार की भी जिंदगी नर्क बन गई है। मेरी बेटी एक साल 7 महीने की हो गई है। मैं उसका जन्मदिन भी नहीं मना सका।

10 अगस्त को “छुट्टी” होने के बावजूद जैसे ही मैंने ये खबर सुनी, मैं भाग कर अस्पताल गया। “मैं अस्पताल में सबसे जूनियर डॉक्टर था, मैं तो एनएचआरएम में नोडल अफ़सर था। मैं पीडियाट्रिक्स के लेक्चरर के रूप में स्टूडेंट्स को पढ़ाता था”। 

सिलेंडर खरीद, टेंडर, ऑर्डर और पेमेंट, इस पूरी प्रक्रिया में मैं कहीं भी शामिल नहीं था। ऐसे में पुष्पा सेल्स ने सिलेंडर देना बंद कर दिया तो मैं कैसे इसके लिए जिम्मेदार हो सकता हूं?
डॉ. कफील ने साफ शब्दों में कहा कि इसके लिए गोरखपुरके डीएम, डीजीएमई, हेल्थ और एजुकेशन के  प्रिंसिपल सेक्रेटरी दोषी हैं।

पुष्पा सेल्स के 68 लाख बकाया पेमेंट के लिए 14 रिमाइंडर के बाद भी कोई कदम नहीं उठाया गया। “यह बड़े स्तर पर प्रशासनिक नाकामी है।” मुझे तो बलि का बकरा बनाया गया। जानबूझ कर हम लोगों को जेल में डाला गया, ताकि सच्चाई इसी जेल के अंदर ही रह जाए।

डॉ कफील ने खत में उम्मीद जताई कि उन्हें भी बेल मिल जाएगी और वे अपनी बेटी और परिवार के साथ रह सकेंगे।
एक असहाय पिता, पति, भाई, पुत्र और दोस्त…

टिप्पणी : संभवतः योगी जी ने देखने के लिए बोला था इसीलिए उन्होंने देख भी लिया। 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

जो शाबाशी का हकदार था, उसे ही अपराधी बना दिया, और वैसे भी इतनी बड़़ी घटना हो तो स्वाभाविक है कि मीडिया को खबर लग ही जाती है।

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