अभिव्यक्ति शिक्षा-स्वास्थय

डाक्टर शरत वर्मा : यह भी हमारा ही चेहरा है

ज़हीर अंसारी

मोब लीचिंग की ख़बरें तो कई बार सुनी और पढ़ी गई हैं। जब समझदार इंसान भीड़ जमाकर किसी को अपना निशाना बना लेते है और जीते-जागते इंसान को मामूली सी ग़लती पर हमेशा के लिए मौत की नींद सुला देते हैं। बावजूद इसके अपने इसी हिन्द में ऐसे भी नेक बन्दे हैं जो मज़हब के तराज़ू को दरकिनार रखकर किसी की जान बचा लेते हैं।

यह ताज़ा वाक़्या मैक्स अस्पताल दिल्ली में देखने मिला। मोहम्मद रेहान का 7 साला बेटा कोमा में चला गया था। पीलिया की वजह से इस मासूम का लीवर पूरी तरह ख़राब हो चुका था। लीवर ट्रान्सप्लांट ही आख़िरी विकल्प था। जिसका कुल ख़र्चा 15 लाख रुपए था। मोहम्मद रेहान की माली हालत बहुत ही ख़राब थी। बच्चे की जान बचाने उसने कहीं से 3 लाख रुपए जोड़े और डाक्टर से इल्तिजा की कि किसी तरह इतने रुपए में मेरे बेटे की जान बचा लीजिए। कहते हैं कि डाक्टर ईश्वर का रूप होता है सो डाक्टर शरत वर्मा 7 साल के ख़ूबसूरत बच्चे को देखकर दया-प्रेम से भर गए। उन्होंने बच्चे को नई ज़िंदगी देने का बीड़ा उठाया। अपने स्तर पर उन्होंने बच्चे के लीवर ट्रान्सप्लांट के लिए 11 लाख रुपए जुटाए और बच्चे का आपरेशन किया। बच्चा नई ज़िंदगी पाकर बेहद ख़ुश है। बच्चे के वालिद-वालिदा फ़रिश्ते जैसे डाक्टर पाकर खुदा का बार-बार शुक्रिया अदा कर रहे हैं और डाक्टर के लिए दुआएँ कर रहे हैं।

डाक्टर शरत वर्मा की संवेदनशीलता ने धर्म-जात, ऊँच-नीच की दीवारों को ढहाकर जिस इंसानियत का परिचय दिया है उसकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है। डाक्टर वर्मा की हमदर्दी, इंसानियत और उनके कहने पर आर्थिक सहयोग करने वालों को सलाम…

ज़हीर अंसारी Zaheer Ansari

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