आदिवासी आंदोलन औद्योगिकीकरण मजदूर राजनीति शासकीय दमन

टीआरएन और महावीर एनर्जी के धोखागढ़ी से जमीन हथियाने के खिलाफ पीड़ित मिले कलेक्टर और कमिश्नर से .

घरघोड़ा एसडीएम एके मार्बल की मिलीभगत के खिलाफ एक जुट किसान ,उच्चस्तरीय जाँच करने और तीन साल से पेंडिंग मामले को एसडीएम के कोर्ट से वापस लेने की मांग .

रायगढ़ एवं बिलासपुर 20.02.2019

आदिवासी दलित मजदुर किसान संघर्ष समिति के साथ घरघोड़ा के मेंगारी – नयापारा टेंडा के ग्रामीण कलेक्टर रायगढ़ तथा कमिश्नर बिलासपुर से मिले और मांग की पिछले तीन साल से एसडीएम के यहाँ आदिवासियों की जमीन फर्जी तरीके से टी आर एस तथा महावीर एनर्जी द्वारा कब्जाए जाने के खिलाफ प्रकरण का कोई निर्णय नहीं किया जा रहा है जब की तीन महीने में ऐसे प्रकरण में निर्णय लेने का प्रावधान हैं .

किसानो नि मांग की की कंपनी द्वारा हड़पी जमीन के केस किसी अन्य जिले या प्रभाव क्षेत्र के बाहर की जाये ताकि कंपनी अपनी गुंडा गर्दी और प्रभाव का स्तेमाल नहीं कर पाए . जैसा की सब जानते हैं की जमीन के हस्तांतरण में बड़े स्तर पर हेराफेरी की गई थी .न तो जमी बेचने वाले को मालुम पड़ा न ही खरीदने वाले का ही पता पड़ा .बेनामी खरीद की गई. कंपनी और प्रशाशन के अधिकारीयों ने आदिवासियों की जमीन बेनामी लोगों के नाम रजिस्ट्री करवा दी.
पिछले दिनों भरी स्तर पर ग्रामीणों ने एसपी रायगढ़ और कलेक्टर ,मुख्यमंत्री को इसकी शिकायत की और उनके खिलाफ एफ़ाआईआर दर्ज करवाने की मांग की थी .आज के मुख्य मंत्री भूपेश बघेल जब विपक्ष में थे तब उन्होंने गावं जाकर आन्दोलन का समर्थन किया था .

आवेदन में मांग की गई है की घरघोड़ा के एसडीएम एके मार्बल जो खुद उस समय तहसीलदार थे जब बड़े पैमाने पर जाति और अन्य प्रकार की कूट रचना की गई थी जिसका संदेह ग्रामीणों का इन तहसीलदार पर ही था , अब यही सज्जन एसडीएम होकर यहाँ केस के प्रकरण को निबटाने में अड़ंगे लगा रहे है और न तो कोई जानकारी दी जाति है और न ही कोई संतोष जनक जबाब दिया जा रहा हैं. आवेदन में कहा गया है की यह अधिकारी कंपनी के पक्ष में काम कर रहां हैं ,इसकी जाँच कराई जाये और इस प्रकरण को उनकी अदालत से वापस लेकर किसी और अन्य कोर्ट में दिया जाये .

पूरे  आवेदन को पढने के बाद  कमिश्नर बिलासपुर ने कलेक्टर रायगढ़ को भेज दिया कर जाँच के लिए आदेश दिया हैं.

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