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टाटा व अदानी के उद्योग चल रहे हमारी जमीन पर, आदिवासियों ने भरी हुंकार .

टाटा व अदानी के उद्योग चल रहे हमारी जमीन पर, आदिवासियों ने भरी हुंकार.

RAMPRAVESH VISHWAKARMAPublish: Jan, 21 2018 08:44:17 (IST)

AMBIKAPUR, CHHATTISGARH, INDIA

सर्व आदिवासी समाज द्वारा कलाकेंद्र मैदान में आयोजित सम्मेलन में समाज के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा

अंबिकापुर. सर्व आदिवासी समाज द्वारा रविवार को कलाकेंद्र मैदान में एक दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन के मुख्य अतिथि समाज के कार्यकारी अध्यक्ष मकवान विजय कुजूर थे। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की जमीन पर टाटा व अदानी जैसे बड़े-बड़े उद्योग चल रहे हैं।

कलाकेंद्र मैदान अंबिकापुर में सर्व आदिवासी समाज का सम्मेलन आयोजित किया गया। रांची से सम्मेलन में पहुंचे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि व समाज के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष मकवान विजय कुजूर ने कहा कि आदिवासी अपनी ताकत नहीं जानते हैं। इसलिए उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस देश में जमीन सिर्फ आदिवासियों की है। बड़े-बड़े माइंस का राजस्व भी आदिवासियों को ही मिलना चाहिये।

 

Peopleवर्तमान में जो नौकर थे, वे मालिक बन गये हैं और जो मालिक थे वह नौकर बन गए हैं। आदिवासी समाज को पुनर्जीवित करना हमारा उद्देश्य है।आदिवासियों को धर्म के माया जाल व राजनीतिक चुंगल से बाहर निकाल कर अपने अधिकार को जानना होगा। तभी वे सशक्त होंगे।

उन्होंने कहा कि आदिवासियों की जमीन में टाटा व अदानी जैसे बड़े-बड़े उद्योग चल रहे हैं। पहले आदिवासियों को अंबानी व अदानी बनना था। जमीन के भीतर व जमीन के बाहर सब आदिवासियों का है। आदिवासी जहां रहते हैं, उसके नीचे क्या है, वे सब जानते हैं।

वर्तमान में सरकार आदिवासियों को माओवादी बताकर जेल में डाल रही है। उन्होंने दावा किया कि अगर सरकार माओवादी शब्द को परिभाषित कर देती है तो 99 प्रतिशत आदिवासी जो जेल में है वे बाहर आ जाएंगे। उन्होंने कहा कि जिस जमीन पर पत्थर है, आज के आधुनिक युग में आदिवासियों का पट्टा है।

इस दौरान सरगुजा, जशपुर, कोरिया, सूरजपुर व बलरामपुर के आदिवासी वर्ग के लोग भारी संख्या में शामिल हुए। सम्मेलन में समाज के लोगों ने अपनी-अपनी बातें रखीं।

राष्ट्रपति व राज्यपाल को सौपेंगे ज्ञापन
सर्व आदिवासी सम्मेलन में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ने बताया कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से सरकार को एक बड़ा डिमांड पत्र भेजा जा रहा है। इसके लिए आदिवासी समाज के लोगों द्वारा हस्ताक्षर कराया जा रहा है। इसके लिए परिचर्चा कर एक प्रस्ताव बनाया जा रहा है। इसे आदिवासी समाज अपने परम्परा के अनुसार प्रस्ताव को राष्ट्रपति व राज्यपाल को सौंपेगी।

सीएसआर मद की राशि का उपयोग हो आदिवासियों के हित में
सर्व आदिवासी समाज के लोगों ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में जहां आदिवासी रहते हैं, वहां निजी कम्पनियों व शासकीय कम्पनियों द्वारा उत्खनन का काम किया जाता है। इसके साथ ही पुल-पुलिया निर्माण भी किया जाता है। ग्राम कुन्दीकला में सरकार द्वारा पुलिया व डेम का निर्माण किया जा रहा है।

इससे कई आदिवासी समाज के लोग जो वहां आसपास रहते हैं वे प्रतिस्थापित हो जाएंगे। इसके साथ ही मैनपाट में बाक्साइट उत्खनन का कार्य किया जा रहा है। लेकिन सीएसआर मद की राशि का उपयोग वहां के आदिवासियों के हित में न कर जिले के अन्य कार्यों में लगाया जा रहा है। इसका उपयोग आदिवासियों के हित में होना चाहिए

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