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जहां धारा 370 नहीं लगी है वहां बहुत विकास हो गया हैं क्या ?

हिमांशु कुमार

किसी ने कहा कि अबकी छठ डल झील में ही मनेगी

मैंने कहा कि आपको पता है कि छठ दिवाली के बाद करीब नवम्बर के महीने में आती है

तब तक कश्मीर में बर्फ पड़ चुकी होती है

उस ठण्ड में अगर किसी ने डल झील में पानी में खड़े रहने की बेवकूफी करी तो वह उसकी आखिरी छठ होगी

कल मुझसे सज्जन बोले जब कश्मीर में इंडस्ट्रीज लगेंगी और वहां का विकास होगा 370 धारा हटने से कश्मीर का बहुत फायदा होगा

मैंने उनसे पूछा कि जहां धारा 370 नहीं लगी है वहां बहुत इंडस्ट्रीज लग गई है क्या ?

जहां धारा 370 नहीं लगी है वहां के सब लोगों को रोजगार मिल गया है क्या?

जहां धारा 370 नहीं लगी है वहां का बहुत विकास हो गया है क्या ?

तो वह थोड़े आज का असहज हो गए और बोले विकास तो हुआ है ना ?

मैंने कहा आप कोई भी उद्योग का उदाहरण ले लीजिए

पिछले 10 सालों में हर उद्योग में अपने मजदूरों की संख्या घटाई है और मशीनें बढ़ाई है

रोजगार कम किए हैं

पूरे भारत में जॉब्लेस ग्रोथ हो रही है

बड़े उद्योगपति जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं

बैंक से जनता की गाढ़ी कमाई कर्ज के रूप में ले रहे हैं और डकार जा रहे हैं

बैंकों को कर्जा वापस नहीं दे रहे हैं

सरकार से टैक्सों में छूट ले रहे हैं और जब छूट मिलनी बंद हो जाती है तो उद्योग बंद करके जमीनों को महंगे दामों पर बेचकर मुनाफा कमाते हैं और विदेशों में भाग जाते हैं या दूसरा धंधा शुरू कर देते हैं

कश्मीर को लेकर सोशल मीडिया पर और सड़कों पर जो बातचीत हो रही है उसमें कश्मीर के लोगों के प्रति बहुत ही आश्चर्यजनक बातें लोग कर रहे हैं

और ऐसा सिद्ध करने की कोशिश कर रहे हैं कि जैसे भाजपा सरकार ने कश्मीर के लोगों के उद्धार करने के लिए यह कदम उठाया है

जबकि सच्चाई यह है की इस तरह की बातें करने वाले लोग कश्मीर के लोगों के प्रति पिछले लंबे समय से चिढ़ नफरत और गुस्से का इजहार करते रहे हैं

बहुत सारे लोग कश्मीरी पंडितों के पलायन की चर्चा इस मौके पर कर रहे हैं

और उनके पुनर्वास के मुद्दे को भाजपा के इस कदम से जोड़कर यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि जिन कश्मीरी मुसलमानों ने पंडितों को भगाया था उन्हें सबक सिखाया गया है

इस सबसे यह बात स्पष्ट है कि इन लोगों की चिंता इस देश के नागरिकों के विस्थापित हो जाने और उनके दोबारा ना बस पाने को लेकर बिल्कुल नहीं है

उनकी चिंता महज़ यह है की ब्राह्मण हिंदुओं को मुसलमानों ने वहां से भगाया था

यही इनकी चिढ़ का सबसे बड़ा कारण है

ऐसे लोग उस पलायन को पूरे हिंदू समुदाय की हार और मुसलमान समुदाय की जीत के रूप में चित्रित करके भाजपा के इस कदम को हार को जीत में बदल देने के रूप में दिखा रहे हैं

इन लोगों से पूछा जाना चाहिए कि अगर आपको भारत के लोगों के विस्थापित हो जाने और दोबारा ना बस पाने की इतनी ही चिंता है

तो आपने कभी छत्तीसगढ़ के विस्थापित आदिवासियों का मुद्दा क्यों नहीं उठाया?

झारखंड के विस्थापित आदिवासियों का मुद्दा क्यों नहीं उठाया?

उड़ीसा के विस्थापित आदिवासियों का क्यों नहीं उठाया ?

सरकारों के द्वारा और उद्योगपतियों के द्वारा अपने ही आसपास उत्तर प्रदेश हरियाणा पंजाब हर प्रदेश में लोगों को विस्थापित किया गया है

इसी तरह नर्मदा घाटी में जिन लोगों को विस्थापित किया गया उनके बसावट के लिए लंबी लड़ाई लड़ी गई

कश्मीर के विस्थापित पंडितों के लिए चिंता जलाने वाले लोगों ने कभी देश के बाकी विस्थापितों के लिए कभी कोई आवाज नहीं उठाई ना ही चिंता दिखाई

क्या आप देश के नागरिकों के बीच धर्म के आधार पर भेदभाव करके सोचते हैं?

आपके लिए पंडितों का विस्थापन तो चिंता का विषय है लेकिन देश के आदिवासियों किसानों ग्रामीणों और गरीबों का विस्थापन चिंता का विषय नहीं है?

असल में आप मुसलमानों के प्रति नफरत से भरे हुए हैं

भाजपा की राजनीति का आधार यही नफरत है

और कश्मीर पर उठाया गया उसका यह कदम मुसलमानों को सबक सिखाने के रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है

सोशल मीडिया पर बात चल रही है कि कश्मीर में भारत के लोग अब जमीन खरीद पाएंगे

इन लोगों को यह जानकारी नहीं है कि भारत के बहुत सारे राज्य ऐसे हैं जहां पर दूसरे राज्य का कोई व्यक्ति जमीन नहीं खरीद सकता

मैं आजकल हिमाचल प्रदेश में रहता हूं

वहां भी हिमाचल प्रदेश से बाहर का कोई व्यक्ति जमीन नहीं खरीद सकता

लेकिन भारत के लोगों को इस बात की कोई चिंता नहीं है

उनकी चिंता तो कश्मीर में मुसलमानों के आसपास की जमीन खरीदकर वहां की आबादी को मुस्लिम बहुल आबादी से बदलकर हिंदू बहुल आबादी बनाने में ज्यादा रुचि है

सोशल मीडिया पर कश्मीर की लड़कियों के बारे में अश्लील भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है

ऐसा लग रहा है जैसे कश्मीर में धारा 370 इसलिए हटाई गई है ताकि वहां पर हिंदू जाकर मुसलमानों की जमीनों और उनकी औरतों पर कब्ज़ा कर सकें

यह बहुत ही शर्मनाक हालत है

भाजपा अगर इस तरह की चीजों को बढ़ावा दे रही है तो इसका बहुत बड़ा खामियाजा भारत को उठाना पड़ेगा

कश्मीर पर जो भी कदम उठाया गया है इसमें कश्मीर की जनता को विश्वास में नहीं लिया गया

उन्हें सूचित भी नहीं किया गया कि सरकार ऐसा कोई कदम उठाने वाली है

पहले कश्मीर से गैर कश्मीरी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया

अमरनाथ यात्रा बीच में रोक दी गई और तीर्थ यात्रियों को बाहर निकाल दिया गया

कश्मीर के लोगों को वहीं पड़े रहने दिया गया गोया कि सरकार की चिंता सिर्फ गैर कश्मीरियों के लिए ही है

टेलीफोन बंद कर दिए गए इंटरनेट बंद कर दिया गया

फौज लगा दी गई

और उसके बाद सारे जो भारत का समर्थन करते हैं उन राजनीतिक नेताओं को घरों में नजरबंद कर दिया गया

और फिर संसद में घोषणा करके धारा 370 हटाने का एलान कर दिया गया

यानी कश्मीर के लोगों के बारे में फैसला करने के लिए ना तो कश्मीर के किसी व्यक्ति से राय ली गई ना सहमति ली गई और ना कश्मीरियों को सूचित किया गया

बहुत संभव है कि इस के बाद कश्मीर के लोग इसे अपने अपमान और अधिकारों पर हमला माने और इस फैसले के खिलाफ संघर्ष और आंदोलन शुरू करें

कश्मीर में आन्दोलन शांति प्रिय, हिंसक या मिलाजुला किसी भी तरह का हो सकता है

और बहुत स्वाभाविक है कि सरकार उसके बाद उस आंदोलन को कुचलने की कोशिश करे

इसके लिए अर्धसैनिक बल और सेना का इस्तेमाल किया जाएगा

और जब भी अर्ध सैनिक बल और सेना जनता का सामना करने के लिए तैनात किए जाते हैं तो वहां बड़े पैमाने पर मानवाधिकार हनन होते हैं

नौजवान गायब कर दिए जाते हैं उनकी हत्या करी जाती हैं महिलाओं से बलात्कार होता है घरों को जला दिया जाता है

निर्दोष लोगों को सताया जाता है

हो सकता है सरकार के इस कदम के बाद कश्मीर में हिंसा का एक नया दौर शुरू हो जाए

यह भी संभव है कि भारत में अगर बड़े पैमाने पर कश्मीर में मानवाधिकारों का हनन किया गया तो यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन जाए

और यदि कश्मीर में मानवाधिकारों का हनन अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बना तो आशंका यह भी है कि इस मामले में अमेरिका बीच में कूद पड़ेगा

अमेरिका दक्षिण एशिया में अपना अड्डा बनाने के लिए लंबे समय से फिराक में है

कश्मीर अशांति और खून खराबे के एक नए दौर में डूब सकता है

इसके अलावा लद्दाख में खनिज बहुतायत में है

लद्दाख के खनिजों पर बड़े उद्योग पतियों की नजर है

अडानी और अंबानी को लद्दाख के इलाके में बड़ी-बड़ी जमीने सौंपी जा सकती हैं

और खनन शुरू हो सकता है

हिमालय एक नया पहाड़ है

इसलिए हिमालय में बार बार भूकंप का खतरा बना रहता है

हिमालय में यदि खनन शुरू हुआ तो वहां भूकंप का खतरा और भी बढ़ जाएगा

जिसके कारण पानी की धारायें अपना रास्ता बदलकर भारत से दूसरी तरफ जा सकती है

इसके अलावा बड़े पैमाने पर कश्मीर में जनसंख्या का धार्मिक अनुपात बदलने के लिए बाहर से लोगों को ले जाकर बसाने की सरकार ने कोशिश करी तो

जाहिर है नई आबादी पहाड़ों की ढलान पर बसाई जाएगी

इसके लिए बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जाएंगे जिसके कारण भूस्खलन बढ़ेगा और बरसात और बर्फबारी होना कम होता जाएगा

कश्मीर की लड़ाई वहाँ के ग्लेशियरों से निकलने वाले पानी की लड़ाई है

कहा जाता है कि तीसरा विश्वयुद्ध पानी को लेकर होगा

लेकिन अगर आप पहाड़ों में मैदानी इलाकों से ले जाकर लोगों को वहां बसाएंगे

जिसके लिये बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई करी गई

तो भारत जिस पानी के लिए कश्मीर को अपने साथ जोडे रखने की कोशिश में लगा हुआ है

वह फायदा ही भारत के हाथ से निकल जाएगा

इसीलिए भारत के लगभग सभी पहाड़ी राज्यों में बाहरी लोगों के बसने और जमीन खरीदने पर रोक लगी हुई है

उत्तराखंड, हिमाचल और उत्तर-पूर्व के राज्यों में बाहरी लोगों के जमीन खरीदने पर कानूनी रोक है

अगर मुसलमानों को सबक सिखाने के चक्कर में कश्मीर की भौगोलिक विशेषताओं और पर्यावरण को नष्ट किया गया

तो इसका खामियाजा पूरे भारत को भुगतना पड़ेगा

बहरहाल हमारी चिंता लोकतंत्र शांति और प्रकृति और इंसानियत को बचाने की है

और हम कोशिश कर रहे हैं कि भारत के सभी लोग इसकी चिंता करें .


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