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जन स्वास्थ्य अभियान की अपील : गोरखपुर के डॉ. कफील खान को रिहा करो.

23.04.2018

हम सभी अधो हस्ताक्षर कर्ता, डॉक्टरी पेशे और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्य से जुड़े व्यक्ति और संगठन, इस पत्र के माध्यम से डॉ. कफ़ील खान के लिए न्याय – उनकी तत्काल रिहाई और उनके खिलाफ लगाए गए गलत आरोपों को ख़ारिज करने की मांग करते हैं ।

अगस्त 2017 में गोरखपुर, उत्तर प्रदेश में स्थित बाबा राघव दास (बीआरडी) चिकित्सा महाविद्यालय में हुई 70 से अधिक बच्चों की भयावह मौत पूरे देश और समाज को दहला देने वाली थीं । हालांकि साफ़ तौर पर इस घटना का कारण चरमराती हुई सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओँ में हुई प्रशासनिक ढील थी, लेकिन शासन ने दुर्भाग्यपूर्ण प्रतिक्रिया के रूप में बीआरडी चिकित्सा महाविद्यालय के एक डॉक्टर – डॉ. कफ़ील ख़ान- पर झूठे आरोपों के तहत मामला दायर कर दिया । ऑक्सीजन सिलेंडर सहित बुनियादी ज़रूरतों के अभाव की संगीन स्थिति से निपटने के लिए तात्कालिक कदम उठाते हुए एक चिकित्सक होने की अपनी जिम्मेदारी नैतिकतापूर्ण तरीके से निभाने के बावजूद भी डॉ. क़फील ख़ान को जेल में बंद रखा गया है ।

 

आपातकालिक स्थिति में, अस्पताल की खराब व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से पैदा हुई चुनौतियों के बावजूद भी एक डॉक्टर और एक सरकारी कर्मचारी होने के अपने कर्तव्यों का निर्वाह करने के उनके प्रयासों की सराहना करने के बजाय उन्हें दंडित किया गया।

 

यह बेहद चिंता का विषय है कि अगस्त 2017 के बाद से, डॉ. क़फील ख़ान पर 'हत्या के प्रयास' का आरोप लगाया गया है और वह तब से जेल में ही बंद है। निर्दोष होने और उनपर लगाए गए आरोप झूठे होने की उनकी अपील को राज्य सरकार और न्यायपालिका, दोनों ने अनदेखा कर दिया है। उन्हें ज़मानत से वंचित रखा जा रहा है और न्याय से भी । उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाई न सिर्फ उनके साथ अन्याय है, बल्कि उन सभी बच्चों और उनके परिवारजनों के साथ भी, जिनकी मदद के लिए डॉ. कफ़ील ख़ान ने हरसंभव कदम उठाये थे।

 

डॉ. कफ़ील ख़ान ने पूरी तरह से पुलिस कार्यवाही में सहयोग दिया था और कानूनी व्यवस्था में विश्वास के साथ आत्मसमर्पण कर दिया था, इस उम्मीद में कि कानूनी प्रक्रिया विधिगत और निष्पक्ष होगी।

 

हम मांग करते हैं कि डॉ. कफ़ील ख़ान को तुरंत रिहा किया जाए और बीआरडी चिकित्सा महाविद्यालय समेत अन्य सरकारी स्वस्थ्य सेवाओं को मज़बूत बनाने के लिए तत्काल कदम उठाये जायें ताकि इस तरह की त्रासदी की पुनरावृत्ति न हो | इस दिशा में प्रयास ही गोरखपुर त्रासदी में शहीद हुए बच्चों के परिवारजनों और कठिनाईयों के बावज़ूद निष्ठापूर्ण तरीके से कोशिश करने वाले एक चिकित्सक को न्याय देने की तरफ सार्थक कदम होगा ।

हमारी मांगें हैं कि –
 डॉ. कफ़ील ख़ान को तुरंत ज़मानत पर रिहा किया जाए और उनके खिलाफ लगाए गए सभी गलत आरोपों को रद्द किया जाए।

 डॉ. कफ़ील ख़ान और उनके जैसे अन्य स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और स्वास्थ्य कर्मियों को, जो पेशेवर ढंग से अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं, उन्हें उचित सम्मान दिया जाना चाहिए। उनके परिश्रम और सेवाओं को सरकार द्वारा औपचारिक तौर पर सराहा जाना चाहिए ।

 सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के प्रतिनिधित्व वाली एक स्वतंत्र न्यायिक जांच समिति गठित की जानी चाहिए जो प्रणाली के स्तर पर हुई गलतियों और घटनाओं की जांच करे और राज्य में बच्चों के स्वास्थ्य से सम्बंधित और अन्य स्वास्थ्य-सम्बंधित ज़रूरतों से जुडी सरकारी स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने के लिए उपायों को सुझाये।

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