सांप्रदायिकता

जनसंघ के अध्यक्ष श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने लिखा था की हिन्दू मुस्लिम के बीच गृह युद्द ही एक मात्र रास्ता हैं .

जनसंघ के अध्यक्ष श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने लिखा था की हिन्दू मुस्लिम के बीच गृह युद्द ही एक मात्र रास्ता हैं .

त्रिपुरा का राज्यपाल का ट्विट .

 

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त्रिपुरा के राज्यपाल ने तथागत रॉय ने ट्विट किया की “ हिन्दू मुस्लिम समस्या का अंत गृहयुद्द के बिना संभव नहीं है.लिंकन की तरह .

जब इसके बाद उनकी आलोचना होने लगी तो उन्होंने  पलट कर जबाब दिया की यह मेरे विचार नहीं बल्कि यह तो श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने 10 जनवरी 1946 को लिखा था “ में किसी की वकालत नहीं करता

आज़ादी के बाद मंत्रिमंडल में श्यामाप्रसाद मुखर्जी हिन्दू महा सभा के कोटे से भारत के उद्योग मंत्री बने थे नेहरु की केबिनेट में .जिस समय महात्मा गाँधी हिन्दू मुस्लिम दंगो के खिलाफ अभियान चला रहे थे और शांति की स्थापना कर रहे थे उस समय ही देश में हिन्दू महासभा और मुस्लिम लीग दंगे भड़का रहे थे .

गृहयुद्द वाले लेख को यदि सरल भाषा में लिखा जाये तो उनका कहना यही था की भारत में हिन्दू मुस्लिम को सीधे आपस में युद्द में उतर जाना चाहिए , इतनी उत्तेजक बात मुस्लिम लीग भी कह रही थी , मुस्लिम लीग का दर्शन भी यही था की हिन्दू मुस्लिम दो कोम है वे एक साथ नहीं रह सकते ,ठीक यही तर्क हिन्दू महासभा और दुसरे हिन्दू संघटनो का भी था ,जब की गाँधी और कोंग्रेस ठीक इसके विपरीत बात कह रही थी ,आज़ादी के आन्दोलन की विरासत यही थी की भारत हिन्दू ,मुस्लिम और दुसरे सभी धर्म का है ,इसमें सबको बराबर के अधिकार होंगे,इसी अवधारणा पर भारत के संविधान की रचना की गई थी .

त्रिपुरा के राज्यपाल ऐसे ही बयानों के लिया जाने जाते हैं .इसके पहले याकूब के ज़नाज़े में शामिल होने वाले सभी लोगो को आतंकी बता चुके है

श्यामाप्रसाद मुखर्जी के इस लेख ने एक बार फिर चर्चा शुरू कर दी है की आज़ादी के आन्दोलन के समय संघ और उनके लोग अंग्रेजो के हाथ में खेल  रहे थे ,और देश में अशांति चाहते थे .

 

जनसंघ के अध्यक्ष श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने लिखा था की हिन्दू मुस्लिम के बीच गृह युद्द ही एक मात्र रास्ता हैं .

त्रिपुरा का राज्यपाल का ट्विट .

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त्रिपुरा के राज्यपाल ने तथागत रॉय ने ट्विट किया की “ हिन्दू मुस्लिम समस्या का अंत गृहयुद्द के बिना संभव नहीं है.लिंकन की तरह .

जब इसके बाद उनकी आलोचना होने लगी तो उन्होंने  पलट कर जबाब दिया की यह मेरे विचार नहीं बल्कि यह तो श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने 10 जनवरी 1946 को लिखा था “ में किसी की वकालत नहीं करता

आज़ादी के बाद मंत्रिमंडल में श्यामाप्रसाद मुखर्जी हिन्दू महा सभा के कोटे से भारत के उद्योग मंत्री बने थे नेहरु की केबिनेट में .जिस समय महात्मा गाँधी हिन्दू मुस्लिम दंगो के खिलाफ अभियान चला रहे थे और शांति की स्थापना कर रहे थे उस समय ही देश में हिन्दू महासभा और मुस्लिम लीग दंगे भड़का रहे थे .

गृहयुद्द वाले लेख को यदि सरल भाषा में लिखा जाये तो उनका कहना यही था की भारत में हिन्दू मुस्लिम को सीधे आपस में युद्द में उतर जाना चाहिए , इतनी उत्तेजक बात मुस्लिम लीग भी कह रही थी , मुस्लिम लीग का दर्शन भी यही था की हिन्दू मुस्लिम दो कोम है वे एक साथ नहीं रह सकते ,ठीक यही तर्क हिन्दू महासभा और दुसरे हिन्दू संघटनो का भी था ,जब की गाँधी और कोंग्रेस ठीक इसके विपरीत बात कह रही थी ,आज़ादी के आन्दोलन की विरासत यही थी की भारत हिन्दू ,मुस्लिम और दुसरे सभी धर्म का है ,इसमें सबको बराबर के अधिकार होंगे,इसी अवधारणा पर भारत के संविधान की रचना की गई थी .

त्रिपुरा के राज्यपाल ऐसे ही बयानों के लिया जाने जाते हैं .इसके पहले याकूब के ज़नाज़े में शामिल होने वाले सभी लोगो को आतंकी बता चुके है

श्यामाप्रसाद मुखर्जी के इस लेख ने एक बार फिर चर्चा शुरू कर दी है की आज़ादी के आन्दोलन के समय संघ और उनके लोग अंग्रेजो के हाथ में खेल  रहे थे ,और देश में अशांति चाहते थे .

 

 

 

 

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