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जगदलपुर पुलिस की अपने ही सिपाहियों के साथ अमानवीयता की पराकाष्ठा , सिपाही की पत्नी ने लगाया गले में फंदा .

 

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जगदलपुर / 24.06.2018

छतीसगढ में पुलिस परिजनों का आंदोलन पर छतीसगढ पुलिस की कार्यवाही से सिपाही की पत्नी की जान जाते जाते बची .

जगदलपुर के थाने परपा में पदस्थ आरक्षक विनोद यादव और उनके भाई वीरेंद्र यादल चित्रकोट थाने में कार्यरत थे ,दोनों को पुलिस परिजनों के आंदोलन मे सक्रिय होने का आरोप लगाकर विनोद यादव को ककनार और वीरेन्द्र यादव को मारडूम के मलवाही में तबादला कर दिया.
अगले दिन ही दोनों के परिवार को मकान खाली  करने का आदेश भी भेज दिया और उन दोनों की पत्नीयों को तामील भी करा दिया गया.
स्वाभाविक रुप से परेशान आरक्षक की पत्नी प्रेमकला एस पी के पास गई और कहा की वो आंदोलन में शामिल नहीं है ,उनका मकान अभी खाली न कराया जाये ,हमारा परिवार कहाँ मारा मारा फिरेगा ,लेकिन एसपी ने एक बात भी नहीं सुनी और उन्हें आफिस से भगा दिया .
वापस आकर प्रेमकला में खुद को फांसी के फंदे पर झूला दिया ,वक्त रहते उसकी दोरानी ने यह देख लिया और शौर मचाने पर उनकी जान बच सकी .जान बचाने वाली दोरानी के पति को भी एक दिन पहले तबादला किया था.
पुलिस का अपने ही लोगों पर ऐसा अमानवीय व्यवहार निंदनीय हैं .
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