किसान आंदोलन राजनीति

छत्तीसगढ़ के 21 किसान संगठन एकजुट हुये , सरकारों की वादाखिलाफी के विरोध में रायपुर में जुटेंगे हजारों किसान : 8 जनवरी को आयोजित होगा किसान संकल्प सम्मलेन ● आज रायपुर में पत्रकार वार्ता में 21 किसान संगठनों ने की अपील .

22.12.2017

सम्पूर्ण कर्ज माफ़ी, स्वामीनाथन आयोग की प्रमुख सिफारिश लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य, पिछले दो वर्षो का धान का 300 रूपये बोनस सहित जबरन भूमि अधिग्रहण को बंद करने, पांचवी अनुसूची, पेसा और वनाधिकार मान्यता कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांगो पर साझे आंदोलन का एलान किया ।

● आंदोलन का पहला चरण 8 जनवरी 2017 को गाँधी मैदान रायपुर में एक दिवसीय किसान संकल्प सम्मेलन से होगा, इसमें देश के जाने माने किसान नेता व कृषि वैज्ञानिक शामिल होंगे जिनमे प्रमुख रूप से श्री देवेंद्र शर्मा सामाजिक कार्यकर्ता व कृषि वैज्ञानिक, कॉमरेड हन्नान मोल्ला महासचिव अखिल भारतीय किसान सभा, श्री योगेन्द्र यादव स्वराज आंदोलन, एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरविन्द्र नेताम शामिल हैं ।

● आयोजक संगठनो ने कहा कि

◆ वर्ष 2003 से लगभग 6 लाख से अधिक किसानों ने आत्महत्याएं की हैं l

◆ ‘धान का कटोरा’ कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में भी किसान आत्महत्याएं बढ़ी हैं l

◆ बेतहाशा बढ़ती लागतें एवं फसलों के सही दाम नहीं मिलने के कारण कड़ी मेहनत के बाद भी 99 फीसदी किसान और ज्यादा गरीब व क़र्ज़ के जाल में फंसते जा रहे हैं l

◆ 2014 में केन्द्र में सरकार बनाने और छत्तीसगढ़ में तीसरी बार सत्ता में आने के बाद भी उसने अपना वादा पूरा नहीं किया l

◆ इस वर्ष छत्तीसगढ़ में गंभीर सूखे की स्थिति हैं, इन परिस्थितियों में भी राज्य सरकार किसानों को राहत देने के बजाये उद्योगपतियों को हजारों करोड़ की सब्सिडी दे रही है l पिछले वर्ष ही में कोयला खनन के क्षेत्र में मौजूदा सरकार ने राज्य सरकार को प्राप्त होने वाले राजस्व में से ही

◆केवल 4 चुनिन्दा खनन कंपनियों को 3000 करोड़ रूपये की छूट स्टाम्प ड्यूटी में दी गई l 2100 करोड़ रूपये मोबाइल वितरण के लिए आवंटित किया गया l 20 हजार गाँव को मिलने वाले 14 वें वित्त आयोग की राशि में अवैधानिक ढंग से कटौती करते हुए 600 करोड़ रूपये मोबाइल टावर लगाने वाली टेलीकाम कम्पनियों को दिया जा रहा हैं l

◆ ग्रीष्मकालीन धान की फसल एवं सिंचाई पर पाबंदी लगाते हुए उद्योगों को पानी पर पहली प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया ।

◆ घने वन क्षेत्रों के आदिवासी किसानों को खनन, बांध व उद्योग के नाम पर विस्थापित किया जा रहा हैं l पांचवी अनुसूची, पेसा एवं वनाधिकार मान्यता कानून के प्रावधानों का उल्लंघन कर आदिवासियों के जंगल, जमीन को विधिविरुद्ध तरीके से पूंजीपतियों को दिए जाने का कार्य स्वयं राज्य सरकार द्वारा किया जा रहा हैं l l

● प्रेस कांफ्रेंस में सुदेश टीकम , रमाकांत बंजारे, आनंद मिश्रा नंदकुमार कश्यप , आलोक शुक्ला उपस्थित थे ।
साझे मोर्चे में छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन, जिला किसान संघ राजनांदगांव, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा (मजदूर कार्यकर्त्ता समिति), अखिल भारतीय किसान सभा (छत्तीसगढ़ राज्य समिति) छत्तीसगढ़ किसान सभा, हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति (कोरबा, सरगुजा) किसान संघर्ष समिति (कुरूद) आदिवासी महासभा (बस्तर) दलित आदिवासी मजदुर संगठन (रायगढ़), दलित आदिवासी मंच (सोनाखान) संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा (कांकेर), पेंड्रावन जलाशय बचाओ किसान संघर्ष समिति (बंगोली, रायपुर) भारत जन आन्दोलन सरगुजा व गाँव गणराज्य अभियान (सरगुजा) जनाधिकार संगठन (कांकेर) मेहनतकश आवास अधिकार संघ (रायपुर) जशपुर जिला संघर्ष समिति, भारतीय खेत मजदूर यूनियन छत्तीसगढ़ राज्य समिति), राष्ट्रिय आदिवासी विकास परिषद् (छत्तीसगढ़ इकाई, रायपुर) आदि शामिल हैं ।
● आज ही छ्ग किसानसभा की बैठक हुयी । इसमें 8 जनवरी के कार्यक्रम को सफल बनाने सहित अनेक निर्णय लिए गये ।

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Nand Kashyap Sanjay Parate Rakesh Singh Krishnaprasad Padmalayam Vijoo Krishnan

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