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छत्तीसगढ़ : घोंघा बांध के विस्थापितों का आरोप, उपसरपंच ने उनकी ज़मीन पर किया जबरन कब्जा

फ़ोटो : अप्पू नवरंग

आज 2 जून 2019 कि सुबह 9:00 बजे से घोंघा बांध कोरी के डूब प्रभावित इलाके मानपुर, कोरी, पर्सादा के लगभग 50 आदिवासी अपनी समस्या लेकर बिलासपुर कलेक्टर से गुहार लगाने आए थे।

ग्रामीणों ने बताया कि 1980-81 में घोंघा बांध में डूब हो जाने के कारण वे वे बांध के आसपास और गांव में रह रहे हैं और विगत लगभग 40 सालों से डूब क्षेत्र के बाहर सिंचाई विभाग के द्वारा प्रदान पट्टे की भूमि पर खेती कर के अपना जीवन बिता रहे हैं। इनकी ज़मीन के 55 एकड़ इलाके को सिंचाई विभाग ने वन विभाग को से दिया था। वन विभाग ने इनके खेतों पर बुल्डोजर चलवा कर खेत सपाट कर दिए थे। ग्रामीणों ने उच्च न्यायालय में याचिका लगाई और स्टे ऑर्डर प्राप्त किया।

अब फिर से इन ग्रामीणों की ज़मीन पर ग्राम पीपरखूंटी के उपसरपंच टीकाराम और 20 अन्य असामाजिक तत्वों ने ज़बरदस्ती कब्ज़ा कर लिया है।

कृषि भूमी पर कब्ज़ा कर उपसरपंच बना रहा है बिल्डिंग

ग्रामीणों ने बताया कि पिछले पहीने की 5 तारीख की दरमियानी रात से पीपरखूंटी के उपसरपंच टीकाराम और उसके साथियों ने कब्ज़ा कर लिया है। ग्रामीणों की कृषि भूमि पर इन दबंगों ने बिल्डिंग निर्माण कार्य शुरू कर रखा है। उपसरपंच व उसके लोगों ने इन ग्रामीणों के साथ गाली गलौच और मारपीट भी की है।

ग्रामीणों को दी जान से मारने की धमकी

ग्रामीणों ने बताया कि दबंग उपसरपंच और उसके साथियों ने इन ग्रामीणों को जान से मारने की धमकी दी है। डरे हुए ग्रामीणों इस बात की शिकायत थाना प्रभारी कोटा, SDM कोटा, और SDOP कोटा से भी कर चुके हैं लेकिन प्रशासन आरोपियों के खिलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।

पूर्व कलेक्टर संजय अलंग से भी कर चुके हैं शिकायत

ग्रामीण पूर्व में इस घटना की शिकायत बिलासपुर कलेक्टर और बिलासपुर पुलिस अधीक्षक से भी कर चुके हैं, इस पर भी कोई कार्रवाई अब तक नहीं की गई है। इससे पहले जब ग्रामीणों ने शिकायत दर्ज कराई थी तब संजय अलंग बिलासपुर के कलेक्टर थे, उनकी तरफ से आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई या जांच नहीं की गई। अब संजय अलंग का प्रमोशन हो गया है और वे बिआस्पुर के कमिश्नर बना दिए हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि वे बीती 26 मई को कोटा अनुविभागीय अधिकारी कोटा के दफ़्तर के बाहर धरने पर भी बैठे थे पर कोई अधिकारी इन ग्रामीणों से मिलने तक नहीं आया।

कोटा तहसीलदार ने बेइज्जत कर के भगाया

ग्रामीणों ने बताया कि वे अपनी समस्या लेकर जब कोटा तहसीलदार से मिलने पहुंचे तो तहसीलदार साहब ने उनकी बात सुनना और समस्या का समाधान करने की जगह ग्रामीणों को बेइज्जत कर के से भगा दिया।

कोटा टीआई ने कहा ज़मीन इनकी नहीं है

कोटा टीआई राजकुमार सोरी ने बताया कि इन ग्रामीणों का बयान दर्ज कर लिया गया है और दूसरे पक्ष का बयान लेना अभी बाकी है। कोटा टीआई साहब ने ये भी कहा कि संबंधित ज़मीन प्रार्थी ग्रामीणों की नहीं है, इनकी ज़मीन बांध के पानी में डूब गई है, ये जिस ज़मीन पर अधिकार की बात कह रहे हैं उसपर इनका अवैध कब्ज़ा है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बयान होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीणों के विस्थापन से जुड़ी समस्या के बारे में पूछने पर कोटा तहसीलदार साहब ने कहा कि वे कल पटवारी को भेजकर मामले की जांच कराएंगे। इन ग्रामीणों के पुनर्वास की क्या व्यवस्था कब की गई थी? कितने लोगों का पुनर्वास अब भी नहीं हो पाया है? ग्रामीणों को डूब में ज़मीन आने का पर्याप्त मुआवजा मिला है या नहीं? इस बारे में प्रशासनिक अमले को भी कोई ठीक ठीक जानकारी नहीं है।

अपनी ज़मीन से विस्थापित हो चुके कोटा के पीपरखूंटी के ये ग्रामीण अब दर दर भटक रहे हैं। इनके पास उस ज़मीन के अलावा जीवन यापन का कोई और साधन नहीं है। वे अपनी समस्या लेकर दर दर भटक रहे हैं पर कोई अधिकारी उनकी समस्या सुनने तक को तैयार है।

प्रभावित ग्रामीणों की बात सुनकर ये मालूम होता है कि बांध के पानी में ज़मीन डूब जाने के बाद इन सभी पुनर्वास की व्यवस्था ठीक तरीके से नहीं की गई है।

ये कृषि भूमि ही उन गांव वालों और उनके छोटे छोटे बच्चों के जीवनयापन का एकमात्र सहारा है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि ये ज़मीन भी उनसे छिन गई तो वे बेमौत मारे जाएंगे।

ये ग्रामीण बच्चों और परिवार समेत बिलासपुर कलेक्टर से मिलने आए थे। इन्हें कब तक इस तरह भटकना होगा इस बात का जवाब हमें किसी ने नहीं दिया।

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