किसान आंदोलन छत्तीसगढ़ रायपुर

छत्तीसगढ़ : खस्ताहाल मंडियों में बारिश से बर्बाद हो रहा है धान

balaudabazar

पत्रिका अखबार में प्रकाशित ख़बर

फ़ोटो क्रेडिट : पत्रिका

बलौदा बाजार. किसानों से समर्थन मूल्य में धान की खरीदी को पूर्ण हुए भले ही लगभग एक माह का समय हो चुका है परंतु जिले में उपार्जन केन्द्र से लेकर संग्रहण केन्द्रों तक आज भी धान की दुर्दशा का दौर जारी है। बार-बार मौसम खराब होने की वजह से होने वाली बरसात से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों की लापरवाही धान के लिए मुसीबत साबित हुई है।

घोर लापरवाही की वजह से जिले की वजह से धान खरीदी पूर्ण होने के बाद भी धान का परिवहन बेहद धीमा है जिसकी वजह से 3 अरब 97 करोड़ रुपए का धान आज भी उपार्जन केन्द्रों में रखा हुआ है। वहीं बरसात में भीगने की वजह से कई उपार्जन केन्द्रों में तो धान के बोरों से बाली निकलने लगी है। विदित हो कि इस वर्ष राज्य शासन द्वारा समर्थन मूल्य पर किसानों से 20 फरवरी तक धान की खरीदी की गई है, परंतु परिवहन की रफ्तार काफी धीमी है। इसकी वजह से समितियों से लेकर शासन तक का नुकसान होना तय है।

जिला प्रशासन ने परिवहन को जल्द से जल्द कराए जाने के लिए कई बार निर्देश तो दिए परंतु इन निर्देशों का पालन कभी नहीं किया गया। जिले में परिवहन के साथ ही साथ इस वर्ष धान को सुरक्षित रखने में भी गंभीर लापरवाही बरती गई है जिसका परिणाम है कि जिले के बहुत से उपार्जन केन्द्रों में धान के बोर बार बार हो रही बारिश से भीगते रहे, अब अंकुरण भी बोरों से बाहर आने लगा है, परंतु अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद नहीं टूटी है।

जिले की बलौदा बाजार शाखा में 1 लाख 17 हजार क्विंटल, लवन शाखा में 1 लाख 88 हजार क्विंटल, कसडोल शाखा में 3 लाख 36 हजार क्विंटल, भटगांव शाखा में 2 लाख 45 हजार क्विंटल, टुण्ड्रा शाखा में 1 लाख 15 हजार क्विंटल, भाटापारा शाखा में 1 लाख 21 हजार क्विंटल, निपनिया शाखा में 1 लाख 52 हजार क्विंटल, सिमगा शाखा में 1 लाख 81 हजार क्विंटल, भटभेरा शाखा में 1 लाख 68 हजार क्विंटल से अधिक धान कुल मिलाकर जिले की 16 शाखाओं में 21.83.965 क्विंटल से अधिक धान परिवहन के अभाव में रखा हुआ है जो 397 करोड़ 48 लाख रुपए से अधिक का है, जिसका अब तक परिवहन न हो पाना गंभीर लापरवाही है।

कई उपार्जन केन्द्र खतरनाक स्थानों में

जिले में कई उपार्जन केन्द्रों की स्थापना के दौरान स्थल चयन में चूक कभी भी गंभीर हादसों को जन्म दे सकती है। अधिकारियों की इसी लापरवाही का उदाहरण खोखली उपार्जन केन्द्र है। उपार्जन केन्द्र हाईटेंशन तार के ठीक नीचे है। उपार्जन केन्द्र में धान का परिवहन करने आने वाले वाहन कई बार हाईटेंशन तार के ऐन नीचे खड़े रहते हैं और श्रमिक ट्रक के ऊपर चढ़कर धान के बोरे चढ़ाते रहते हैं। ठीक हाईटेंशन तार के नीचे होने की वजह से कभी भी दुर्घटना का खतरा बना रहता है। इस ओर आज तक ध्यान न दिया जाना आश्चर्य की बात है।  

Related posts

भाजपा हराओ लोकतंत्र बचाओ सांप्रदायिक उन्माद नहीं सुनिश्चित रोजगार चाहिए . छत्तीसगढ़ के सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवीयों ,साहित्यकारों ,रंगकर्मियों की  मतदाताओं से नागरिक अपील.

News Desk

आत्महत्या के किसानो के साथ अपमानजनक व्यवहार किया कृषि मन्त्री ने .

News Desk

धमतरी में एक और किसान के आत्महत्या की खबर हैं

News Desk