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चीफ़ जस्टिस के साथ खेल ….

नदीम एस अख्तर, वरिष्ठ पत्रकार, दिल्ली

21.04.2019

 जब अनिल अंबानी की शह पर सुप्रीम कोर्ट का कर्मचारी कोर्ट के फैसले को बदलकर सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर लगा सकता है और जब जज को पता चलता है तो आनन-फानन में फैसले को ठीक करवाकर वेबसाइट पर अपलोड किया जाता है और सम्बंधित कर्मचारी को नौकरी से बर्खास्त किया जाता है तो….

जब देश का चुनाव जीतना हो और सुप्रीम कोर्ट दोबारा #राफेल भ्रष्टाचार की सुनवाई के लिए तैयार हो गया हो, चीफ जस्टिस ने इसके लिए हामी भर दी हो तब सुप्रीम कोर्ट की एक महिला कर्मचारी द्वारा चीफ जस्टिस पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा दिया जाता है। मामले के तार जोड़िए। जिस कर्मचारी ने कोर्ट के फैसले को बदलकर वेबसाइट पे लगाया, उसे पता था कि अब उसकी नौकरी जाएगी। पर सोचिये, उसे अम्बानी से कितना पैसा मिला होगा इस काम के लिए, जितना वह जीवनभर में नहीं कमा सकता था।

इसके बाद एक महिला कर्मचारी ने चीफ जस्टिस पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा दिया है। वह भी पूरे 7-8 महीने बाद। खुद जजों के साथ काम कर रही है। उनको किसका डर था? इतनी देर से मुंह क्यों खोला??!! कई सवाल हैं। उनको भी पता होगा कि चीफ जस्टिस पर आरोप लगा रही है, अगर वह गलत निकली तो नौकरी भी जाएगी और सज़ा भी मिलेगी।

खेल तो हो गया। अब #सुप्रीमकोर्ट राफेल को छोड़कर चीफ जस्टिस के यौन उत्पीड़न वाले मामले से जूझता रहे। पर य ह मामला backfire भी कर सकता है। जज भी इंसान होते हैं। क्या हम उम्मीद करें कि अब सुप्रीम कोर्ट मोदी सरकार और बीजेपी पर बहुत सख्त होने जा रहा है!!

उदाहरण देता हूँ- राफेल के अलावा #चुनाव में #VVPAT की 50% फीसद पर्चियों के मिलान का मामला भी सुप्रीम कोर्ट में है। अगर कोर्ट ने इसे मान लिया तो #evm में खेल करना संभव नहीं हो पायेगा। तब सोचिये क्या होगा?

दूसरी बात। चुनाव आयोग ने बिना किसी क़ानून के मोदी जी का हेलीकॉप्टर चेक करने वाले #IAS को सस्पेंड कर दिया जिसकी आलोचना पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त क़ुरैशी साहब ने भी की है। अब अगर कांग्रेस इस मामले को तुरन्त लेकर सुप्रीम कोर्ट जाती है तो कोर्ट न सिर्फ चुनाव आयोग को नाप देगा, इस बात की जांच भी करवा देगा कि मोदी जी के हेलीकॉप्टर से जो रहस्यमय काला बक्सा उतारा गया था, उसे एक प्राइवेट गाड़ी में क्यों रखा गया और कहां ले जाया गया?? #नमो टीवी से लेकर हर चीज़ में सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग और बीजेपी को नाप सकता है। फटाफट। एकदम तड़ा-तड़ी। बस सुप्रीम कोर्ट के पास एक याचिका लेकर जाने की देरी है, कोर्ट तुरन्त एक्टिव हो जाएगा।

ये मामूली बात नहीं। भाई लोगों ने देश के चीफ जस्टिस के गिरेबां में हाथ डाला है। उनपर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए गए हैं। आपको क्या लगता है सुप्रीम कोर्ट और दूसरे हाई कोर्ट के जज चुप रहेंगे?! चुन-चुन के मामले निकाले जाएंगे और इनको नापा जाएगा। पूरा का पूरा। ऊपर से नीचे तक। प्रज्ञा ठाकुर के बाद एक और ब्लंडर। इसे कहते हैं विनाश काले विपरीत बुद्धि।

एक बात का यकीन आपको दिलाता हूँ। आगे से चीफ जस्टिस रंजन गोगोई आपको पूरे फॉर्म में दिखेंगे। उल्टी गिनती शुरू हो गयी इनकी।

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