राजकीय हिंसा राजनीति शिक्षा-स्वास्थय सांप्रदायिकता

गोरखपुर BRD कांड: डॉ कफ़ील निर्दोश, योगी सरकार की नीयत पर सवालिया निशान

अगस्त 2019 में गोरखपुर के BRD मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से 70 बच्चों की मौत हो गई थी. बगैर जांच किए इस मामले में डॉ कफील खान को निलंबित कर दिया गया था. वे दो साल से निलंबित थे और इस दौरान उन्होंने 9 महीने की जेल भी काटी. विभागीय जांच में वे निर्दोश साबित हुए हैं. उन्हें चिकित्सा लापरवाही, भ्रष्टाचार के आरोपों और हादसे के दिन अपना कर्तव्य नहीं निभाने के आरोपों से मुक्त कर दियागया है.

मीडिया विजिल की ख़बर के मुताबिक़ इस मामले में जांच अधिकारी हिमांशु कुमार, प्रमुख सचिव (टिकट और पंजीकरण विभाग) को यूपी के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने बीते 18 अप्रैल को रिपोर्ट सौंपी थी.

इस रिपोर्ट में कहा गया था कि कफील ने लापरवाही नहीं की थी और उस रात (10-11 अगस्त 2017) स्थिति पर काबू पाने के लिए सभी तरह के प्रयास किए थे. जांच की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. कफील अपने सीनियर अधिकारियों को ऑक्सीजन की कमी के बार में पहले ही इत्तला कर चुके थे.

रिपोर्ट में कहा गया है कि घटना वाली रात में डॉ. कफील ने बच्चों को बचाने के लिए भरपूर प्रयास किया था. डॉ. कफील उस रात अपने प्रयास से ऑक्सीजन सिलेंडर ले आये थे. उनकी तरफ से किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई थी.

इस रिपोर्ट के आने के बाद डॉ. कफील ने कहा है कि सरकार मृत बच्चों के परिजनों से माफ़ी मांगे और उन्हें मुआवजा दें.

https://twitter.com/i/status/1177441249889927168

वेब पोर्टल सबरंग इंडिया ने लिखा है कि इस रिपोर्ट के जाने के बाद डॉ. कफील ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कार्यवाहक प्रधानाचार्य को अपने सारे बक़ाया भुगतान सम्बन्धी पत्र दिया है। डॉ. कफील ने कहा कि कार्यवाहक प्रधानाचार्य ने बक़ाया भुगतान राशि जो कि क़रीब 16 लाख 66 हज़ार है जल्द से जल्द भुगतान का आश्वासन दिया है। 

दिनांक 10/05/19 को भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय की एक खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति- संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी शामिल थे ने डॉ. कफील खान के निलम्बन के सम्बन्ध में जांच हाई कोर्ट के 07-03-19  के आदेशानुसार जोकि 07-06-19 तक जाँच समाप्त करने को कहा था और योगी सरकार को निर्देशित कियाकि, डॉ. कफील खान के सभी देय निर्वाह भत्ता का भुगतान करे। डॉ0 कफील का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता सुश्री मीनाक्षी अरोड़ा और फ़ुजैल अहमद अय्युबी के वकील ने किया। 

इसके साथ ही डॉ. कफील ने कहा कि मैं बीआरडी ऑक्सीजन त्रासदी के पीड़ितों की ओर आपका ध्यानआकर्षित करता हूं। जिन मातापिता ने अपने मासूमों को खो दिया, वे अभी भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। मैं मांग करता हूं कि सरकार को माफी मांगनी चाहिए और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देना चाहिए।

बीआरडी नरसंहार के दोषी वो सारे लोग है जिन्होंने लिक्विड ऑक्सिजन सप्लायर के 14 पात्रों के बाद भी कमीशन के चक्कर में पेमेंट नहीं किया इनमें हेल्थ मिनिस्टर भी शामिल हैं। मेरी माँग है की उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री को तुरंत बर्खास्त करना चाहिए और  सारेमामले की सीबीआई जाँच होनी चाहिए।

डॉ. कफील को निर्दोश बताने वाली इस रिपोर्ट के आने के बाद अब कई अहम् सवाल मुह बाए खड़े हैं जिनके जवाद दिए ही जाने जाने चाहिए.
पहला सवाल तो यही है कि अप्रैल में पेश की जा चुकी इस रिपोर्ट को 5 महीने तक दबा कर क्यों रखा गया था?
किसे बचाने की कोशिश की जा रही है?
एक ईमानदार डॉक्टर को योगी सरकार ने क्यों निशाना बनाया, क्या उसके नाम की वजय से ऐसा किया गया ?
बगैर जांच आरोपी को जेल क्यों भेज दिया गया?
मृत 70 बच्चों के परिवारों को अब तक मुआवज़ा क्यों नहीं दिया गया है ?

Related posts

प्रदेश में अघोषित आपातकाल लगाकर नागरिक अधिकारों को निलंबित करने की कोशिश हो रही हैं : लोकतांत्रिक व संविधानिक अधिकारों के हनन एवं राजकीय दमन के खिलाफ धरना .रायपुर 

News Desk

कासगंज हिंसा पर लेखकों, कलाकारों, संस्कृतिकर्मियों तथा आमजन की अपील तथा बयान .

News Desk

6-9 अगस्त : हिरोशिमा दिवस के अवसर पर परमाणु ऊर्जा की असलियत व पर्यावरणीय क्षति पर चर्चा एवं युद्ध के विरूद्ध शांति का आह्वान दिया गया. : विमर्श एवं पीस.

News Desk