कला साहित्य एवं संस्कृति कविताएँ

गाब्रीएला मिस्त्राल की दो कविताएं

आज नवरात्रि के चौथे दिन प्रस्तुत है नोबेल पुरस्कार प्राप्त लैटिन अमेरिकी कवयित्री गाब्रीएला मिस्त्राल की दो कविताएँ जिनका अनुवाद कबाड़खाना ब्लॉग के श्री अशोक पाण्डेय, तथा हिमानी दीवान ने किया है. साभार ‘कबाड़खाना’ तथा ‘अमर उजाला’.

पहली कविता “अपना हाथ दो मुझे”

दो अपना हाथ और अपना प्रेम दो मुझे
अपना हाथ दो मुझे और मेरे साथ नाचो

बस एक इकलौता फूल
इस से ज़्यादा कुछ नहीं

हम बने रहेंगे
बस एक इकलौता फूल.

साथ नाचते हुए मेरे साथ एक लय में
तुम गीत गाओगे मेरे साथ

हवा में फ़क़त घास
इस से ज़्यादा कुछ नहीं

हम बने रहेंगे
हवा में फ़क़त घास.

उम्मीद है मेरा नाम और गु़लाब तुम्हारा

लेकिन अपने अपने नामों को खो कर हम दोनों मुक्त हो जाएंगे

पहाड़ियों पर बस एक नृत्य
इस से ज़्यादा कुछ नहीं

हम बने रहेंगे
पहाड़ियों पर बस एक नृत्य

कविता : गाब्रीएला मिस्त्राल
अनुवाद : अशोक पाण्डे
प्रस्तुति : शरद कोकास

दूसरी कविता “कभी नहीं, दोबारा कभी नहीं”

जगमगाती सितारों की रात में भी नहीं
न ही सूरज की पहली किरण के साथ
न ही किसी अलसाई सी दुपहरी में।

न ही खेत-खलिहानों के चारों तरफ बनी
पगडंडी के किसी छोर पर
न ही चांदनी की सफेद चादर ओढ़े
बहते झरनों के पास।

न ही मैं चाहती हूं उस जंगल के
घने पेड़ों के नीचे
उसका नाम पुकारना, जहां मैं पूरी रात बिना रूके आगे बढ़ती रही हूं।

न ही किसी गुफा में जहां
मेरे रोने की हर एक सिसकी मुझे
वापस गूंजती हुई सुनाई दे।

नहीं, उसे दोबारा देखने के लिए
जगह मायने नहीं रखती
स्वर्ग के ठहरे हुए जल में
या फिर किसी तपते बवंडर के बीच
खामोश चांद के नीचे या फिर
डर से घिरे हुए भी

उसके साथ होने के लिए
वसंत और शरद का हर मौसम
उसकी गर्दन के चारों तरफ
कसी हुई गांठ की तरह बंधा है।

कविता : गाब्रीएला मिस्त्राल
अनुवाद : हिमानी दीवान
प्रस्तुति : शरद कोकास


परिचय : गाब्रीएला मिस्त्राल नोबेल पुरस्कार पाने वाली पहली लातीन अमेरिकी महिला रचनाकार थीं १८८९ में चिली के वीकून्या नामक क़स्बे में जन्मी गाब्रीएला का वास्तविक नाम लूसिला गोदोई ई आलायागा था।

गाब्रीएला मिस्त्राल


गैब्रिएला जब तीन साल की थी पिता घर छोड़कर चले गए । शहर में माँ की सहेली ने उन्हें पाला । फिर वे एक गांव में लड़कियों के एक स्कूल में अध्यापन कार्य करने लगीं ।

गाब्रीएला की कविता के उत्स उनके पहले असफल प्रेम सम्बन्ध में खोजे जाते हैं अध्यापिका का पेशा अपनाने से पहले उनका सघन प्रेम एक रेलवे कर्मचारी से हुआ।इस रेलवे कर्मचारी ने डिप्रेशन के चलते बाद में आत्महत्या कर ली थी ।

केविता के कारण जब वे काफ़ी प्रसिद्ध हो गई थीं चिली की सरकार ने उन्हें लीग ऑफ़ नेशन्स में उन्हें अपने देश का सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व करने का ज़िम्मा सौंपा।

बाद के वर्षों में वे अमेरिका के कई विश्वविद्यालयों में स्पानी साहित्य पढ़ाती रहीं।

बीसवीं सदी के महानतम कवियों में शुमार पाब्लो नेरूदा को कविता लिखने की ओर प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली गाब्रीएला का देहान्त 1957 में हुआ.

संकलन व प्रस्तुति : शरद कोकास

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