आंदोलन जल जंगल ज़मीन पर्यावरण प्राकृतिक संसाधन

गांधी और ग्रेता : धरती बचाने बच्चों की हड़ताल

कल 20 सितम्बर को दुनिया मे अनोखी घटना हुई। 16 साल की ग्रेता थनबर्ग के समर्थन में दुनिया के तमाम देशों में लाखों बच्चों ने गर्म हो रही पृथ्वी को बचाने के लिए स्कूलों में हड़ताल किया और जागरूकता की रैली में शामिल हुए। अकेले न्यूयार्क में 11 लाख बच्चे इसमे शामिल हुए। स्वीडन की ग्रेटा थनबर्ग ने दुनिया भर में घूमकर पर्यावरण (Climate Strike) बचाने का संदेश दे रही है। उससे प्रभावित होकर अधिकांश देशों में लगभग साढ़े चार हजार प्रदर्शन हो चुके हैं। यह पहली बार किसी बच्चे की अगुवाई में हो रहा है धरती बचाने के लिए जबकि 100 साल पहले एक बूढ़े ने मनुष्यता बचाने के लिए ऐसा ही किया था जिसे लोग गांधी कहते हैं।

महात्मा गांधी ने ‘हिंद स्‍वराज’ में लिखा था- “इंग्‍लैंड जैसे देश को चलाने के लिए पूरी दुनिया का शोषण करना पड़ता है। अगर हमने इंग्‍लैंड की भौतिक सभ्‍यता की नकल की और आजादी के बाद भारत को इसी मॉडल पर आगे बढ़ाया तो हमें शोषण करने के लिए कई धरतियों की जरूरत पड़ेगी” जाहिर है गांधी के यह खयाल आज कितने सत्य और मौजूं हैं।

यह अद्भुत संजोग है कि आज जब हम गांधी की सार्द्धशती (150 साल) मना रहे हैं, एक बच्ची गांधी की राह पर है बिल्कुल उनकी ही शैली में। गांधी की ही तरह ग्रेता ने अकेले अपनी बात धरना प्रदर्शन करके किया और लोग उससे जुड़ते गए। बच्चों की इस हड़ताल को ग्रेता ‘मॉस सिविल डिसओबिडियंस’ कहती है। गांधी इसे ‘सविनय अवज्ञा’ कहते थे। गांधी ने कहा था – “धरती सभी जरूरतमंदों को दे सकने में सक्षम है पर किसी लालची के लिए अक्षम है।” इधर ग्रेता कह रही है – “हमारे पास प्लेनेट बी नही है, हमे हर हाल में धरती को बचाना होगा”। गांधी रेल में तीसरे दर्जे में यात्रा करते थे, ग्रेता नाव से यात्रा कर रही है। ग्रेता की यह कोशिशें ही गांधीवाद हैं।

ग्रेटा थनबर्ग को संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव एंटोनियो गुटर्स ने संयुक्‍त राष्‍ट्र क्‍लाइमेट समिट में उसे विशेष वक्‍ता के तौर पर बुलाया है। यहां 23 सितंबर को वह दुनिया के नेताओं को पर्यावरण बचाने के बारे में जागरूक करेगी। इसी क्रम में 27 सितम्बर को भी बच्चों की हड़ताल प्रस्तावित है। यह अद्भुत संजोग है कि गांधी जब डेढ़ सौ साल के हो रहे हैं, एक बच्ची के साथ दुनिया भर के बच्चे धरती को बचाने गांधी मार्ग से जा रहे हैं…

ग्रेता के इस आंदोलन पर 2 अक्टूबर को सभी शिक्षक मित्र अपने विद्यालयों में कार्यक्रम रखें और भारत के बच्चों को इस आंदोलन से परिचित कराएं। आइए, हम भी कुछ करें कि बच्ची रहे धरती।

आलेख : पियूष कुमार

Related posts

अंतागढ, कांकेर के कलगांव के 17 किसानों की जमीन बीएसपी टाऊनशिप के लिये छीन ली गई : ग्राम सभा प्रस्ताव पास करती रही व्यक्तिगत पट्टे के लिये .

News Desk

कोयलीबेड़ा। मेटाबोदेली माइंस से त्रस्त होकर ग्रामीण विरोधस्वरूप सड़क पर उतरने को मजबूर हो गए हैं।

News Desk

15 , 16 जनवरी से अनिश्चितकालीन धरना और प्रदर्शन और प्रतिरोध सभा .: बाजार चौक भेंगारी ,घरघोडा रायगढ :आदिवासी दलित मजदूर किसान संघर्ष समिति .

News Desk