कला साहित्य एवं संस्कृति

खरसिया : आर्टिकल 15 फिल्म सिनेमाघरों में प्रर्दर्शित करवाने हेतु मांग.

    खरसिया :  स्थानीय सिनेमाघरों में आर्टिकल 15 फिल्म प्रदर्शित किए जाने हेतु प्रगतिशील छत्तीसगढ सतनामी समाज संगठन एवं युवा प्रकोष्ठ तहसील इकाई खरसिया द्वारा पहल की गई। 
  संगठन के पदाधिकारियों द्वारा स्थानीय सिनेमाघर संचालक से मिलकर संवैधानिक विषय पर आधारित फिल्म आर्टिकल 15 को प्रदर्शित किए जाने हेतु आग्रह किया गया। 


  युवा प्रकोष्ठ संरक्षक राकेश नारायण बंजारे ने बताया कि आर्टिकल 15 फिल्म जब देश की संवैधानिक संस्था सेंसर बोर्ड द्वारा पास कर दी गई है तो इसके प्रदर्शन पर किसी को किसी भी प्रकार से आपत्ति नहीं होनी चाहिए। 28 जून से रिलीज फिल्म में जिस प्रकार से देश भर की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं उसके अनुसार इस फिल्म में किसी भी प्रकार से किसी भी समुदाय के प्रति नकारात्मक टिप्पणी नहीं की गई है और न ही किसी भी प्रकार से सामाजिक भावनाओं को आहत की गई है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15 समता के अधिकार की मूल विषय वस्तु पर आधारित फिल्म समाज के स्याह पक्ष को प्रस्तुत करती है।

  सामाजिक बुराइयाँ कोई नई नहीं है और न ही अस्वाभाविक है। समाज है तो उसमें अच्छाइयों के साथ साथ बुराइयाँ भी है। आदिकाल से समाज में विभिन्न प्रकार की विसंगतियां रहीं हैं समय-समय पर उनमें सुधार होते रहे हैं। सामाजिक बुराइयों से भी बड़ी बुराई उन विसंगतियों को देखते हुए भी उनके प्रति आंख मूंद लेनी है। समाज को शुतुरमुर्गी चाल से बचनी चाहिए। शुतुरमुर्ग खतरा देख कर उसका सामना नहीं करता वरन् अपनी शीश जमीन में धंसा लेता है जिससे शिकारी उसे देख न पाए और होता उससे उलट है। शिकारी उसके गर्दन काटकर सिर वहीं छोड़ बाकी हिस्सा ले जाता है। उसी तरह यदि समाज में बुराइयाँ हैं जो वर्षों से इसे अंदर ही अंदर खोखला कर रही है तो समाज को उससे आंख न मूंद कर उसका सामना करना चाहिए और उसे दूर करने के लिए समग्र कदम उठाने चाहिए। 

यह बहुत खुशी की बात है कि संवैधानिक मसले और ज्वलंत मुद्दों पर फिल्म बनाने का साहस किया गया। यदि इसे प्रोत्साहित न किया गया तो उन बुराइयों को बाहर लाने का साहस कौन करेगा। जब बालीवुड की अत्यधिक हिंसा, सेक्स, अंधविश्वास, बेमतलब के जादू टोने-टोटके पर आधारित फिल्में परोसी जातीं हैं, सिनेमाघरों में प्रदर्शित की जाती है और किसी को किसी भी तरह से दिक्कत नहीं होती तो संवैधानिक विषय पर ज्वलंत सामाजिक मुद्दों पर बनी फिल्मों से परहेज क्यों?  न केवल सिनेमाघर मालिकों से आग्रह है कि आर्टिकल 15 का प्रदर्शन किया जाए अपितु इसके व्यापक प्रचार प्रसार भी किया जाना चाहिए। 

    सिनेमाघरों में ज्ञापन देने के दौरान सतनामी समाज अध्यक्ष इंद्रा बघेल, युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष राकेश घृतलहरे, उपाध्यक्ष महिपाल सिंह, कोषाध्यक्ष सुंदर कुर्रे, सचिव मोहन भारद्वाज, संगठन मंत्री अरविंद बंजारे, युवराज बंजारे, वरिष्ठ सलाहकार दिलीप कुर्रे, नरेंद्र कुर्रे, संरक्षक राकेश नारायण बंजारे एवं नागरिक गण उपस्थित रहे।
***

Related posts

इप्टा रायगढ का ग्रीष्मकालीन बाल रंग शिविर . 70 बाल कलाकर हुए शामिल , शिविर में चार समूह गान , तीन नृत्य एवं दो नाटक की प्रस्तुति.भारी सराहना .

News Desk

हिंसा के बूचड़खाने में सत्य का बीफ : कनक तिवारी 

News Desk

व्यंग : ” अधिमान्य पत्रकार माधो ” किरीट ठक्कर

News Desk