शिक्षा-स्वास्थय

क्या वे मूर्ख_हैं ? नही , बिल्कुल नही उनकी मंशा है एक अज्ञानी और कूढ़मगज, अंधविश्वासी और कुपढ समाज का निर्माण करना.

बादल सरोज

विज्ञान की प्रमाणित खोजें कहती हैं कि बमुश्किल
90 हजार साल पहले की बात है जब अफ्रीका के बाहर नियंडरथल मानव पहुंचा
अब तक मिला उसका सबसे पुराना घर, सबसे पुरानी गुफा कोई 32 हजार साल पुरानी है
कोई 30 हजार साल पहले आधुनिक मानव का निकटतम पुरखा होमो इरेक्टस आया
भेड़, बकरी और कुत्तों को पालतू बनाना महज 10 से 15 हजार साल पहले की बात है
9500 साल पहले उसने गेंहू और जौ उगाना सीखा, 7500 साल पहले चावल और बाजरे की खेती सीखी
7000 साल पहले उसने दुधारू जानवरों को पालना सीखा
6500 साल पहले घोड़े उसके काबू में आये – 5500 साल पहले उसने पहिये -व्हील- का आविष्कार किया
4800 साल पहले कागज पर लिखना सीखा
4 से 5000 साल पहले वेद रचे गए
2700 साल पहले लोहे का इस्तेमाल शुरू हुआ
2500 साल पहले बुध्द हुए
3000 साल पहले पूरी पूरी पृथ्वी की आबादी थी महज 5 करोड़
2200 साल पहले हुए भारत की भौतिकवादी परंपरा के #ऋषिकणाद जिन्होंने कहा कि “दुनिया किसी ने नही बनाई । हर वस्तु छोटे छोटे बेहद महीन और सूक्ष्म कणों से मिलकर, उनके संयोग से बनी है ।” इन्हें उन्होंने #किवलय (अणु) कहा । और भारत के #शिक्षामंत्री कहते हैं कि एक लाख – 100000 – वर्ष पहले कणाद ने परमाणु बम की खोज कर ली थी .
क्या वे मूर्ख हैं ? नही , बिल्कुल नही ।
उनकी मंशा है एक अज्ञानी और कूढ़मगज, अंधविश्वासी और कुपढ समाज का निर्माण करना । खुद विज्ञान की नवीनतम खोजों के लाभ उठाना, जनता को पौंगा बनाना ।

असलमे वेधूर्त हैं !

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