आदिवासी मानव अधिकार

क्या आज हमारे वन सम्पदा, खनिज सम्पदा व जमीन क्या हमारे पास हैं। क्या संविधान द्वारा प्रदत्त 5वीं व 6ठी अनुसुची व उनके मौलिक अधिकार आदिवासीयों को मिल रहे हैं? : सोनू मरावी

क्या संविधान द्वारा प्रदत्त 5वीं व 6ठी अनुसुची व उनके मौलिक अधिकार आदिवासीयों को मिल रहे हैं? फिर में कैसे गणतंत्र दिवस की बधाई दूँ?

सोनू मरावी

25.01.2018

आप सभी को गणतंत्र दिवस की बधाई । बधाई क्यों? 26 जनवरी 1950 को ऐसा क्या मिला है देश के असली मुलबीजों को जिसका हम बडे जोर शोर से उत्सव मनाते हैं।ऐसा कौन सा आजादी मिल गयी देश में जो स्वतंत्रता दिवस का उत्सव मनाते हैं?
आज एक प्रश्न हमें स्वयं से करना होगा कि क्या हम अपनी इस धरती पर आजाद हैं?
क्या हमें हमारे सारे हक, न्याय, अधिकार हमें मिल रहे हैं?
क्या हम समान नागरिक समान जीवन यापन कर रहे हैं ।
क्या संविधान द्वारा प्रदत्त सभी अधिकार आदिवासीयों को मिल रहे हैं?
ऐसे बहुत से प्रश्न है जो हमें स्वंय से करने की जरूरत है ।
आज देश में आदिवासीयों की स्थिति सबसे दयनीय है पर हमें इस बात की जरा भी चिंता नहीं है।
हम बस आरक्षण नाम के लड्डु खाकर अपनी परिवार तक सीमित रहना चाहते हैं। हम धर्म का चोला पहन कर खुद को आधुनिक व सभ्य दिखाना चाहते हैं। हम बस अमीर हो जाना चाहते हैं। हमें बाकि आदिवासीयों से कोई मतलब नहीं रखना चाहते।
अब हमें खुद को आदिवासी कहने मे भी झिझक महसुस होती है।
“प्रकृति का नियम है कि सभी जीव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एक दुसरे पर निर्भर है।”
उसी प्रकार आज आदिवासी हैं तो अपनी अनुठी भाषा, संस्कृति व सम्पदा के बल पर, हम इसे छोडकर खुद को आदिवासी नही कह सकते । क्योंकि आदिवासी सिर्फ वही है जो अपनी संस्कृति को जीता है।
क्या आज हमारे वन सम्पदा, खनिज सम्पदा व जमीन क्या हमारे पास हैं। क्या संविधान द्वारा प्रदत्त 5वीं व 6ठी अनुसुची व उनके मौलिक अधिकार आदिवासीयों को मिल रहे हैं?

आज तरह तरह के खान, प्लांट, उद्योग आदिवासीयों की जमीन हडपकर व उन्हें विस्थापित कर स्थापित किये जा रहे हैं।
उनके अधिकारों से बेदखल कर दिया जा रहा है। आज वह अपने सम्पदा को इस्तेमाल करने का हकदार नहीं। आखिर ऐसी स्थिति का निर्माण क्यों??

आज राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय कानून की अनदेखी की जा रही है । आज आदिवासी पुरी तरह शोषित हैं, उन्हे उनके जमीन से अलग करने के लिए शाम, दाम, दण्ड, भेद सभी प्रकार के तरीके अपनाये जा रहे हैं।
बहुल क्षेत्रों में आदिवासीयों को नक्सली बता कर गोली मार दिया जाता है । उदा. उडिसा में प्लांट स्थापित करने के लिए हजारों आदिवासी मार दिए गये ।
ऐसे बहुत से उदा. हैं कभी घर जला दिए जाते हैं तो कभी बहनों के साथ जवानों के द्वारा बलात्कार (हालही में उडिसा के 4 CRPF के जवान 15 वर्षीय लडकी के साथ बलात्कार किये)
यह साजिश है आदिवासीयों को पुरी तरह खत्म करने की ।

आज आदिवासीयों को खत्म करने के लिए तरह तरह के योजना बनाए जा रहे हैं। उनकी संस्कृति खत्म करने के लिए गहरी साजिश हो रही है ।
उन्हें उनकी मालकियत से बेदखल किया जा रहा है ।
फिर भी हम शांत हैं आखिर इस जंग लगी जुबान कब बोलना शुरु करेंगे । कुछ आदिवासी अपनी संस्कृति त्याग धर्म का चोला पहन लिए और अपने पैर पर कुल्हाडी मार रहे हैं।
अब आखिर में एक सवाल आपसे की क्या अपने मालकियत से बेदखल मालिकों के दुख पर जश्न मनाना चाहिए।
जिनके हक अधिकार कानुन के जुतों तले दब जाते हैं।
क्षमा करें जब तक संविधान पुरी तरह देश में लागु नही होती तब तक देश के नागरिकों को यह जलसा मुबारक ।

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