राजनीति

कॉमरेड चारु मजूमदार का 46वां शहादत दिवस मनाया गया:  भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ( मार्क्सवादी-लेनिनवादी) रेड स्टार

29.07.201

रायपुर.

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ( मार्क्सवादी-लेनिनवादी) रेड स्टार छत्तीसगढ़ राज्य कमेटी ने 28 जुलाई 2018 को महान नक्सलबाड़ी किसान संघर्ष के प्रणेता कॉमरेड चारु मजूमदार के 46वीं शहादत दिवस के अवसर पर पार्टी सदस्यों के बीच अध्ययन शाला का आयोजन किया। कार्यक्रम की शुरूआत कॉमरेड चारु मजूमदार के साथ साथ भांगर आंदोलन, तुतिकुड़ी के शहीदों को मौन श्रद्धांजलि के साथ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पार्टी के गरियाबंद जिला सचिव कॉमरेड मदन लाल ने किया। मुख्य वक्ता राज्य सचिव कॉमरेड सौरा थे। संचालन राज्य कमेटी सदस्य कॉमरेड तेजराम विद्रोही ने तथा आभार राज्य कमेटी सदस्य कॉमरेड दीपा ने व्यक्त किया। 

वक्ताओं ने कॉमरेड चारु मजूमदार की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चारु मजूमदार भारत मे कम्युनिस्ट क्रांतिकारी नेता थे जिनका जीवन “अमीरी से दरिद्रता” की कहानी है। उनका जन्म 1918 में एक प्रगतिशील जमींदार परिवार में हुआ और उनके पिताजी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। 1937-38 में कॉलेज छोड़ने के बाद कांग्रेस पार्टी में शामिल हुआ और बीड़ी मजदूरों को संगठित करने का प्रयास किया था। बाद में वह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के साथ जुड़कर किसानों के बीच काम करने लगे। वामपंथी गतिविधियों में सम्मिलित रहने के कारण जल्द ही गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ जिसके कारण कुछ समय के लिए भूमिगत होना पड़ा। द्वतीय विश्व युद्ध के बाद भाकपा के ऊपर प्रतिबंध लगा दिया गया। वह किसानों के बीच काम लगातार जारी रखा और 1942 में जलपाईगुड़ी जिला कमेटी का सदस्य बनाया गया। 1943 में महाअकाल के दौरान दृढ़ता के साथ “फसल जब्ती” अभियान चलाया। 1946 में वे तेभागा आंदोलन के साथ जुड़ गए औऱ सर्वहारा की लड़ाकू संघर्ष की ऊंचाइयों की ओर बढ़ने लगे जो क्रांतिकारी संघर्ष का शक्ल लेने लगा। दार्जिलिंग में चाय बागान मजदूरों को भी संगठित किया। बाद में सिलीगुड़ी चले आये जो क्रांतिकारी गतिविधियों का केंद्र रहा। 1960 की दशक में चारू मजूमदार ने उत्तर बंगाल में माकपा के अंदर एक वाम दस्ता का निर्माण किया। 1967 में महान नक्सलबाड़ी किसान विद्रोह हुआ जिसका मूल नारा था ” जोतने वाले को जमीन” के लिए भूमि संघर्ष तेज करो। इसके बाद कॉमरेड चारु मजूमदार को गिरफ्तार कर पुलिस हिरासत में ही 1972 में धीमी जहर देकर हत्या कर दी गई।
कॉमरेड चारु मजूमदार ने जनता की स्वार्थ को पार्टी का स्वार्थ बताते हुए जनता को राजनीतिक रूप से लैस करने की बात कही थी।

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