आंदोलन मजदूर राजनीति

कैसेऔर क्यों बनी सीटू_ जिसने मजदूर आंदोलन संजोया और उसे दिशा दी . बादल सरोज .

ग़ालिब के शेर “न था कुछ तो खुदा था, कुछ न होता तो खुदा होता” की तर्ज पर कहें तो सीटू बनने के पहले भी कई ट्रेड यूनियने थीं, उसके बाद भी अनेक बनीं मगर सीटू होने की तासीर कुछ अलग ही है । इसकी एक वजह तो उन कारणों में निहित थी जिनके चलते एटक से अलग होकर सीटू बनानी पड़ी दूसरी कामकाज के उस तरीके में हैं जो इसने अपने स्थापना के समय से ही अपनाये और ज़िद के साथ निबाहे ।

कैसेबनीसीटू ?

ज्यादा विस्तार में न जाते हुये सार रूप में इतना कि 9-10 अप्रैल 1970 को गोआ के वास्को ड गामा शहर में एटक की जनरल कौंसिल के वे सारे सदस्य इकट्ठा हुये जिन्हें उनकी बात न सुने जाने पर गुंटूर में हुयी एटक की जनरल कौन्सिल से बाहर आने के लिए मजबूर होना पड़ा था । उनके साथ राज्य समितियों के भी कई सदस्य इस कन्वेंशन में पहुंचे और तय पाया कि यदि देश के मजदूर आंदोलन को जिंदा रखना है, वर्गसंघर्ष को जारी रखना है तो अब उसके लायक नया संगठन बनाने के अलावा और कोई दूसरा चारा नहीं है । इस कन्वेंशन ने 28 से 31 मई 1970 में कलकत्ता में एक नए ट्रेड यूनियन सेंटर का सम्मेलन करने का निर्णय लिया और 30 मई को भारत के ट्रेड यूनियन आंदोलन में सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू) की आमद हो गयी ।

क्योंबनीसीटू ?

मौजूदा स्थितियां उस वक़्त के हालात को विस्तार से दोहराने के लिए अनुकूल समय नहीं है । मगर अलग यूनियन बनने के पीछे लाल झण्डे की दो राजनीतिक पार्टियां बनना कारण नहीं था । दो पार्टी तो 1964 में बन चुकी थीं । नेताओं का झगड़ा भी नहीं था । सवाल समझौतावाद की जगह वर्गसंघर्ष और ट्रेड यूनियन की लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली के पालन का था । डांगे साब के नियंत्रण वाली उस वक़्त की एटक में यह दोनों ही काम नामुमकिन बना दिए गए थे ।
इन दोनों ही मामलों में सीटू कितनी गम्भीर थी यह उसने अपने स्थापना सम्मेलन में ही स्पष्ट कर दिया जब उसने तुरंत मजदूर एकता के पक्ष में अभियान छेड़ा तथा “#एकताऔरसंघर्ष”का नारा व्यवहार में लाना शुरू किया । इसी सम्मेलन ने 16 सूत्री मांगों को लेकर देशव्यापी संयुक्त आंदोलन का आव्हान किया ।
सम्मेलन के समापन भाषण में सीटू के संस्थापक अध्यक्ष #बीटीरणदिवे ने कहा “नेताओं का झगड़ा नहीं है । हम वर्ग संघर्षों के बीच से एक नया संगठन शुरू कर रहे हैं वर्ग संघर्षों को आगे बढ़ाने, तेज करने के लिए । क्योंकि हम इसमें विश्वास रखते हैं ।”

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