राजनीति

केंद्र व राज्य  में भाजपा की हार को सुनिश्चित  करने  के आह्वान के साथ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का राज्य सम्मेलन सम्पन्न : संजय पराते पुन: सचिव बने.

भाजपा को हराना, माकपा का पहला लक्ष्य 

संजय पराते  पुनः सचिव निर्वाचित 

5.02.2018

केंद्र व राज्य  में भाजपा की हार को सुनिश्चित  करने  के आह्वान के साथ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का बिश्रामपुर (सूरजपुर) में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का 6वां राज्य सम्मेलन संपन्न हुआ. सम्मेलन में 27 सदस्यीय राज्य समिति का निर्वाचन भी किया गया, जिसके सचिव संजय पराते चुने गए. राज्य समिति क अन्य सदस्य हैं : एम  के नंदी, बी सान्याल, वकील भारती, ए के लाल, बालसिंह, डी आर महापात्र, प्रदीप गभने , रूपधर ध्रुव, एस सी भट्टाचार्य (रायपुर), ऋषि गुप्ता, कृष्णकुमार (सरगुजा), ललन सोनी, सुरेंद्र लाल सिंह (सूरजपुर), शांत कुमार, डी वी एस रेड्डी, आर वी भारती (दुर्ग), गजेंद्र झा (राजनांदगांव), समीर कुरैशी (धमतरी), रवि बनर्जी (बिलासपुर), सुखरंजन  नंदी (चांपा), सपूरन कुलदीप, प्रशांत झा, धनबाई कुलदीप, एस एन बनर्जी (कोरबा), इंद्रदेव चौहान (कोरिया) और बासुदेव दास (कांकेर).

 

सम्मेलन का उद्घाटन  केंद्रीय सचिवमंडल सदस्य जोगेंद्र शर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि “भाजपा सरकारों की नीतिया देश की जनता की जनता के हितो के खिलाफ़ है | उसने जो वादे किए थे, वे पूरे नही हुए | फलस्वरूप मंहगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टचार बढ़ रहा है | खेती-किसानी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ, उद्योग-धंधे सब चौपट है | संसदीय जनतंत्र और मानवाधिकारो को कुचला जा रहा है | तमाम संस्थाए संघी गिरोह के कब्जे में है | सांप्रदायिक ध्रुर्वीकरण के जरिए देश की एकता, अखंडता, सद्भाव को तोड़ा जा रहा है, इसलिए राज्य और केंद्र में भाजपा को हराना, हमारा पहला लक्ष्य है, ताकि लोकतंत्र और संविधान बचे और आम जनता अपने संविधान प्रदत्त संवैधानिक अधिकारों के बल पर अपने संघर्षो को आगे बढ़ा सकें |” उन्होंने कहा कि राजस्थान में चुनाव के नतीजे इस बात के सबूत हैं कि आम जनता में भाजपा की नीतियों के खिलाफ़ असंतोष बढ़ रहा हैं |

इस असंतोष को नीतिगत दिशा माकपा और वामपंथ ही दे सकता है, लेकिन इसके लिए उसे अपने पार्टी संगठन को मजबूत बनाते हुए राजनैतिक विकल्प में बदलना होगा, आम जनता के विभन्न तबकों की मांगों, संघर्षो व आशा-आकांक्षाओ से अपने रिश्ते जोड़ने होंगे | शर्मा ने कहा कि दूसरी पूंजीवादी पार्टियों में नेता पहले चुने जाते हैं, नीतियाँ उसके हिसाब से तय होती हैं | माकपा में उसके सदस्य नीतियाँ पहले बनाते है, नेता बाद में चुने जाते हैं |

उल्लेखनीय हैं कि अप्रैल में माकपा का महाधिवेशन हैदराबाद में हो रहा है, उसके पूर्व सभी राज्यों के सम्मलेन और राज्य नेतृत्व के चुनाव संपन्न हो रहे हैं |

माकपा के इस सम्मेलन को, मध्यप्रदेश माकपा के सचिव जसविंदर सिंह ने भी अपनी शुभकामनाये प्रेषित की. वकील भारती, बाल सिंह, धनबाई कुलदीप की अध्यक्षता में हुए इस सम्मलेन में राज्य सचिव संजय पराते ने राजनैतिक – सांगठनिक रिपोर्ट पेश की, जिस पर  विभिन्न जिलो से आए 50 से अधिक प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी. सम्मलेन की शुरुवात पार्टी का झंडा फहराने, शहीद वेदी पर पुष्पांजलि अर्पित करने और शोक प्रस्ताव स्वीकार करने के साथ हुई |

रिपोर्ट में पार्टी के पिछले तीन साल के काम-काज की समीक्षा करते हुए संगठन की कमजोरियों को चिन्हित किया गया और उसे सुधारने के कदम भी सुझाये गए | माकपा ने जल, जंगल, जमीन, विस्थापन, मनरेगा, क़र्ज़ मुक्ति, समर्थन मूल्य, न्यूनतम मजदूरी आदि मुद्दों पर जन संघर्ष छेडने का फैसला किया है.  आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी की योजना पर भी व्यापक विचार – विमर्श किया गया.

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