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कांग्रेस का बड़ा फ़ैसला, प्रदेश कमेटियाँ उठाएंगी घर वापस आ रहे मजदूरों की ट्रेन टिकट का किराया

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की तरफ से जारी बयान में ये जानकारी दी गई है कि देश के किसी भी हिस्से से जो मजदूर ट्रेन से घर वापस लौट रहे मजदूरों के ट्रेन टिकट का किराया कांग्रेस पार्टी उठाएगी.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आश्त्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के बयान का स्वागत करते हुए लिखा है कि “हमारे श्रमिक साथी- हमारे अपने हैं। शासन द्वारा रेलवे को सूचित कर दिया गया है कि उनको रेल द्वारा लाने में जो भी राशि व्यय होगी, उसे छत्तीसगढ़ सरकार वहन करेगी। कांग्रेस पार्टी और सरकार संकट के समय में किसी को अकेला नहीं छोड़ सकती, हम सब एकजुट हैं, कटिबद्ध हैं”

पढ़िये कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का बयान…

4 मई, 2020

श्रमिक व कामगार देश की रीढ़ की हड्डी हैं। उनकी मेहनत और कुर्बानी राष्ट्र निर्माण की नींव है।

सिर्फ चार घंटे के नोटिस पर लॉकडाऊन करने के कारण लाखों श्रमिक व कामगार घर वापस लौटने से वंचित हो गए। 1947 के बंटवारे के बाद देश ने पहली बार यह दिल दहलाने वाला मंजर देखा कि हजारों श्रमिक व कामगार सैकड़ों किलोमीटर पैदल चल घर वापसी के लिए मजबूर हो गए। न राशन, न पैसा, न दवाई, न साधन, पर केवल अपने परिवार के पास वापस गांव पहुंचने की लगन। उनकी व्यथा सोचकर ही हर मन कांपा और फिर उनके दृढ़ निश्चय और संकल्प को हर भारतीय ने सराहा भी।

पर देश और सरकार का कर्तव्य क्या है? आज भी लाखों श्रमिक व कामगार पूरे देश के अलग अलग कोनों से घर वापस जाना चाहते हैं, पर न साधन है, और न पैसा। दुख की बात यह है कि भारत सरकार व रेल मंत्रालय इन मेहनतकशों से मुश्किल की इस घड़ी में रेल यात्रा का किराया वसूल रहे हैं।

श्रमिक व कामगार राष्ट्रनिर्माण के दूत हैं। जब हम विदेशों में फंसे भारतीयों को अपना कर्तव्य समझकर हवाई जहाजों से निशुल्क वापस लेकर आ सकते हैं, जब हम गुजरात के केवल एक कार्यक्रम में सरकारी खजाने से 100 करोड़ रु. ट्रांसपोर्ट व भोजन इत्यादि पर खर्च कर सकते हैं, जब रेल मंत्रालय प्रधानमंत्री के कोरोना फंड में 151 करोड़ रु. दे सकता है, तो फिर तरक्की के इन ध्वजवाहकों को आपदा की इस घड़ी में निशुल्क रेल यात्रा की सुविधा क्यों नहीं दे सकते?

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने मेहनतकश श्रमिकों व कामगारों की इस निशुल्क रेलयात्रा की मांग को बार बार उठाया है। दुर्भाग्य से न सरकार ने एक सुनी और न ही रेल मंत्रालय ने।

इसलिए, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने यह निर्णय लिया है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की हर इकाई हर जरूरतमंद श्रमिक व कामगार के घर लौटने की रेल यात्रा का टिकट खर्च वहन करेगी व इस बारे जरूरी कदम उठाएगी। मेहनतकशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने के मानव सेवा के इस संकल्प में कांग्रेस का यह योगदान होगा।

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