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कल सुप्रीम कोर्ट ने वन अधिकार के विरुद्ध मुकदमे को सुना.

मामले की सुनवाई की अगली तारीख 12 सितंबर तय .

आज सुप्रीम कोर्ट ने वन अधिकार कानून के खिलाफ मामलों को सुना। आज केंद्र सरकार के वकील ने बेदखली के मुख्य मुद्दे पर बहस नही की। सुप्रीम कोर्ट के सवालों के जवाब में उन्होने आज इस बात की तरफ इशारा किया कि दावे खारिज करने की प्रक्रिया हमेशा वैधानिक रूप (due process) से नही की गई है। अभी तक 7 राज्यों ने अपने जवाब कोर्ट में दाखिल नही किये हैं।

कोर्ट ने राज्य सरकारों को आदेश दिया है कि वो 31 अगस्त तक खारिज किये दावों की जानकारी एफ एस आई (Forest Survey of India) को दें। हम उमीद करते हैं कि इसे अगली सुनवाई में चैलेंज किया जाएगा क्योंकि sattelite imagery पर बहस करना और उसे आधार बनाना वन अधिकार कानून के खिलाफ है और बेहद खतरनाक है।

कोर्ट का पुराना आदेश जिसके अंतर्गत बेदखली की प्रक्रिया को रोक (on hold) दिया गया था वह आदेश अब भी लागू है। जो राज्य सरकारें लोगों के खिलाफ इस आदेश का हवाला देकर बेदखली की प्रक्रिया करेंगी वो ना केवल कानून का उनलंघन करेंगी बल्कि यह कोर्ट के आदेश की भी अवमानना होगी।

हमें इस बात से बेहद निराशा हुई है कि याचिकाकर्ता के तरफ से कानून और तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने की साजिश आज भी जारी है और कोर्ट में इसका सही तरीके से विरोध नही किया गया। इसके कारण आज भी मामले में ‘रोक का आदेश’ (order on hold) कायम है, जबकि मामले को withdraw कर लेने का आदेश आना चाहिए था। कोर्ट का आदेश केंद्र सरकार की नाकामी के कारण आया है क्योंकि केंद्र ने कोर्ट में 2017 और 2018 में वन वासियों के अधिकारों का सही तरीके से बचाव नही किया। सी एस डी और तमाम वनवासी अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए तैयार हैं और केंद्र सरकार को अपना काम करने की याद दिलाते रहेंगे। ताकि वे कोर्ट में वन अधिकार कानून का बचाव करें और आर्डर को withdraw करवाने के लिय लड़े।

Campaign for Survival and Dignity

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