अभिव्यक्ति आंदोलन मानव अधिकार राजकीय हिंसा शासकीय दमन

कर्फ़्यू लगा दो …अमजद मजीद .

कर्फ़्यू लगा दो
हमारी सड़कों पर,
हमारे स्कूलों पर,
हमारे घरों पर।
कर्फ़्यू लगा दो
ख़बरों पर,
हमारे अख़बारों पर,
रेडीओ पर,
इंटर्नेट पर,
टेलिविज़न चैनलों पर।
कर्फ़्यू लगा दो
हमारी अभिव्यक्ति पर
हमारे आंदोलन पर,
हमारे प्रतिरोध पर,
हमारे शोक पर,
हमारी दुर्दशा पर।

चाहो तो
कर्फ़्यू लगा दो
सच पर,
रात पर,
आज़ादी पर।
हिम्मत है तो
कर्फ़्यू लगा दो
आशा पर
ज़िंदगी पर।

फिर भी तुम पाओगे
कि हमारी एक मौत
तुम्हें डर के चक्रावात
में फँसा देती है
तुम,
जो डर कर पगलाए हुए हो
डरो मत
किसी दिन,
एक दिन
हम तुम्हें इस डर से आज़ादी दे देंगे।

  • अमजद मजीद

अनुवाद- नाचीज़ उर्फ Pyoli Swatija द्वारा….बहुत सुंदर

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