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कर्नाटक : जो पहले खनन माफ़िया था अब वनमंत्री है

anand singh

छः महीने पहले बनी कर्नाटक की भाजपा सरकार ने वन, पर्यावरण और पारिस्थितिकी मंत्री मनाया है जिस पर इसी विभाग के 15 आपराधिक मामले दर्ज हैं।

1800 करोड़ रूपाय की रिश्वत देने के आरोपी हैं कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा।

कारवां मैग्ज़ीन के अनुसार, “कर्नाटक में शीर्ष बीजेपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा की हाथ से लिखी डायरी की प्रतियां इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास हैं. इसमें बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व, केंद्रीय कमेटी और जजों और वकीलों को दिए गए कुल 1800 करोड़ रुपये का ब्योरा दर्ज है.”

येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री बनाने में मदद करने वाले जिन नेताओं को पैसे दिए जाने का दावा किया गया है, उनमें लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी (50-50 करोड़ रु.) और केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली (150 करोड़ रु.), राजनाथ सिंह (100 करोड़ रु.), नितिन गडकरी ( 150 करोड़ और बेटे की शादी में 10 करोड़ रु.) का नाम शामिल है.

मैग्ज़ीन की ख़बर के अनुसार, शीर्ष नेतृत्व के अलावा जिन्हें पैसा दिया गया उनमें निर्दलीय विधायक भी शामिल हैं, जिन्होंने 2008 में येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री बनाने में मदद कर बीजेपी को सत्ता में पहुंचाया.

चूंकि वो बहुमत साबित करने में असफल हो गए थे, इसलिए येदियुरप्पा ने कथित रूप से विधायकों को रिश्वत दी.

येदियुरप्पा ने अब एक और कमाल कर दिया है  

उन्होने राज्य सरकार में आनंद सिंह को वन, पर्यावरण और पारिस्थितिकी मंत्री बनाया है.

नवंबर में जो विधानसभा उपचुनाव हुए उसमें आनंद सिंह द्वारा दिये गए हलफ़नामे से पता चलता है कि उनपर कुल 26 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमे से 16 मामले ऐसे हैं जो कर्नाटक वन कानून, खान और खनिज (विकास और विनियमन) क़ानून और भारतीय दंड संहिता के  उल्लंघन के आरोप मेन दर्ज हैं।

सिंह को खनन माफ़िया कहा जाता रहा है।

उप चुनाव में दिए गए हलफनामे में अपनी कुल संपत्ति 173 करोड़ रुपये बताई थी। उन पर सीबीआई केस भी चल रहा है, जो ट्रायल फेज में है। आनंद सिंह पूर्व मंत्री जनार्दन रेड्डी के साथ ही उस केस में आरोपी हैं, जिसमें अवैध उत्खनन के जरिए सरकारी खजाने को करीब 200 करोड़ रुपये की चपत लगाने के आरोप हैं। इन पर आपराधिक षडयंत्र, चोरी, आपराधिक तौर पर भरोसा तोड़ने, धोखाधड़ी और बेईमानी समेत आपराधिक फर्जीवाड़े के आरोप हैं। यह मामला बेंगलुरू की स्पेशल कोर्ट में चल रहा है और 26 फरवरी को सुनवाई होनी है।”

यानि कर्नाटक का नया वनमंत्री उस व्यक्ति को ही बना दिया गया है जो ख़ुद ही वन कानून के उल्लंघन का आरोपी है।

आनंद सिंह कांग्रेस के उन 14 विधायकों में शामिल हैं जिन्होने विधायकी से इस्तीफ़ा देकर कांग्रेस-जेडीएस गतबंधन की कुमारस्वामी सरकार को गिराने में भूमिका निभाई थी। सिंह ने बाद दिसंबर 2019 में बीजेपी के टिकट पर बेल्लारी के विजयनगर सीट से चुनाव जीता था।

कौन हैं आनंद सिंह?

इस विषय पर बीबीसी मे प्रकाशित खबर का हिस्सा देखिए…

53 साल के आनंद सिंह उन अभियुक्तों में से एक हैं जिनका नाम साल 2008-2013 में बीजेपी सरकार को हिलाकर रख देने वाले अवैध आयरन और माइनिंग (लौह अयस्क खनन) घोटाले में सामने आया था. वो इस घोटाले में गली जनार्दन रेड्डी के साथ अभियुक्तों की सूची में शामिल थे. इस मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री येदियुरप्पा को भी जेल तक जाना पड़ा था.

इस घोटाले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक और गोवा में खनन पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया था. इसका असर 2011-12 में देश के सकल घरेलू उत्पाद पर पड़ा था और उसमें दो फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी.

भ्रष्टाचार निरोधी कर्नाटक राष्ट्र समिति के प्रतिनिधि पा.या. गणेश ने बीबीसी को बताया, “जनार्दन रेड्डी से अलग आनंद सिंह ऐसे परिवार से आते हैं जो खनन उद्योग में है. लेकिन, उन दिनों खनन के लिए अधिक आयरन नहीं था. वो उस वक़्त अपने चाचा सत्यनारायण सिंह की निजी बस कंपनी के प्रबंधन का काम कर रहे थे. उनके चाचा एक राजनीतिक हस्ती थे.”

वो बताते हैं, “वो मैनेजर ज़रूर थे लेकिन वो बसों की भी सफ़ाई का काम भी करते थे. बाद में वो खानों के प्रबंधन का काम करने लगे. वो लोगों की मदद करते थे और जब ज़रूरी होता था ग़रीबों की आर्थिक सहायता भी करते थे.”

जी. जनार्दन रेड्डी के अपराध के साथी

सामाजिक कार्यकर्ता और खनन का काम करने वाले तापल गणेश याद करते हैं, “साल 2000 की शुरुआत में आयरन ओर निर्यात करने के बाज़ार में ज़बर्दस्त उछाल आया. चीन को अधिक ओर निर्यात होने लगा. वो उस वक़्त पूरी तरह रेड्डी बंधुओं के साथ काम करने लगे. उन्होंने एक तरह का गिरोह बना लिया था. वो एक खदान से आयरन ओर निकालने का अनुबंध हाथ में लेते थे लेकिन असल में वो ज़मीन के नीचे से निकट के दूसरे खदानों से लौह अयस्क निकालने लगे थे.”

सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में याचिका डालने वालों में से एक समाज परिवर्तन समुदाय के एसआर हीरेमठ बताते हैं, “उन्होंने वन भूमि का अतिक्रमण किया और वहां ज़मीन के नीचे से आयरन ओर चुराने लगे. उन्होंने संदूर की पहाड़ियों की वन भूमि को राजस्व भूमि के रूप में दिखाया और वहां से पेड़ों का सफ़ाया कर दिया. सर्वोच्च न्यायालय के शब्दों में उन्होंने पर्यावरण को ‘लापरवाह और अपूर्णीय क्षति’ पहुंचाई. आनंद सिंह गंभीर रूप से जनार्दन रेड्डी के साथ उनके अपराधों में भागीदार बन गए.”

लोकायुक्त, जस्टिस संतोष हेगड़े की रिपोर्ट में यह कहा गया था कि अवैध रूप से निकाले गए 70 लाख मीट्रिक टन आयरन ओर का निर्यात किया गया था.

उनकी इस रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जाँच ब्यूरो यानी सीबीआई को मामले की जाँच का आदेश दिया. 50,000 टन से अधिक लौह अयस्क के अवैध उत्खनन के मामलों की जाँच सीबीआई ने की जबकि 50,000 टन से कम के उत्खनन के मामलों की जाँच विशेष जाँच दल ने की.

हीरेमठ बताते हैं, “उत्खनन किया गया अधिकांश लौह अयस्क (एक अनुमान के मुताबिक़ इसकी क़ीमत 35,000 करोड़ रुपये थी) का निर्यात कृष्णमपेट बंदरगाह, चेन्नई बंदरगाह और उत्तर कन्नड़ ज़िले के बेलेकेरे बंदरगाह से किया गया था. उत्तर कन्नड़ ज़िले में बंदरगाह में रखे गए अवैध लौह अयस्क की चोरी कर उसका निर्यात किया गया था, इस कारण वहां एक अलग जाँच के आदेश दिए गए थे. बेलेकेरे बंदरगाह के अलावा दूसरी जगहों में भी चोरी के गंभीर आरोप लगाए गए थे.”

साल 2013 में जब आनंद सिंह सिंगापुर से लौटे उन्हें सीबीआई ने पहली बार गिरफ्तार किया. 18 महीने तक वो जेल में रहे जिसके बाद विशेष जाँच दल ने लगभग एक सप्ताह के लिए उन्हें कस्टडी में लिया.

चोर को चोर ही पकड़ सकता है?

जस्टिस हेगड़े ने बीबीसी से कहा, “अगर आपको चोर को पकड़ना है तो आपको चोर बनना पड़ेगा. शायद इस मामले में हमें यही बात दिखती है. लेकिन, जिस तरह से आनंद सिंह के राजनीतिक सहयोगी उनका समर्थन करते हैं वो देखने लायक़ है.”

उप-मुख्यमंत्री लक्ष्मण सावदी समेत आनंद सिंह के कैबिनेट सहयोगियों का कहना है कि उन पर केवल आरोप हैं, दोषी साबित होने तक वो निर्दोष हैं. लक्ष्मण सावदी उस वक़्त चर्चा में आए थे जब वो विधानसभा में पोर्न देखते हुए पकड़े गए थे.

लेकिन जस्टिस हेगड़े कहते हैं, “क्या कोई निजी कंपनी या सरकारी संगठन किसी ऐसे व्यक्ति को नियुक्त करेगा जिसके ख़िलाफ़ कोई आपराधिक मामला लंबित है? ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि अलग-अलग उद्देश्यों के लिए विभिन्न मानक अपनाए जाते हैं.”

कुछ मायनों में उनका कहना ग़लत नहीं है. 2013 में जब आनंद सिंह ने भाजपा छोड़ कांग्रेस का दामन थामा तब कांग्रेस ने उन्हें ख़ुशी से अपना लिया. तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने होसपेट में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान एक सार्वजनिक सभा को संबोधित किया जहां उन्होंने आनंद सिंह को पार्टी में शामिल करने का ऐलान किया.

मई 2018 में जब बीजेपी के बीएस येदियुरप्पा को विधानसभा के पटल पर अपना बहुमत साबित करना था तो आनंद सिंह उन पहले विधायकों में से थे जिनसे बीजेपी ने संपर्क किया. उस वक़्त तीन दिन तक लगातार सार्वजनिक जगहों से ग़ायब रहे आनंद सिंह को कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार सदन में लेकर आए थे.

जुलाई 2019 में बीजेपी में शामिल होने के लिए कई कांग्रेस नेताओं ने इस्तीफ़ा दिया था. कांग्रेस के उन 13 पूर्व नेताओं में से एक आनंद सिंह थे. उस समय राज्य में जनता दल सेक्युलर और कांग्रेस की गठबंधन सरकार गिर गई थी. दिसंबर 2019 में हुए उप-चुनावों में एक बार फिर आनंद सिंह जीतकर विधायक बन गए.

और जब उनके समर्थन के लिए येदियुरप्पा ने उन्हें पुरस्कृत कर वन मंत्रालय का कार्यभार सौंपा, कांग्रेस के सभी आला नेता लगभग ख़ामोश रहे.

केवल पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बयान दिया कि “मंत्रियों को पोर्टफोलियो देने का फ़ैसला येदियुरप्पा को सोच विचार कर लेना चाहिए था. वन क़ानून के उल्लंघन से जुड़े मामलों का सामना कर रहे आनंद सिंह को वन मंत्रालय देना सही नहीं है.”

जस्टिस हेगड़े कहते हैं, “मैं उन मतदाताओं से सवाल करना चाहता हूं जो सोचते हैं कि चोरी एक छोटी सी बात है. हम कैसे हो गए हैं जो हम ऐसे नेताओं को फिर से चुन लेते हैं?”

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