मजदूर

एन एस पी सी एल ,आधार कार्ड के अभाव में दो मजदूरों को तीन साल पहले निकाला .

जन आधारित पावर प्लांट मजदूर यूनियन

एन एस पी सी एल में काम से निकाले गए लखन और मोहन दो मजदूर 1 साल से आधार कार्ड के कारण भुगत रहे है,आधार कार्ड जब बना उस समय इन दोनों के उम्र को अधिक कर दिया गया जिससे 60 साल हो गया करके प्रबन्धक ने निकाल दिया जबकि इनका 57 वर्ष था अभी 3 साल बाकी है वो काम कर सकते है,नगर निगम और कलेक्टर से मिलकर आधार को सही करा लिया गया ।सही होने के बाद प्रबन्धक को काम पर रखने आर एल सी से लेकर प्रबन्धक तक एक साल हो गया जाते परन्तु आज तक काम नही मिला .

केंद्रीय श्रमायुक्त के पास 15 बार गए ओर हर बार प्रबन्धक को फोन लगाकर बोला इनको काम पर रखिये परन्तु डी जी एम मुकोपध्याय,एच आर प्रमुख अब्दुल वसीम बोलते है नही बनेगा देखते है कोशिश चल रहा है।लखन,मोहन दोनों मजदूरो को आस्वाशन देते देते 60 साल पूरा करा देगा, षड्यन्त्र तो तब और अधिक उजागर होता है जब यही प्रबन्धक ,ठेकेदार और सुपरवाइजर इन्ही मजदूरों को बोलते है क्या किया तुम्हारा यूनियन? कम्पनी के सभी मजदूरों को यूनियन के खिलाफ भड़काते है ताकि प्रबन्धक ठेकेदार अपनी काली करतूतों को छुपा सके ।इस तरह लाखो औयद्योगिक मजदूरों का हाल बेहाल है, पावर प्लांट में हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि जो ठेकेदार ओर सुपरवाइजर को कमीशन देगा उसे 60 हाजरी तक मिलता है our कमीशन का विरोध करता है उसे महीने में केवल 12,15,18 हाजरी मिलता है 12 घन्टा डिवटी भी कराते है सरकार द्वारा विकास का ढोल पीटना अलग बात है धरातल पर वास्विक विकास को लागू करना अलग बात है कयोकि विकास धरातल पर शून्य है, राज्य हो या केन्द्र का श्रम विभाग केवल कागजी घोड़ा है क़्योंकि उद्घयोगपतियो के खिलाफ एक लब्ज बोलने के अवकात नही है,इन दोनों मजदूरों को काम पर नही लेगा तो अब यूनियन के तरफ से पी एम कार्यालय दिल्ली,श्रम एवं रोजगार कार्यालय दिल्ली,केंद्रीय श्रम मंत्री दिल्ली,एवं मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ को पत्र भेजा जाएगा उसके तुरंत बाद संतुष्टि पूर्ण जवाब नही मिला तो बेरोजगारी से शांति नही हो सकता।




जन आधारित पावर प्लांट मजदूर यूनियन

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