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एक सीरिया इधर भी : 12 अप्रेल को भारत सरकार ने भी अपनी जनता पर हवाई हमले शुरू कर दिये : झारखंड .: सीमा आजा़द

 

25.04.2018

14 अप्रैल को अमेरिका ने सीरिया में रासायनिक हथियार होने के झूठ के साथ हवाई हमला किया। इसमें कितने की जान-माल का नुकसान हुआ है, इसकी जानकारी अभी तक बाहर नहीं आ सकी है, शायद आयेगी भी नहीं। क्योंकि यह हमला रासायनिक हथियारों के जखीरे को नष्ट करने के नाम पर किया गया, इसलिए इसके विरोध की खबर भी कहीं सुनाई नहीं दी।

इसके पहले भी सीरिया में हो रहे हवाई और रासायनिक हमलों में मारे गये और घायल बच्चों की तस्वीरों ने लोगों को दहला दिया था। लोगों ने इन हमलों का काफी विरोध किया।
13 अप्रैल को भारत की सरकार ने अपनी जनता पर भी हवाई हमले की शुरूआत कर दी। उसने झारखण्ड के सांगाकारा जंगल के क्षेत्र को भी सीरिया बना दिया है, जहां लगातार हवाई हमले हो रहे हैं, जिसमें छोटे बच्चों समेत स्थानीय आदिवासी नागरिक मारे जा रहे हैं, जिसकी खबर शायद ही बाहर आ पाये। और इन हमलों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन भी उतने बड़े पैमाने पर नहीं हो रहे हैं क्योंकि यह हमला इस झूठ के साथ किया गया है कि यह माओवादियों पर किया गया हमला है।
झारखण्ड के पश्चिम सिंहभूमि के इन दिनों के अखबारों पर एक नजर डालें तो खबर मिलती है कि यहां के पश्चिम सिंहभूम के सांगाजारा जंगल में पहाड़ियों पर सरकार की सैन्य एजेन्सियांे सीआरपीएफ, बीएसएफ, व कोबरा बटालियन ने इस क्षेत्र पर 13 अप्रैल की सुबह से हवाई हमला शरू कर दिया, उस समय, जब लोग अपने घरों में सोये रहे होंगे। ये हमले दुश्मन को चिन्हित करके निशाना बनाने वाले किसी हथियार से नहीं, बल्कि मोर्टार तथा अंडर बैरेल ग्रेनेड लांचर यानि यूवीजीएल से किया है, जो धरती पर इसकी जद में आने वाले लोगों में बिना बंटवारा किये हमला करती है। इन हथियारों का इस्तेमाल दूसरे देशों के साथ युद्ध के समय उस देश की सीमा में किया जाता है, जैसाकि यहां के पत्रकार रूपेश कुमार सिंह ने लिखा है कि इन हथियारों का इस्तेमाल कारगिल युद्ध के समय किया गया था। इस कारण सरकार का यह बहाना लेना कि यह हमला माओवादियों पर किया गया है, एकदम झूठ है, क्योंकि ये हथियार आम जनता और उनके बीच में फर्क नहीं कर सकती। और यदि यह हवाई हमला माओवदियों को टारगेट करके भी किया गया है, तब भी यह ठीक नहीं है। क्योंकि कानून कहता है कि कानून की नजर में कोई अपराधी है भी, तो उसे गिरफ्तार कर उसके खिलाफ अदालत में मुकदमा चलाया जाना चाहिए। और यह सरकार तो यह लगातार घोषणा करती रही है कि उसने माओवाद पर जीत हासिल कर ली है, तो फिर उससे इतना डर क्यों? सरकार को उन पर हवाई हमला करने की जरूरत क्यों पड़ रही है? ऐसा हमला जो अपने दुश्मन में फर्क करना नहीं जानती, जिससे सैकड़ों बेगुनाह लोगों के मारे जाने का खतरा है।

अखबारों के मुताबिक हमला शुरू होने के बाद पड़े मंगलवार को यहां का साप्तााहिक हाट होने के बावजूद ग्रामीाण आदिवासी खरीददारी के लिए नहीं आये। वे डर से अपने घरों में छुपे हुऐ हैं, बाहर नहीं निकल रहे हैं। कुछेक जो खरीददारी के लिए बाद में निकले भी, उन्हें 5 किलो से ज्यादा चावल नहीं खरीदने दिया जा रहा है। घरों में तलाशी अभियान के नाम पर लोगों को डराया-धमकाया जा रहा है, महिलाओं के साथ अभद्रता की जा रही है, और पूछताछ के नाम पर स्थानीय आदिवासियों को यातनायेंद दी जा रहीं हैं, या उन्हें थाने में बिठाया जा रहा है। माओवादियों के समर्थक होने के नाम पर कुछ ग्राम प्रधानों को गिरफ्तार करने की भी खबरें आ रहीं हैं।

अखबारी रिपोर्ट पुलिसिया हवाले से यह भी बता रही है कि इस हमले के बाद माओवादी वहां से निकल गये हैं, फिर ये हमले किसे निशाना बना रहे हैं?
यह हमला मानवाधिकरों का खुला उल्लंघन है, यह हमला अपने ही देश की जनता के खिलाफ एक युद्ध है, जो दरअसल यहां के प्राकृतिक संसाधनों को साम्राज्यवादी पूंजीपतियों को सौंपने के लिए है। इन संसाधनों पर माओवादियों के कारण कब्जा न जमा पाने के कारण पिछले साल ही केन्द्र सरकार ने यहां हवाई हमले के लिए माहौल बनाना शुरू कर दिया था, और अब यह शुरू भी किया जा चुका है। यह सरकार की अपने जनता के खिलाफ की जा रही फासीवादी कार्यवाही है। सीरिया के साथ-साथ झारखण्ड की जनता पर एक झूठ के साथ हो रहे हमले का विरोध सभी को करना ही चाहिए।

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सीमा आज़ाद 

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