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एक दिन मैं अपने देश को इस उन्मादी मानसिकता से बाहर ले कर आऊंगा, चाहे आप कितनी भी गलियां दें मुझे.

देश में ये वो दौर है जब हिंसा और घृणा देशप्रेम का मानक बन गए हैं, और अमन की बात करना देशद्रोह हो चला है. इस दौर में हर अमनपसंद व्यक्ति देशद्रोही हो गया है, जिसे युद्धोन्मादी भीड़ मार देना चाहती है. उज्जैन के हिमांशु पण्डित ने रोते-रोते आज फेसबुक पर अपना दर्द लिखा है. वो कहते हैं:

“जब मैं ये सब लिख रहा हुँ मेरी आँखो में आँसू है, मन विचलित है बहुत परेशान हुँ, निराश हुँ, लेकिन ग़द्दार नहीं हुँ, देशद्रोही नहीं हुँ, आतंकवाद का समर्थक भी नहीं हुँ. किसी भी क़ीमत पर मैं अपने देश का साथ नहीं छोड़ सकता. मोदी जी आप से लाख लाख राजनीतिक असहमतियाँ हैं और आगे भी रहेंगीं, लेकिन इस का ये मतलब बिलकुल नहीं हो सकता है कि मैं अपने ही देश से ग़द्दारी कर रहा हूँ. आप एक ज़िम्मेदार पद पर हैं और आपको अपनी ज़िम्मेदारी का अहसास कराना बतौर नागरिक मेरी भी ज़िम्मेदारी है.

मुझे मेरे शांति के विचार पर आप लाख गालियाँ दें, मैं आप को पलट कर कभी कोई गाली नहीं दे सकता. मैं मानता हूँ कि आपके घर बैठी आपकी माँ और बहन, मेरी भी माँ और बहन हैं, आपके पिताजी मेरे लिए भी पिता तुल्य हैं. आपके विचार मेरे विचारों से अलग हो सकते हैं और होने भी चाहिए, पर मेरे विचार आपके विचारों से मेल नहीं खा रहे इस का ये मतलब नहीं हो सकता कि मैं देश के साथ ग़द्दारी कर रहा हूँ या मैं देशद्रोही हूँ.

आप युद्ध चाहते हैं और मैं शांति चाहता हूँ. आपको लगता है युद्ध से सभी मसले हल हो जाएँगे. मैंने कहीं पढ़ा है ‘युद्ध ख़ुद एक मसला है’ युद्ध से कैसे मसले हल हो सकते हैं? जब युद्ध शब्द आता है तब मेरे सामने ईराक़, ईरान, लीबिया, सीरिया, अफ़ग़ानिस्तान की वो तस्वीरें घूमने लगती हैं जिसे याद कर के रूह काँप जाती है. मैं बिलकुल नहीं चाहता कि मेरा देश किसी भी दिन उन देशों जैसा दिखे. मैं नहीं चाहता कि कोई बच्चा अपनी माँ का दूध पीने के लिए रोता रहे. मैं नहीं चाहता एक 6-7 साल के लड़के को अपने छोटे भाई बहनो के लिए खाना खोजने जाना पड़े. मैं नहीं चाहता कि देश में कभी कहीं कोई भी युद्ध के निशान ले कर मरते हुए जीने को मजबूर हो. मैं नहीं चाहता हम दुनिया से कई साल पीछे चले जाएं, अगर ये सोचना देशद्रोह है तो हाँ मुझे देशद्रोही कहलाने में कोई दिक्कत नहीं है.

अगर आपको लगता है कि पुलवामा हमले में मारे गए जवान की मौत का दुःख सिर्फ़ आपको है और इसलिए आप इतने क्रोध में है तो आप ग़लत हैं, देश के किसी भी कोने में बेठे हर आदमी को इस बात का उतना ही ग़ुस्सा है. जिस तरह आप चाहते हैं कि आतंकवाद ख़त्म होना चाहिए वैसे हर कोई चाहता है आतंकवाद ख़त्म होना चाहिए. पर इसे ख़त्म करने के तरीक़ों पर बात होना चाहिए.

जब आप मुझे पाकिस्तान परस्त कहते हैं तब मन झगझोड़ जाता है. हाँ मेरे कई दोस्त हैं पाकिस्तान में और उनसे भी मैं महोब्बत करता हुँ क्यूँकि वहाँ भी बहुत सारे लोग हैं जो मुझे प्यार करते हैं, मैं उस मुल्क की भी बेहतरी चाहता हुँ (जैसा गांधी चाहते थे) और इसमें कोई बुराई नहीं होनी चाहिए. हर कोई अपनी-अपनी जगह उन्नति करे. लेकिन बुरा इसलिए लगता है क्योंकि आप लोग जिस मंशा से मुझे पाकिस्तान परस्त कहते हैं वो मंशा मेरी भारतीय होने की पहचान को समाप्त कर देती है. मुझे मेरी देशभक्ति किसी के सामने साबित नहीं करनी है, पर बताना ज़रूरी है कि देश में जब कोई विकट स्तिथि बनती है, जहाँ मेरी ज़रूरत होती है, और जब आप टीवी के सामने बैठ कर जब उसका शोक मनाते हैं, तब मैं उस जगह जा कर उन लोगों की मदद करने की कोशिश करता हुँ (जितनी मुझसे हो सकती है). और ये सब मैंने भारत में किया है जितना मैं देश के लिए कर सकता हूँ, मैने हमेशा किया है और आगे भी करता रहूँगा चाहे कोई कितना भी देशद्रोही कह ले मुझे.

सरकार से सवाल करना देशद्रोह नहीं होता है. मोदी की नितियों का विरोध भी देशद्रोह नहीं होता है. किसानो के हित की बात देशद्रोह नहीं. देश में अच्छी शिक्षा की माँग देशद्रोह नहीं है. देश में भाईचारा बनाए रखना (और बनाए रखने की बात करना) देशद्रोह नहीं है. सरकार से नौकरियों पर सवाल करना देशद्रोह नहीं है. और ये पहली बार नहीं हो रहा है इस से पहले जो सरकारें थी उनसे भी सवाल किए गए थे, और इन के बाद जो आएगी उन से भी किए जाएँगे. अगर आतंकी हमला होता है और सैनिक मरते हैं, तो इसकी ज़िम्मेदारी सरकार की है सरकार ये बताए कि कैसे हुई सुरक्षा में चूक.

जिस देश की क़ौम सवाल करती है वहाँ विज्ञान पैदा होता है, 

और जहाँ सवाल करने की मनाही है वहाँ अंधविश्वास! 

अब आप तय कीजिए आप को कैसी क़ौम बनना है?

मुझे ख़ुद पर और मेरे देश पर भरोसा है कि एक दिन इस उन्मादी मानसिकता से इस देश को बाहर ले कर आऊँगा चाहे कोई कुछ भी बोले मुझे. मैं अपने आगे आने वाली नस्लों को एक अच्छा मुल्क देना चाहता हूँ खंडहरों के ढेर पर मरता नहीं छोड़ना चाहता.

आपका देशद्रोही, 
भारत का एक देशप्रेमी. 

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