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एक ठस्स और ठहरा हुआ , कामचलाऊ शहर है – बिलासपुर

नवल शर्मा

एक ठस्स और ठहरा हुआ , कामचलाऊ शहर है – बिलासपुर । संस्कारधानी का झुनझुना थामे , शहरों की सबसे फिसड्डी – सी श्रेणी में मन मगन पड़ा है बरसों से ।


होने को तो हाई कोर्ट है , है तो कभी कभार डपट देता है कभी दख़ल भी देता है , अभी अभी डांट पिलाई तो सड़कों के गूमड़े यानी स्पीड ब्रेकर सपाट कर दिये गये , दूसरे दिन अख़बार वाले जाने कहां से ख़बर खींच लाये – रोड एक्सीडेंट में दो निपट गये ।


रेल्वे का जोनल आॅफ़िस है , एस ई सी एल का हेडक्वाटर है – एको अफ़सर छत्तीसगढ़िया नहीं है ।
सेंट्रल यूनिव्हरसिटी है – है तो है – विद्वान प्रोफ़ेसरान का प्रोडक्ट वाया इलाहाबाद – बनारस यहां ठसक जमाए बिराजे हुए है । बिलसपुरिहा बाबू का बन गये , फूल के कुप्पा हुए जा रहे हैं ।


एन टी पी सी है – बिजली बनाए पड़ी है , सरप्लस पेल रहे हैं । इधर शहर है कि 50° पे तप रहा है ।
कोयला डुहारने को नयी नयी बनायी गयी सड़क इतना पसर गयी कि किनारे के सारे दरख़्त क़त्ल कर दिये गये – ‘ हरी हत्या ‘ होती रही शहर हरि भजन में मस्त रहा ।
यानी हरक़त होती भी है तो बैठे बैठे – इत्मिनान के साथ ।
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इधर एक पुरसुकून काम भाई प्रकाश सिंह – गुलाब नगर वाले और उनकी टीम ने कर दिखाया है ।
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चुन्नी सिंह तालाब की सफ़ाई करवाने का बीड़ा उठाया और अच्छी ख़ासी गहराई तक का काम दिखने लगा है ।
तालाबों की साज सज्जा की नौटंकी को शहर वालों ने बड़ी क़रीबी नज़र से देखा है ।
अरपा नदी तो टेम्स होते होते रह गयी , अलबत्ता अरपा घमासान अभी जारी है । एक दूसरे का पजामा फाड़े पड़े हैं ; कलफ़दार लोग हैं यहां के और शहर बिलासपुर है कि ठसके से मज़ा ले रहा है ।
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पानी और तालाब पर बातचीत होती रही है – होती रहेगी —
तालाब पानी का घर है , उसका आस पड़ोस भी पानी दार और पानी को पोसने वाला हो तभी तालाब बचेगा ।
आस पास की ज़मीन – पैठू – मेड़ और पानी का रास्ता निरापद हो सका तो इस बारिश में एक तालाब ज़िंदा मिसाल बनेगा – उम्मीद तो है ।
शहर बिलासपुर : कलेक्टर साहेब को , एस डी एम साहेब को अपनी अक़ीदत पेश करता है और भाई प्रकाश सिंह और उनके साथियों के जज़्बे को सलाम कहता है ——
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नवल शर्मा

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