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उम्र के हिसाब से प्रेम का पाठ पढ़ाते वक्त,भरी जवानी में सठियाये हुए लोग. : प्रियंका शुक्ला

22.09.2018: बिलासपुर 

जी हां, मैं बात कर रही हूँ उन तथाकथित मॉडर्न और पढ़े लिखे,जवान लोगो की जिन्होंने जीन्स-टीशर्ट तो टाइट करके अपने बदन पर डाल लिया है, पर आज तक दिमाग मे कचरा जमा है।

काफी दिनों से देख रही हूँ कि बिग बॉस के शो में अनूप जलोटा और उनकी कम उम्र की गर्लफ्रैंड को लेकर काफी बेतुके और भद्दे भद्दे मजाक बनाये गए।
ये मजाक बनाने की कहानी और इनका सिलसिला यही नही रुका, बल्कि इस पेअर के अलावा मिलिंद सोमन और उनकी हाल ही में जिनसे शादी हुई, और जो मिलिंद सोमन से उम्र में काफी छोटी भी है उनको भी ट्रोल किया गया।

किसी ने ये कहा कि मैं भी अनूप जलोटा बनना चाहता हूँ, तो किसी इन रिश्तों को पैसा और प्रॉपर्टी के लालच से जोड़कर अपने हिसाब से तमाम बुद्धजीवी कुतर्क रखे।

आप कहेंगे कि बुद्धिजीवी कुतर्क कैसे, अरे भाई अपने हिसाब से तो वो खुद को तथाकथित मॉडर्न और बुद्धिजीवियों में मानते है, इसलिए थोड़ी इज्जत दे दी।
क्योंकि इन बुद्धजीवी लोगो को तो किसी की भावनाओ को इज्जत देना न आया, ऐसे में हम भी बदले की राजनीति से इनका,इन्ही के तरीकों से अपमान कर दे, तो हममें और उनमें कोई खासा फर्क नही रह जायेगा।

इन सबके बीच सबसे दिलचस्प बात ये रही कि इसमें ज्यादातर नौजवान शामिल रहे, जिनको मैं समझती थी कि प्यार और भावनाओं की थोड़ी तो कदर होगी ही, क्योंकि जवानी मे प्यार होना और उसको महसूस कर पाना शायद ज्यादा आसानी से समझ आता है, लेकिन मेरी सोच यहां गलत निकली।

ये तथाकथित नौजवान मॉडर्न लोग सबसे ज्यादा शामिल रहे उम्र के फासले वाले प्यार और भावनाओं का मजाक बनाने में।
अरे अगर एक बार मान इन तथाकथित मॉडर्न लोगो की भी ले कि प्यार नही भी है, तो आपको किसी की निजी जिंदगी में घुसने और ताक झाक करने का अधिकार आखिर किसने दिया? वो भी तब, जब आज पूरे देश मे निजता की अधिकार की एक बड़ी बहस छिड़ी पड़ी है।

मत भूलिए कि ये वही देश है जहां कृष्ण की पूजा होती है, और कहानियों के मुताबिक मत भूलिए कि उनकी प्रेमिका राधा थी, जो कि कृष्ण से काफी बड़ी थी। इसके अलावा भगवान शिव की दूसरी पत्नी पार्वती उनके आगे उम्र में बहुत ही छोटी थी, पर उन्होंने शिव को प्रेम किया और तपस्या करके उनको अपने प्रेम का अहसास कराया और फिर ब्याह भी रचाया।

ये वही देश है जहां मीरा अपने पति, घर द्वार त्यागकर कृष्ण के प्रेम में दीवानी हो गयी।
ऐसे तमाम उदाहरण है जिनको वही सबसे ज्यादा पूजते भी होंगे, जो आज अनूप जलोटा और मिलिंद सोमन के रिश्तों को ट्रोल करते फिर रहे है।

अब आप कहेंगे कि आप कबसे भगवान और ऐसी मिथकों को सच मानने लगी, तो इस पर मेरा जवाब यही है कि मैं नही मानती। पर आप तो मानते है ना?
अपने माने हुए कहानियों और भगवानों की पूजा और हकीकत जिंदगी में कोई कर दे अपराध ? फिर तो आपमे और देश को खादी पहनकर सदन में पोर्न देखकर, समाज को संस्कारो का पाठ पढ़ाने वाले नेताओं में कोई अंतर नही रहने वाला।

अब चलिये चलते है आपकी ही दुनिया के लोगो के बीच। एक व्यक्ति को उससे 22 साल छोटी लड़की प्यार करने लगती है। वो लड़की कोई और नही बल्कि न जाने कितनों की पसंदीदा सायरा बानो है, बेहद खूबसूरत इस अदाकार को दिलीप कुमार से प्यार हो जाता है।
12 साल की उम्र से सायरा दिलीप को दीवानों की तरह चाहती थीं। जब ये चाहत दिलीप कुमार के सामने आई तब उनकी उम्र 44 साल थी और सायरा उस वक्त सिर्फ 22 साल की थी। दो बार के फर्क के चलते भी दिलीप इस रिश्ते से कतरा रहे थे लेकिन वह इस बात से अच्छी तरह वाकिफ थे कि सायरा उनसे बेइंतेहा मोहब्बत करती हैं। 1966 में दोनों ने किसी को बिना बताए शादी कर ली।

दोनों के संबंधों को आज से सालों पहले लोगो ने सहजता से स्वीकार भी कर लिया। तब अगर लोग ट्रोल करते तो समझ भी आता, पर तब के वक्त से हम आज न जाने कितना आगे आ गए है, इसके बावजूद हमारी सोच और मानसिकता आगे बढ़ने के बजाय और भी गड्ढे में गिरते क्यों जा रहा है?

इसके अलावा बीते लगभग 4 साल पहले भी कांग्रेस के एक नामी और बड़े नेता को एक नामी महिला पत्रकार से इश्क हुआ। दोनो के इश्क ने एक दूसरे स्वीकार करते हुए और अपने बेटे की शादी की जिम्मेदारी निभाने के बाद, खुद भी शादी के मुकाम तक पहुँच गए और आज तक तक कोई चू चा नही सुनाई दी। दोनो का प्यार और रिश्ता आज तक अच्छा चल रहा है। कुछ याद आया या फिर भूल गए इनके नाम?? चलिये बता ही देती हूँ। वो जोड़ा है दिग्विजयसिंह और अमृता का, जिन्होंने एक दूसरे प्रेम को, उम्र और समाज के ढकोसले से ऊपर उठकर सम्मान दिया और शादी के रिश्ते में आगे बढ़ गए।

चलिये इसी समाज का एक और उदाहरण देती हूँ, जब एक शिष्या और गुरु के बीच प्रेम पनपता है। ये उस वक्त की बात है, जब मैं स्कूल में थी और समाचारों में ये खबर गर्म करके परोसी जा रही थी, सबको बड़ा मजा आ रहा था क्योंकि गुरु और शिष्या जैसा रिश्ता प्रेम में पनपता देख कोई हजम नही कर पा रहा था, हालांकि बतौर महिला मैं सिर्फ एक बात से असहमत हूँ कि एक महिला के साथ रहते हुए दूसरे से सम्बन्ध किये, तो ऐसे में उस महिला के साथ अन्याय हुआ जो कि गलत है। पर इस बात को अगर किनारे कर दे, तो आप देख सकते है कि उस गुरु शिष्या का जोड़ा जो बाद में प्रेमी- प्रेमिका और उसके बाद पति-पत्नी में तब्दील हो गया। आज तक ये रिश्ता सफल है।
इतने के बाद तो आपको इस जोड़े का नाम याद आ ही गया होगा..? नही याद आया? इसको भी बता देती हूँ, वो जोड़ा था प्रो. मटुकनाथ और जूही का।

इस जोड़े की सिर्फ एक गलती ये रही कि एक अन्य महिला के साथ अन्याय हुआ, पर उसके अलावा इनके प्रेम का रिश्ता अच्छे अच्छे जवान जोड़े को चुनौती देते है। दोनो के प्रेम को अब कोई अय्याशी या प्रॉपर्टी के लालच का नाम दे दे, तो फिर कोई जवाब नही है।

इसका जवाब सिर्फ यही है कि आप आज भी काफी छोटी और टुच्ची मानसिकता का शिकार है और काफी पिछड़े हुए भी। इससे आपकी ज़िंदगी तो भले कट जाए, पर आपकी आने वाली पीढ़ी को आप कभी नही समझ पाएंगे और न ही सहजता से स्वीकार पाएंगे। इसके अलावा हाल के कई जोड़े जो कि फ़िल्म जगत का बड़ा नाम है वो भी कतारों में है, जैसे प्रियंका चोपडा-निक्स जॉन, करीना-सैफअली खान आदि। भी जीता जागता उदाहरण है हमारे आपके बीच।

अब चलिये आपको ले चलती हूँ फिल्मों के तरफ, वही फिल्में जो देखकर आप वाह वाह करते है, पर समाज मे अगर ऐसा कुछ सामने दिखे तो उसको सहजता से स्वीकार करने के बजाय तरह तरह के प्रमाणपत्र से नवाजते है। एक फ़िल्म आयी थी चीनी कम जिसमे अमिताभ और तब्बू ने काफी मजबूती से अपनी उम्र को चुनौती देते हुए रोमांस किया था। इसके बाद एक फ़िल्म और आयी निःशब्द इसमें भी एक कम उम्र की लड़की,जो अपनी सहेली के बाप के साथ प्यार में दिखाई गई थी। ये तो दो उदाहरण रहे इसी सदी के फिल्मों की। थोड़ा पीछे जाए तो हाल ही हम सबको अलविदा कह चुकी एक शानदार अदाकारा श्रीदेवी की एक फ़िल्म आयी थी जिसमे श्रीदेवी को अपनी माँ के बॉयफ्रेंड से प्यार हो जाता है। 1988-89 के बीच आयी ये फ़िल्म बेहद हिट रही, फ़िल्म का नाम था “लम्हे” जो काफी सुपरहिट फिल्म थी उस समय की।
आखिर क्यों ऐसा है कि जिन चीजों को हम और आप फिल्मों और धारावाहिकों में देखकर आते है, उस पर खूब तालियां बजाते है, ये भी चाहते है दो प्रेम करने वाले एक हो जाये। पर वही जब हमारी निजी जिंदगी के इर्दगिर्द ऐसा होता है तो बिल्कुल अजूबा जैसा देखते है और असहज हो जाते है…. सोचिए जरा इसे, ऐसे में मुझे कुमार विश्वास की कविता की एक लाइन याद आती है “अभी तक डूब के सुनते थे हम किस्सा मोहब्बत का, जो किस्सों को हकीकत में बदल डाला तो हंगामा”

इस विषय पर अपने विचारों को लिखने और बोलने को जितना मिलेगा वो मेरे लिए कम होगा, बस यही गुजारिश है कि किसी की निजी जिंदगी में मत घुसिए परिवर्तन और प्रेम को हर रूप में सहजता से स्वीकार करिये।
अब सिर्फ गाने में मत गाते रहिये कि
“न उम्र की सीमा हो, न जन्मों का हो बंधन” इसको हकीकत में भी स्वीकार कर लीजिए, आपको भी बेहतर महसूस होगा।।

 

प्रियंका शुक्ला, अधिकवक्ता , बिलासपुर ,सामाजिक कार्यकर्ता और फिलहाल महिलाओं के संवेदनशील मुद्दों पर  लिखना शुरू किया हैं और बेहतरीन लिख रहीं हैं .

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