शिक्षा-स्वास्थय सांप्रदायिकता हिंसा

इतना याद रख लो बुजुर्गों का खून बहाकर कोई धर्म महान नहीं बनेगा!

विक्रम सिंह चौहान

डॉक्टर और वैज्ञानिक सोच के सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर की 67 साल की उम्र में हत्या कर दी गई थीं।

कल उनके हत्यारे ने स्वीकार किया है कि उसने उन्हें पहले पीछे से सिर में गोली मारी और जब वे जमीन पर गिर गए तो उनकी दाई आंख में गोली मारी।

हत्यारे के अनुसार हत्या से पहले उसकी ट्रेनिंग हुई थी।उसे मुस्लिम कट्टरता,लव जिहाद , गौ हत्या और हिन्दू धर्म पर साध्वी प्रज्ञा जैसों के प्रवचन के वीडियो दिखाए गए।

उसे बंदूक चलाना सिखाया गया।उससे लगातार कहा जाता रहा तुन्हें हिन्दू धर्म के खिलाफ रहने वालों का मर्डर करना है।

अगस्त 2013 में दाभोलकर के हत्या के बाद आरोपी ने इसी तरह 2015 में 82 साल के कॉमरेड गोविंद पानसरे की हत्या की और फिर पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या 2017 में किया।

गौरी लंकेश की उम्र 55 साल थीं।

मेरा देश से यही सवाल है कि देश में बुद्धिजीवियों को मारने का ट्रेनिंग सेंटर कौन चला रहा है?

वे कौन से लोग हैं,कौन संस्था है जो इन्हें हथियार मुहैय्या करवा रही है?

दूसरा सवाल गोदी मीडिया से है जो तालिबान का यु ट्यूब से वीडियो निकालकर,सीरिया का यु ट्यूब से वीडियो निकालकर हमें बताता है देखों कैसे आतंकी तैयार होते है

वह अपने देश में आतंकी तैयार करने वालों का अड्डा,उसका वीडियो कब दिखाएगी?हिन्दू धर्म का बग़दादी कौन है? ये हमें कब बताएगा।

इतना याद रख लो बुजुर्गों का खून बहाकर कोई धर्म महान नहीं बनेगा!

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