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आसान नहीं है किसी बच्चे की मौत का दुख बर्दाश्त कर लेना .

मुजफ्फरपुर में रोज़ अपनी जान दे रहे वे नन्हे बच्चे इतने मासूम हैं कि अंतिम संस्कार में उनकी मृत देह को आग में जलते हुए हम कैसे देख सकते हैं ? उन्हें तो ज़मीन के हवाले ही करना होगा …। बहुत कठिन है किसी बच्चे की , जवान की या बुज़ुर्ग की मौत बर्दाश्त करना । औऱ उसमे सबसे अधिक बच्चों की , उन्होंने तो अभी दुनिया देखी ही नहीं थी .. अरे अभी अभी तो उनका जन्मदिन मनाया था और अभी अंतिम संस्कार ? शरद कोकास

कठिन है

आसान नहीं है
किसी बच्चे की मौत का
दुख बर्दाश्त कर लेना

अनदेखे सपनों की पिटारी को
डेढ़ हाथ की कब्र में दफना आना

आसान तो नहीं ही है
किसी बरगद बुज़ुर्ग की मौत पर
आँसू पी जाना

यकायक छाँव गायब पाना
अपने सर से

आसान नहीं है बिलकुल भी
किसी जवान मौत को सदमे की तरह
बर्दाश्त कर लेना

ज़िम्मेदारियों के पहाड़ों से
मुँह चुराकर निकल जाना

बहुत कठिन है
बहुत बहुत कठिन
उनकी छोड़ी हुई
दुनियाओं के बारे में सोचना

चट्टानों की तरह
अपनी जगह पर टिके रहना ।

  • शरद कोकास

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