अदालत

आधार:  एक_दुर्भाग्यपूर्ण_फैसला : सीपीआई(एम) पोलिट ब्यूरो 

27.09.2018

सीपीएम शुरू से ही मानती रही है कि कल्याणकारी योजनाओं के लिए आधार को अनिवार्य नही किया जाना चाहिए । असलियत यह है कि आधार से पुष्टि न होने के चलते लाखों गरीब अपने अधिकार से वंचित हो रहे हैं । इसका नतीजा यह हुआ है कि जिन करोड़ों लोगों की जिंदगी इन कल्याणकारी योजनाओं पर निर्भर थीं वे उनसे छिन गई हैं और उनकी जान सांसत में आ गयी है । यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने बहुमत के फैसले में आधार की अनिवार्यता को जारी रखा है ।

● सुप्रीम कोर्ट के तथाकथित बचाव किसी काम के साबित नही होने वाले । गरीबो और वंचितों तक कल्याणकारी योजनाओं का फायदा तभी पहुंच सकता है जब आधार की बाध्यता पूरी तरह समाप्त कर दी जाए । सीपीआई(एम) इसके लिए संघर्ष जारी रखेगी ।

● सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि निजी कंपनियां आधार के डाटा हासिल नही कर सकेंगी, बैंक खातों, मोबाइल कनेक्शन्स, शिक्षा संस्थान में दाखिले और परीक्षाओं के लिए इसकी जरूरत नही होगी । इससे निजता के अधिकार की थोड़ी बहुत हिफाजत हो सकती है मगर जब खुद केंद्र सरकार निजीकरण करके अपना काम और जिम्मेदारियां निजी कंपनियों के लिए आउटसोर्स कर रही है तब समस्या सामने आएगी । इन कम्पनियों के पास आधार का पूरा डाटा पहुंच जाएगा । यह लोगों के निजता के अधिकार का उल्लंघन होगा – जिसे खुद सुप्रीम कोर्ट ने मौलिक अधिकार बताया है ।

● सीपीआई(एम) जस्टिस चंद्रचूड़ के अल्पमत निर्णय का स्वागत करती है जिसमे उन्होंने आधार कानून को मनी बिल बताकर पारित कराने को संविधान के साथ धोखाधड़ी बताया है ।

【सीपीआई(एम) पोलिट ब्यूरो का बयान]

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