राजनीति

आज से मध्य प्रदेश में शुरू हो रहे हैं शैलेन्द्र शैली स्मृति व्याख्यान.

 

24.07.2018

भोपाल 

आज से मध्य प्रदेश में शुरू हो रहे हैं शैलेन्द्र_शैली_स्मृति_व्याख्यान –
सामयिक महत्व के विषयों को थोड़ी गहराई के साथ समझने समझाने के लिए इन व्याख्यानों का आयोजन 2002 से लगातार 24 जुलाई से 7 अगस्त तक किया जाता है. 

शैलेन्द्र_शैली (24 जुलाई 1957 – 07 अगस्त 2001) असाधारण व्यक्तित्व थे । परिचय के नाते उन्हें लोकजतन के संस्थापक संपादक, प्रखर वामपंथी नेता, कवि-लेखक, चित्रकार और अपनी मिसाल आप बेमिसाल वक्ता वगैरा वगैरा कहा जा सकता है । मगर यह परिचय भी उनकी विलक्षणता को उजागर नही करता । सिर्फ एक बानगी काफी है कि उन्नीस महीने की इमरजेंसी की जेल काट कर जब वे मार्च 77 में बाहर निकले थे तब पूरे 19 वर्ष के भी नही हुए थे । वे एसएफआई, सीपीएम के सबसे युवा केंद्रीय समिति सदस्य रहे । उनके बारे में अभी लिखा जाना शेष है .

● उनकी स्मृति में हर वर्ष प्रदेश भर में आयोजित किए जाने वाले व्याख्यानों का आयोजन विभिन्न जिलों में शैलेन्द्र शैली स्मृति व्याख्यान समारोह/आयोजन समितियों के द्वारा किया जाता है।
● शैली की रुचि और सक्रियता के आयामों के अनुरूप ही ये व्याख्यान होते हैं । शहरों के आधुनिक सभागारों से लेकर आदिवासियों के बीच पहाड़ियों के ऊपर, मजदूरों के बीच उनके कार्यस्थलों के शेड्स और महिलाओं के बीच उनकी बस्ती मोहल्लों में होते हैं ।
● इस वर्ष के व्याख्यानों में अलग अलग जिलों ने मौजूदा कृषि संकट, मार्क्स की 200 वीं सालगिरह, वैज्ञानिक चेतना की जरूरत से लेकर लोकतंत्र पर मंडराते खतरे, मोदी सरकार के चार साल तक के मुद्दे चुने हैं ।
● अब तक निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार इनमे प्रो.राव साहब कस्बे, प्रो.प्रभात पटनायक, प्रकाश कारात, बृंदा करात, सुभाषिणी अली के रहने की स्वीकृति मिल चुकी है। बाकी स्थानों पर राज्यस्तरीय वक्ताओं की हिस्सेदारी होगी ।

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शैलेन्द्र शैली की स्मृति को सलाम -उनका एक लिखा गीत

ये देश शहीदों की माला
हर सूबा इसका मोती है
जंगे आज़ादी में जो बहा
जंगे आज़ादी में जो बहा
उस खून से जलती ज्योति है

कितनी है महक और रंग कितने
ये देश तो एक गुलदस्ता है
जालिम की कश्ती हाथों में
हर फूल की हालत खस्ता है
हर फूल की हालत खस्ता है।
दे देश शहीदों…….

ये देश है लाला की मंडी हर माल नफे में बिकता है पत्थर की मूरत महंगी हैं इस का लहू पर सस्ता इंसान का लहू पर सस्ता है
ये देश शहीदो…….

ये देश है गंगा की कुर्ती
ये देश है जमुना का आँचल
ये ब्रहपुत्र का कंगन है
कृष्णा काबेरी की पायल
ये देश शहीदो……

इस आँचल को उस कुर्ती से
इस कंगन को उस पायल से
लड़वाने वाले दूर हटो
इस मादरे हिन्द की धरती से

ये देश शहीदों की माला
हर सूबा इसका मोती है
जंगे आज़ादी में जो बहा
उस खून से जलती ज्योति है।

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(In this photo Com. Shailendra shaily standing Second from left between n.k. kashyap and Sitaram Yechuri)

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