कला साहित्य एवं संस्कृति

23.आज मसाला चाय कार्यक्रम में सुनिए व्यव्गाकार शरद जोशी की रचना “जिसके हम मामा हैं ” अनुज

आज मसाला चाय कार्यक्रम में सुनिए व्यव्गाकार शरद जोशी की रचना “जिसके हम मामा हैं ” 
शरद जोशी का ये व्यंग्य बताता है कि लोकतंत्र के नाम पर राजशाही की तरह चल रही भारत की व्यवस्था में लोक कैसे ठगे जा रहे हैं.

अनुज श्रीवास्तव ने मुबंई में.मसाला चाय की श्रंखला प्रारंभ की थी जिसमें वे देश के लब्धप्रतिष्ठित साहित्यकार ,कवि और लेखकों की कहानी, कविता का पाठ करते है.यह श्रंखला बहुत लोकप्रिय हुई ,करीब 50,60 एपीसोड. जारी किये गये. सीजीबास्केट और यूट्यूब चैनल पर क्रमशः जारी करने की योजना हैं. हमें भरोसा है कि अनुज की लयबद्धत आवाज़ में आपको अपने प्रिय लेखकों की कहानी कविताएं जरूर पसंद आयेंगी.

मसाला चाय के इस अंक में सुनिए.. शरद जोशी की व्यंग रचना जिसके हम मामा हैं.

Related posts

मुकुट बिहारी सरोज जी बादल की यादों में ……

News Desk

सावित्री बाई फुले और फ़ातमा शेख़ : सोचिए उस “दौरे जाहिलियत” में सामाजिक तौर पे बहिष्कृत कर दिए गए दंपत्ति को “शेल्टर” देना कोई हंसी ठट्ठे का खेल नहीं रहा होगा.: जुलैखा जबीं

News Desk

आज के इस उन्मादी दौर में लोगों के बीच मानवमुक्ति, तर्कशीलता और अमन की सोच कायम करना बहुत जरुरी है। अगर आज कबीर होते तो वे भी असहिष्णुता की बली चढ़ जाते। ऐसी परिस्थिति में लबों को आज़ाद करना वक्त की ज़रूरत है. – बोल के लब आजाद हैं तेरे अभियान . रायपुर

News Desk