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आज जिस सेनेटाइजर को मंहगे में खरीद रहे हैं उसे बनाने वाले डॉक्टर को तब लोग पागल कहते थे

पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का कहर है. भारत मेभी इसके संक्रमित बढ़ते जा रहे हैं. इस वायरस से बचने के लिए सभी को बार-बार हाथ धोते रहने की सलाह दी गई है. क्योंकि.

तुच्छ समझा जाने वाला सेनेटाईज़र इन दिनों भरकस डिमाण्ड में है. चंहुओर कोरोना वायरस का कहर है. लोगों को लोगों को बार बार हाथ धोते रहने की हिदायत दी गई. फिलहाल यही सबसे कारगर उपाय है वायरस से बचने का.

हमारे देश में ज़्यादातर लोगों ने कभी सेनेटाईज़र इस्तेमाल नहीं किया है शहरी आबादी में भी बहुत थोड़े से लोग ऐसे हैं जो रेग्युलर सेनेटाईज़र यूज़ करते हैं. अब यकायक लोगों को सेनेटाईज़र की उपियोगिता मालूम पड़ी है तो बाज़ार में इसकी किल्लत और कालाबाजारी चल रही है. केमिस्ट मनचाही कीमत वसूल रहा है. नकली सेनेटाईज़र भी बिक रहा है. लोग डर के मरे जा रहे हैं हां धोने को.

लेकिन एक समय ऐसा भी था जब हाथ होने की बात कहने वाले डॉक्टर को उसके साथी पागल और सनकी कहते थे उसका मज़ाक उड़ाते थे. पागलखाने में इस कदर पीटा गया कि उसकी मौत हो गई. इस वैज्ञानिक का नाम था डॉक्टर इग्नाज़ सेमेलवीस. (Dr. Ignaz Semmelweis)

हंगरी में 1818 में इनका जन्म हुआ था. वियना शहर के सरकारी अस्पताल में ये डॉक्टर थे. शहर के दो सरकारी अस्पतालों में एक ही विधि से प्रसाव कराने पर भी महिलाओं की मृत्युदर दोनों जगह अलग थी.

डॉक्टर इग्नाज़ सेमेलवीस ने डॉक्टरों और नर्सों द्वारा हाथ धोए बिना इलाज करने की आदत को बीमारी फैलने का कारण पाया और सन 1847 में पहली बार उन्होंने हाथ धोने वाला वो द्रव्य बनाया जिसे आज हम एंटिसेप्टिक और सेनेटाईज़र कहते हैं.

सेमेलवीज़ की ये कोशिश कारगर भी हुई. मृत्युदर में एक प्रतिशत की कमी आ गई. डॉक्टरों ने तो सेमेलवीस की बात नहीं मानी पर दाइयां हाथ धोकर प्रसव कराने लगीं नतीजा ये हुआ उनसे प्रसाव कराने वाली महिलाएं और बच्चे जयादा स्वस्थ रहते थे. प्रसव के आई महिलाएं दाइयों से प्रसव कराने का आग्रह करने लगीं. सेमेलवीस ने पर्चे छपवाकर प्रचार किया कि भाई ये देखो हाथ धोने की इस सावधानी से मौतों में कमी आई है.

कोई उनकी बात नहीं मानता था क्योंकि उनकी बात उस समय की वैज्ञानिक मान्यताओं के ख़िलाफ़ थीं.

उनके साथी डॉक्टर बहुत नाराज़ होते थे कि ये सनकी हमें बार-बार हाथ धोने को कहता है. भला हम प्रत्ष्ठित लोगों के हाथ कभी इतने गंदे कैसे हो सकते हैं कि बार-बार धोने की ज़रुरत पड़े.

संक्रामक बीमारियों से बचने के लिए डॉक्टरों को हाथ धोने की सलाह देने वाले इग्नाज़ सेमेलवीस का उनके साथी डॉक्टरों ने इस कदर मज़ाक बनाया के बेचारे एक बारगी बीमार पड़ गए. उनक नर्वस ब्रेकडाउन हो गया. इस बात का फायदा उठाकर किसी ने उन्हें पागलखाने में भारती करा दिया. उन दिनों वहां के पागलखानों के हालत बहुत बेकार थे.

पागलखाने में उन्हें बुरी तरह पीटा गया जिससे उनके हाथ में घाव हो गया. घाव गैंग्रीन में बदल गया. पूरे शरीर में संक्रमण फ़ैल गया.

संक्रमण से बचने का तरीका बताने वाले 47 वर्ष के डॉक्टर इग्नाज़ सेमेलवीस 14 दिन पागलखाने में रहे और संक्रमण से ही उनकी मृत्यु हो गई.

1847 में उनके बनाए सेनेटाईज़र को लोग रद्दी समझते थे और हाथ साफ़ रखने की उनकी सलाह दुनिया को मज़ाक लगती थी. आज पूरी दुनिया जेब में सेनेटाईज़र लिए हाथ साफ़ करती घूम रही है.  

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