अदालत अभिव्यक्ति आदिवासी दलित मानव अधिकार राजनीति

आज छत्तीसगढ़ मै जगह जगह संविधान दिवस की धूम : रायपुर मैं पूर्व चीफ जस्टिस तो बिलासपुर मैं प्रोफेसर चौथीराम यादव . रायगढ़, सरगुजा, जशपुर, दुर्ग ,बस्तर आदि में आयोजन .

26 नवंबर 2017
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आज प्रदेश मे कई स्थानों पर संविधान दिवस बडे धूमधाम से मनाया जा रहा है , विभिन्न सामाजिक संगठन ,दलित संगठन पूरे नवम्बर संविधान दिवस के आयोजन करते रहे ,वही छत्तीसगढ़ सरकार ने भी सर्कुलर जारी करके आज के दिन आयोजन करने के लिये निर्देश. जारी किये हैं .
आजादी के बाद पहली बार संविधान दिवस के इस तरह के आयोजन दिखाई दे रहे हैं, क्यों कि सबको संविधान ,लोकतांत्रिक संस्थाओ ,न्याय पालिका और धर्म निपेक्षता ,बराबरी पर संकट दिखाई दे रहे है.दलितों ,आदिवासियों अल्प संख्यको पर बढ़ रहे हमलों ने सारे समुदायों को एकत्रित कर दिया है और संविधान की याद दिलाने की जरूरत महसूस की है ,इसका ही परिणाम है कि आज पूरे देश मे संविधान दिवस मनाने की होड मची है ,यह लोकतंत्र के लिये
अच्छे संकेत हैं.

रायपुर

रायपुर में आज sc-st-obc-mainorty
मोर्चा ने गाँधी मैदान में आम सभा आयोजित की है जिसमे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस बीके बालकृष्ण मुख्य वक्ता है ,अध्यक्षता छत्तीसगढ़ के आदिवासी नेता अरविंद नेताम कर रहे है ,इस सभा मे पूरे प्रदेश से हजारों लोग शामिल हो रहे है ।

एक और आयोजन गुरू घासी दास प्लाजा आमापारा रायपुर में किया जा रहा है जिसमे मुख्य वक्ता दलित विचारक और पत्रकार संजीव खुदशाह होंगे .

 

बिलासपुर

बिलासपुर मैं आम्बेडकर युवा मंच द्वारा आम्बेडकर चौक पर बड़ा आयोजन कर रहे है ,दोपहर 4 बजे शुरू होने वाले इस कार्यक्रम में बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर दलित चिंतक चौथी राम यादव औऱ युवा दलित चिंतक डॉ. सुनील कुमार सुमन (नागपुर ) शामिल होंगे ।

इनके अलावा अम्बिकापुर ,जशपुर ,रायगढ़ ,बस्तर और दुर्ग में आयोजन हो रहे है ,.

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आज के दिन संविधान के प्रस्तावना को याद जरूर किया जाना चाहिए ही ।

संविधान की प्रस्तावना:

” हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को :
सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा
उन सबमें व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करनेवाली बंधुता बढ़ाने के लिए
दृढ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949 ई0 (मिति मार्ग शीर्ष शुक्ल सप्तमी, सम्वत् दो हजार छह विक्रमी) को एतदद्वारा
इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं। “

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