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आखिर_और_कितने_नीचे_गिरेंगे : बादल सरोज .

20.04.2019

कल भोपाल मे आतंकी वारदातों की एक अभियुक्ता ने मुंबई आतंकी हमले के शहीद हेमन्त करकरे के खिलाफ जिस अश्लील और शर्मनाक भाषा का इस्तेमाल किया उससे लोग हैरत मे हैं ।
● टिप्पणियां इतनी घिनौनी थीं कि देश की आईपीएस असोसिएशन को भी इसकी निन्दा करनी पड़ी । रीढ़ विहीन चुनाव आयोग को भी नोटिस देना पड़ा ।
● सवाल इस तरह की घिनौनी बकवास का नही है । जो आतंकी है वह आतंकी रहेगी । सवाल यह है कि आखिर भाजपा की राजनीति और कितना नीचे गिरेगी ।
● ये सीधे मोदी अमित शाह और आरएसएस की पसंद से भोपाल मे उतारी गयी उम्मीदवार हैं । क्या इन तीनों मे से किसी ने इस घिनौने बयान की आलोचना निन्दा की ? ऐसा प्रत्याशी चुनने की अपनी चतुराई का पुनरावलोकन किया ? नही ।
● क्या उनके बगल मे अपनी दन्तराशि का प्रदर्शन कर रहे शिवराज सिंह चौहान – जिनकी सरकार ने इस कथित साध्वी को दो दो बार गिरफ्तार किया था – उन्हे डपट कर ऐसी बकवास करने से रोका ? नही ।
● यह बर्बरता का महिमा मंडन है । यह हत्यारों की रण भेरी है । यह भेड़ियो की ललकार है । यह सभ्य समाज को नष्ट-भ्रष्ट, लोकतंत्र को तिरोहित कर देने वाली काली अमानुषिक ताकतों की पदचाप है। देश बचाना है तो इसे रोकना ही होगा ।
● भोपाल को जागना होगा। देश को जागना होगा ।

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