महिला सम्बन्धी मुद्दे मानव अधिकार

अमेजॉन कम्पनी ने और उसके मालिक ने बेशर्मी की सारी हदें पार कर दीं हैं औरतों के मुँह पर तमाचा मारा है,सदियों से चले आ रहे स्त्री संघर्ष पर, स्त्री विमर्श पर थूका है मज़ाक उड़ाया है।

एक अपील

अमेजॉन कम्पनी ने और उसके मालिक ने बेशर्मी की सारी हदें पार कर दीं हैं औरतों के मुँह पर तमाचा मारा है,सदियों से चले आ रहे स्त्री संघर्ष पर, स्त्री विमर्श पर थूका है मज़ाक उड़ाया है। सिद्ध किया अमेजॉन के मालिक ने कि मध्यकालीन सामंती व्यवस्था अभी समाप्त नहीं हुई है स्त्री अभी भी नुमाइश का सामान है भोग विलास की वस्तु मात्र है।

कहाँ हैं औरतों से संवेदना जताने वाले मोदी जी , पकड़ कर जेल में क्यों नहीं भेजते अमेजॉन के मालिक को, कम्पनी क्यों नहीं बंद करते उसकी? जिसने संपूर्ण महिला जाती का अपमान किया क्यों मौन हैं आप? सोशल मीडिया पर सरेआम वो बेहूदा ऐश ट्रे की तस्वीर शेयर की जा रही है ख़रीदो – फ़रोख़्त भी होगी उसकी। एक कम्पनी के मालिक ने खुलेआम बेधड़क बिना संकोच के बिना किसी ख़ौफ़ के एक बेहूदा सोने का ऐश ट्रे बनाया है मार्किट में उतारा है बाज़ारवाद इस तरह से औरत का इस्तेमाल करेगा।

वर्तमान सरकार पूंजीपतियों की ख़ैरख़्वाह है उन्हें फ़रोग दे रही है उनकी तरक्की के लिए कामयाबी के लिए दिन- रात मेहनत कर रही है विजया मालिया जैसे अनेकों का क़र्ज़ मुआफ कर चुकी है, क्या अब यह इतनी बड़ी हिमाकत भी अनदेखा की जाएगी? महिलाएँ इस बेज्जती से आहत होकर सोशल मीडिया पर विरोध कर रही हैं, ज़्यादा से ज़्यादा पत्रिका में प्रकाशित होंगे विरोध से संबंधित लेख, अख़बार में संपादकीय पृष्ठों पर लिख लेंगी थोड़े-बहुत दिनों में मुआमला रफ़ा- दफ़ा होगा।

हेरत है उजमा को पाकिस्तान से वापस लाने वाली सुषमा स्वराज भी चुप हैं उन्हें अपने देश की महिलाओं की इज्जत का कोई ख़्याल नहीं,, वो भी नहीं बोलेंगी? अपने देश की महिलाओं से कोई लेना-देना नहीं संवेदना नहीं? स्मृति ईरानी जी भी नहीं बोलेंगी? इतना म्यार से नीचे गिर गई हैं बीजेपी पार्टी की महिला पोलिटिशन, विपक्ष भी मोन है सोनिया गांधी, बिंदा करात, मायावती, ममता बनर्जी कुछ नहीं विरोध ज़ाहिर करेंगी? अरे कम से कम वोट बैंक के लिए ही बोल लो।

होना तो यह चाहिए था कि सभी स्थानीय और राष्ट्रीय पार्टी की महिला राजनीतिज्ञों को इस बेहूदा हरकत का एक साथ विरोध करना चाहिए था संसद में भी और वैसे व्यक्तिगत रूप से भी। औरतों की नाइत्तिफ़ाक़ी का ही नतीजा है कि वो अभी भी बेज्जती की पात्र बनी हुई हैं ।

सोशल मीडिया पर महिला विरोधी और मज़ाक़ की शक्ल में चुटकले बनाए जा रहे हैं महिलाओं पर और यह आम है, औरतें विरोध करने की बजाय मज़े ले- ले कर ऐसे महिला विरोधी चुटकुलों को सोशल मीडिया पर इधर-उधर संप्रेषित करती हैं।

जबतक औरतें बाज़ार और भूमंडलीकरण के परोपेगेंडा को नहीं समझेंगी, अपने वक़ार को नहीं पहाचानेंगी बाज़ार में अपना ग़लत तरीके से होता इस्तेमाल शोषण का विरोध नहीं करेंगी, अपने आप को नुमाइश विज्ञापन का हिस्सा बनने से इनकार नहीं करेंगी, ऐसे ही अपमान होगा उनका यूज़ किया जाएगा उनका।

सिर्फ सोशल मीडिया पर लिखने से कुछ नहीं होने वाला महिलाओं को व्यवहारिक रूप से अपनी आपसी नाइत्तिफ़ाक़ी दूर करके विरोध करना चाहिए इस अमेजॉन जैसी घटिया कम्पनी का।हर एक औरत अहद कर ले कि अमेजॉन कम्पनी का कोई भी प्रोडक्ट न ख़रीदेगी न अपने पति बेटे भाई को ख़रीदने देगी।

मेहजबीं
दिल्ली ।

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