अभिव्यक्ति मानव अधिकार

अभिव्यक्ति की आज़ादी का अधिकार और छत्तीसगढ़ पत्रकार सुरक्षा कानून पर सम्मेलन रायपुर में देश के प्रमुख पत्रकार जुटेंगे 17 फरवरी को रायपुर में.

14.02.2019 | रायपुर 

ऐसे समय में जबअभिव्यक्ति की आज़ादी का के अधिकार खतरे में है, और पत्रकारों पर हिंसक हमले तेज़ हो रहे हैं, पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कानून पर देशव्यापी बहस और चिंता व्यक्त की जा रही है.

सम्मेलन की मूल अवधारणा है कि लोकतंत्र में सिकुड़ती हुई असहमति और अभिव्यक्ति की स्पेस को संबोधित करने के लिए पत्रकारों और नागरिक समाज के पैरोकारों को साथ आना होगा. चूँकि अभिव्यक्ति और असहमति पर बंदिशों का सीधा प्रभाव पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर समान रूप से पड़ रहा है, लिहाज़ा यह वक्त की मांग है कि समाज के सभी प्रभावित तबके एक साथ आकर एक मंच पर एक-दूसरे के हितों की पैरवी करें.

“ आज उन पत्रकारों के सामने अत्यंत ख़तरनाक स्थिति पैदा हो गयी है जो सत्ता की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ अपनी कलम का इस्तेमाल करते हैं. इस तरह के पत्रकारों की हत्याएं हुईं, उन पर हमले हुए और सरकारी संत्र द्वारा उन्हें तरह-तरह से प्रताड़ित किया गया है. सरकार चाहें जिस पार्टी की हो, हालात कमोबेश एक जैसे हैं. राजनेता, माफिया और पुलिस के नापाक गठजोड़ ने छोटे शहरों, कस्बों और दूरदराज़ के इलाकों में काम करने वाले पत्रकारों के लिए स्थिति और भी गंभीर कर दी है.”

मीडियाकर्मियों पर बढ़ते हिंसक हमलों के परिवेश में, छग-पी.यू.सी.एल. और “ पत्रकार संयुक्त संघर्ष समिति” ने पहल कर “पत्रकारों और मानवाधिकार रक्षकों की सुरक्षा के लिए छत्तीसगढ़ का विशेष कानून” पर एक ड्राफ्ट तैयार किया, जिस पर एक सहमति बनाने के लिए अभियान चलाया गया .

छत्त्तीसगढ में कांग्रेस पार्टी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में इस मुद्दे को महत्त्व दिया. मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण के तत्काल बाद ही श्री भूपेश बघेल ने मीडियाकर्मियों को आश्वासन दिया कि छत्तीसगढ़ में पत्रकारों की सुरक्षा सम्बन्धी कानून बनाया जायेगा. इसके चलते प्रदेश में “पत्रकारों और मानवाधिकार रक्षकों की सुरक्षा के लिए छत्तीसगढ़ का विशेष कानून” लागू किये जाने की सम्भावना बलवंत हुई.

राज्य सरकार की पहल पर सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में पत्रकार सुरक्षा कानून तथा गैरकानूनी गिरफ्तारीयों के निराकारण के लिये कमेटी बन रही हैं .

इस पृष्ठभूमि में, अभिव्यक्ति की आज़ादी का अधिकार और छत्तीसगढ़ पत्रकार सुरक्षा कानून पर एक सम्मेलन 17 फरवरी, 2019 को सुबह 10.30 बजज से गास मेमोरियल हॉल, जयस्तंभ चौक के पास रायपुर, छत्तीगढ़ में आयोजित किया गया है.

इस आयोजन मे प्रमुख रुप से संजय पारिख ,सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और पीयूसीएल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष . ललित सुरजन , संपादक देशबंधु समूह ,आनंद स्वरूप वर्मा ,संपादक समकालीन तीसरी दुनियां .Patron, CAAJ , अनिल चौधरी ,शिक्षाविद् और पीस प्रमुख ,अभिषेक श्रीवास्तव , संपादक Mediavigil.com,
अजीत साही , वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनैतिक विश्लेशक .जीतेंद्र कुमार वरिष्ठ पत्रकार
संदीप राओजी ,वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार , ह्दयेश जोशी ,वरिष्ठ पत्रकार ,एनडीटीवी . बस्तर में रिपोर्टिंग करने के लिये जाने जाते है . सुहास मुंशी , वरिष्ठ पत्रकार एवं Network 18, extensively covered Bastar . अंकुर जायसवाल , शोधकर्ता , अजय प्रकाश ,संपादक जनज्वार .काम,अतुल चौरसिया ,संपादक Newslaundry Hindi. के अलावा छत्त्तीसगढ के सभी प्रमुख पत्रकार ,पत्रकार संगठन ,सामाजिक कार्यकर्ता शामिल रहेंगे.

आयोजकों की ओर से ..

अभिषेक श्रीवास्तव,
पत्रकारों पर हमले के विरुद्ध समिति (सीएएजे)

कमल शुक्ला
छत्तीसगढ़ पत्रकार सुरक्षा कानून संघर्ष समिति

डॉ. लाखन सिंह,
लोक स्वातंत्र्य संगठन, छत्तीसगढ़ (पीयूसीएल)

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