मानव अधिकार राजनीति

अग्निवेश पर फासीवादी हमला : उत्तम कुमार, सम्पादक दक्षिण कोसल

 

17.07.2018 

सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश की कथित तौर पर भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) और एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने पिटाई कर दी है। पाकुड़(झारखंड) के लिट्टीपाड़ा में पहाड़िया समुदाय को संबोधित करने पहुंचे अग्निवेश पर मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने गो बेक का नारा लगाते हुए उन पर अंधाधुंध हमला कर दिया। अग्निवेश की पिटाई के बाद कार्यकर्ताओं ने भोजपुरी में नारा लगाते हुए कहा कि ‘अगर भारत में रहे के होई, बन्दे मातरम कहे के होई…।’ उनके विवादित बयानों से नाराज कार्यकर्ताओं ने स्वामी की जूते-चप्पलों से पिटाई की।पिटाई के बाद स्वामी को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

अग्निवेश लिट्टीपाड़ा में अखिल भारतीय आदिम जनजाति विकास समिति दामिन दिवस के 195 वर्षगांठ पर यहां पहुंचे थे। इससे पूर्व उन्होंने पाकुड़ के होटल मुस्कान में प्रेस वार्ता की। प्रेस वार्ता के बाद वह जैसे ही लिट्टीपाड़ा जाने के लिए निकले बाहर मौजूद कथित भाजयुमो कार्यकर्ताओं की भीड़ ने उनके खिलाफ नारे लगाने शुरू कर दिए। साथ ही काला झंडा भी दिखाया। फिर आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने अग्निवेश की जमकर पिटाई कर दी। हमले के बाद बताया जा रहा है कि पुलिस बल मौके पर पहुंच स्वामी को भीड़ से निकाल कर अस्पताल पहुंचाया।अग्निवेश ने बताया कि कार्यक्रम स्थल से बाहर आते ही युवा मोर्चा और एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया। अग्निवेश ने कहा, ‘मैं हाथ जोड़कर कारण पूछते रहा और वे गंदी गालियां देते हुए जमीन पर गिराते हुए मारते पीटते रहे।’

घटना के बाद अाए वीडियो में भीड़ अग्निवेश और उनके समर्थकों को पीटते हुए दिख रही है। कुछ समय पहले सनातन धर्म को लेकर दिए अग्निवेश के बयान से कुछ संगठन नाराज हो गए थे। इसके बाद अग्निवेश के रांची दौरे को लेकर भाजयुमो कार्यकर्ता विरोध कर रहे थे। यह घटना तब हुई है जब सुप्रीम कोर्ट आज ही देश भर में हो रही भीड़ की हिंसा की निंदा की है।सीएम रघुबर दास ने पाकुर में भाजपा युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं द्वारा कथित रूप से स्वामी अग्निवेश की पिटाई के मामले में जांच के आदेश दिए हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले मई, 2011 में गुजरात के अहमदाबाद में एक जनसभा के दौरान अग्निवेश के साथ एक संत ने अभद्रता की। जनसभा के दौरान संत ने स्वामी अग्निवेश को थप्पड़ मारा। संत की पहचान महंत नित्यानंद दास के रूप में हुई थी।अमरनाथ में शिवलिंग के बारे में अग्निवेश द्वारा हाल ही में दिए गए बयान से संत नाराज था। उसे बाद में गिरफ्तार कर लिया गया था। संत अमरनाथ शिवलिंग के बारे में अग्निवेश द्वारा दिए गए बयान से नाराज था।

अग्निवेश ने कहा था कि अमरनाथ शिवलिंग का निर्माण कृत्रिम बर्फ से किया गया है। इसके बाद संत ने अग्निवेश पर जूता चलाने वाले को 51,000 रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की थी | अग्निवेश पर दूसरा हमला छत्तीसगढ़ के सुकमा में हुआ था जब भाजपा सरकार ने आदिवासियों के तीन गांव जला दिये थे और पांच महिलाओं के साथ बलात्कार किये थे | अग्निवेश तब राहत सामग्री लेकर उन गांवों में जा रहे थे | उस समय भाजपाई गुण्डों नें उनकी गाड़ी पर पथराव किया जिसमें वे बाल बाल बचे |अब यह तीसरा हमला किया गया है |

छत्तीसगढ़ के सक्ति में जन्मे अग्निवेश ने कोलकाता से कानून और बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई की है। पढ़ाई के बाद उन्होंने आर्य समाज में संन्यास ग्रहण किया। इस दौरान 1968 में उन्होंने आर्य सभा नाम की राजनीतिक पार्टी बनाई। फिर 1981 में दिल्ली में बंधुआ मुक्ति मोर्चा की स्थापना की। स्वामी राजनीति में भी सक्रिय रहे। हरियाणा से विधानसभा चुनाव लड़ा और जीतकर मंत्री भी बने। हरियाणा में मजदूरों पर लाठीचार्ज की एक घटना के बाद उन्होंने मंत्रीपद से इस्तीफा दे दिया और राजनीति को अलविदा कह दिया।

अग्निवेश के साथ जो कुछ हुआ यह राजसत्ता के द्वारा गुंडा तत्वों को मूक समर्थन देना साबित करता है | जो लोग मूगालते में हैं कि यह सिर्फ मुसलमानों पर हमला है तो भूल जाए अगर भगवा भी उन्हें सच का आईना दिखाएंगे तो उन्हें भी बख्शा नहीं जाएगा | वास्तव में लिंचिंग की बढ़ती घटनाएं तेजी के साथ हिन्दुओं को छोड़ अन्य तमाम धर्मों पर हमला है | गरीब, मजदूर, किसान, आदिवासी, महिलाएं तथा बच्चों को भी इस फासीवादी हमलेे ने अपने जद में ले लिया है |

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