वंचित समूह

अंबिकापुर जिले के कुसमी ब्लॉक के दूरस्थ माओवाद प्रभावित क्षेत्रों के नहीं सुधरे हालात.: आजादी के 70 वर्ष . . फिर भी रोटी के लिए 25 किमी का पैदल मार्ग .

पत्रिका के लिये ,संजय तिवारी / जितेंद्र सिंह


अंबिकापुर / कुसमी . आजादी के 70 साल से अधिक समय गुजर जाने के बावजूद बलरामपुर – रामानुजगंज जिले के दूरस्थ माओवाद प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के जीवन स्तर में आज भी कोई खास सुधार नहीं । आ पाया है । आज भी उन्हें मूलभूत सुविधाओं के साथ राशन – पानी की समस्या से जूझना पड़ रहा है । स्थिति ऐसी है कि दो वक्त की रोटी मतलब राशन के जुगाड़ के लिए भी हर माह 20 – 25 किलोमीटर पैदल सफर का संघर्ष करना पड़ता है ।

कुसमी विकासखण्ड के सामरी थाना अंतर्गत सुदूर ग्राम पंचायत चुनचुना व पुंदाग के ग्रामीण को अब भी शासन से मिलने वाली राशन सामग्री लेने हर माह 20 से 25 किमी दूर जंगली रास्ते से सफर तय कर ग्राम सबाग के राशन दुकान तक आने को मजबूर होना पड़ता है । चुनचुना – पुंदाग माओवाद प्रभावित क्षेत्र होने के कारण यहां विकास कार्य करना प्रशासन के लिए वषों से चुनौती बनी हुई है । वैसे तो सबाग से करीब 7 किमी आगे बंदरचुआ तक सड़क निर्माण का कार्य पूर्ण हो चुका है लेकिन उससे आगे सड़क निर्माण कराने में माओवादी समस्या आड़े आ रही है । इस वजह से यह काम प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है । कुछ वर्ष पहले तत्कालीन कलक्टर अवनीश शरण ने ट्रैक्टर व अन्य वाहनों से राशन सामग्री को चुनचुना पुंदाग क्षेत्र तक भिजवाया था , लेकिन बूढ़ापहाड़ में माओवादियों का बेस कैंप होने से माओवादी संगठन आसानी से डीलरों को भयभीत कर राशन सामग्री ले जाने लगे । इससे डीलर हितग्राहियों के हिस्से के राशन में कटौती करने मजबूर हो गए ।

आसपास के गांवों का भी यही हाल

जिगनिया पंचायत के आश्रित ग्रामों में चुटईपाठ , आंबाकोना , कोरवा बाहुल्य गांव सुपढ़का समेत अन्य कई पारे – मोहल्लों के ग्रामीणों को भी 8 से 12 किमी दुर्गम पहाड़ी मार्गों की दूरी तय करके राशन सामग्री समेत । पंचायत से सम्बंधित कार्यों के लिए जिगनिया तक आना पड़ता है । यही हाल अमरपुर पंचायत के आश्रित ग्राम भुलसी खुर्द , चंपानगर समेत अन्य पाठ क्षेत्र के पारा – मोहल्लों का भी है । ग्राम पंचायत हरी के । आश्रित ग्राम पकरी टोला , भलघुटरी , कुढन पानी । समेत अन्य पाठ क्षेत्र के ग्रामीणों को भी राशन सामग्री समेत अन्य कार्यों के लिए संघर्ष करना पड़ता है ।

राशन का भंडारण चुनचुना या पुंदाग में करने से माओवादी डीलरों । को डरा – धमकाकर राशन लूट ले जाते हैं , इस कारण फिलहाल यही व्यवस्था कायम रहेगी । अमरपुर व हरी , जिगनिया , चैनपुर आदि पंचायतों में ग्रामीणों की सुविधा के लिए फूड अफसर से चर्चा कर व्यवस्था बनाने का प्रयास करेंगे

बालेश्वर राम , एसडीएम , कुसमी

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