दस्तक के लिए प्रस्तुत अनिल करमेले *|| बीन भी हूँ मैं तुम्हारी रागिनी भी हूँ ||* बीन भी हूँ मैं तुम्हारी रागिनी भी हूँ! नींद थी मेरी अचल निस्पन्द कण कण में, प्रथम जागृति थी जगत के प्रथम स्पन्दन में, प्रलय में मेरा पता पदचिन्‍ह जीवन में, शाप हूँ जो बन गया वरदान बंधन में
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