*मेरे ख़ुदा !* यह क्या वशीभूत कर लेता है हमें प्यार में ? क्या घटता है हमारे भीतर बहुत गहरे ? और टूट जाती है भीतर कौन सी चीज भला ? कैसे वापस पहुँच जाते हैं हम बचपन में जब करते होते हैं प्यार ? एक बूँद केवल कैसे बन जाती है समंदर और
Complete Reading

⭕ मित्रो, आज समूह पर प्रस्तुत हैं समूह की साथी *प्रतिभा गोटीवाले* की कविताएँ. कविताएँ पढ़ें और इन पर बात ज़रूर करें.. दस्तक में आज प्रस्तुत अनिल करमेले *|| अग्नि परीक्षा ||* तुम ने कहा प्रेम और मैंने मान लिया तुमने कहा समर्पण मैंने वो भी मान लिया पर जब मैंने दोहराया प्रेम तुमने कहा
Complete Reading

दस्तक के लिए प्रस्तुत अनिल करमेले *|| बीन भी हूँ मैं तुम्हारी रागिनी भी हूँ ||* बीन भी हूँ मैं तुम्हारी रागिनी भी हूँ! नींद थी मेरी अचल निस्पन्द कण कण में, प्रथम जागृति थी जगत के प्रथम स्पन्दन में, प्रलय में मेरा पता पदचिन्‍ह जीवन में, शाप हूँ जो बन गया वरदान बंधन में
Complete Reading

⭕ आशीष नैथानी की कविताएँ *दस्तक के लिए प्रस्तुति : अनिल करमेले *|| मैं जहाँ से आया हूँ ||* वहाँ आज भी सड़क किनारे नालियों का जल पाले से जमा रहता है आठ-नौ महीने, माएँ बच्चों को पीठ पर लादे लकड़ियाँ बीनती हैं स्कूली बच्चों की शाम रास्तों पर दौड़ते-भागते-खेलते बीतती है वहाँ अब भी
Complete Reading

⭕ मूल बांग्ला से अनुवाद : उत्पल बैनर्जी* साभार कविता कोश से *दस्तक* के लिए प्रस्तुति : *अंजू शर्मा *|| तस्लीमा नसरीन की कविताएं ||* *|| लड़की ||* लड़की अकेली है लड़की बुरी तरह से अकेली है … बहुत अकेली इस तरह निर्लिप्त और संसार के सभी कुछ में अपनी उदासीनता के साथ अकेली इसी तरह
Complete Reading

  ⭕ आज दस्तक पर पढ़ें हमारे समय के महत्वपूर्ण कवि *राजेश जोशी* की कविताएँ. *|| अंधेरे के बारे में कुछ वाक्य ||* अंधेरे में सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि वह किताब पढ़ना नामुमकिन बना देता था । पता नहीं शरारतन ऐसा करता था या किताब से डरता था उसके मन में शायद यह
Complete Reading

#   चन्द्रकांत देवताले  *दस्तक के लिए प्रस्तुति : अनिल करमेले  || बेपता घर में || एक-दूसरे के बिना न रह पाने और ताज़िन्दगी न भूलने का खेल खेलते रहे हम आज तक हालाँकि कर सकते थे नाटक भी जो हमसे नहीं हुआ किंतु समय की उसी नोक पर कैसे सम्भव हमेशा साथ रहना दो
Complete Reading

14.8.1   अनुवादः पी. कुमार मंगलम_ *दस्तक के लिए प्रस्तुति : अनिल करमेले* जब भी कोई लिख रहा होता है तो वह दूसरों के साथ बाँटने की ज़रूरत ही पूरी कर रहा होता है। यह लिखना अत्याचार के ख़िलाफ़ और अन्याय पर जीत के सुखद अहसास को साझा करने के लिए ही होता है। यह
Complete Reading

⭕ आज हम कवियों के *कवियों के कवि शमशेर* की ग़ज़लें पढ़ेंगे. उम्मीद है कि चाकचौबंद होकर मौके पर मोर्चा सँभालने वाले मेरे प्रिय प्रिय मित्र भी पढ़ेंगे भी. *वक़्त सबसे हिसाब माँगेगा, अभी जो जैसा चाहे गा बजा ले* *हम तो ईमान लेके चलते हैं, जो जब जैसा चाहे आजमा ले.* वक़्त वो आ
Complete Reading

वह अनोखा भाई ** दस्तक में प्रस्तुत महादेवी वर्मा को जब ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, तो एक साक्षात्कार के दौरान उनसे पूछा गया था, ‘आप इस एक लाख रुपये का क्या करेंगी? ‘ कहने लगी, ‘न तो मैं अब कोई कीमती साड़ियाँ पहनती हूँ , न कोई सिंगार-पटार कर सकती हूँ, ये
Complete Reading

Create Account



Log In Your Account