प्रो. यशपाल का निधन
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प्रोफेसर यशपाल बस्तर में शांती यात्रा के लिये पचास गांधीवादियों के साथ आये थे . रक्त पिपासुओं ने तब भी जगह जगह विरोध किया था .
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25.7 17

 

भारत के जाने माने अन्तरिक्ष विज्ञानी और समाज विज्ञान के लिए समर्पित प्रोफेसर यशपाल कल रात नहीं रहे .
यशपाल जी ने जनविज्ञान संघटनो के साथ मिल कर विज्ञान को जन जन तक तो पहुचाया ही ,सूर्यग्रहण जैसी सामान्य अन्तरिक्ष घटना से जुड़े अंधविश्वास के खिलाफ अभियान को स्थापित भी किया ,देश के लोग उन्हें अन्तरिक्ष घटनाओ के दिनो टीवी पर उनके विश्लेषण को भूले नहीँ है.
मेने उन्हें भारत ज्ञान विज्ञानं समिती और आल इण्डिया साईस नेटवर्क के सम्मेलनों में मिलने और बातचीत करने का मोका मिलता रहा.वे गजब के वैज्ञानिक थे जो आम भाषा में सहज रूप से बडी से बडी गुत्थी सुलझा देते और हमेशा मुस्कराते रहने वाले यशपाल जी का जाना सोशल साईंस के लिये सचमुच बड़ा नुकसान है.

बस्तर के सुकमा में अप्रैल 2010 में सीआरपीएफ के 76 जवान मओवादियो के हमले में मारे गये और उसके बाद आम आदिवासियो के साथ सुरक्षा बलों का प्रतिशोध से उत्पन्न स्थिति के समय भारी अशांति फैली हुई थी .
उन दिनों 2011 में उस समय के ग्रह मन्त्री चिदम्बरम से देहली में चर्चा करके प्रोफेसर यशपाल और स्वामी अग्निवेश पूरे देश से पचास जाने माने गांधीवादीयो का एक दल लेकर बस्तर आये थे ,इस अभियान का नाम दिया बस्तर में शांती यात्रा .यात्रा में महात्मा गांधी के निजी सचिव महादेव् देसाई के पुत्र नारायन देसाई के अलावा स्वामी अग्निवेश ,प्रोफेसर बनवारी लाल शर्मा ,
छत्तीसगढ़ के आयोजकों में थे केयूर भूषण ,जनक लाल ठाकुर ,गोतम बधोपाध्याय और डा लाखन सिंह .इस यात्रा में पूरे देश से करीब पचास लोग शमिल थे .
आज की तरह 20 11 में भी शांती विरोधी और रक्त पिपासु संघटनो ने जगह जगह इस यात्रा का अपमानजनक विरोध किया .विरोध करने वालो में यूथ कांग्रेस और भाजपा युवामोर्चा दोनों थे

* रायपुर ,जगदलपुर दंतेवाडा में हुआ अपमानजनक विरोध .

रायपुर के टाऊन हाल में कांग्रेस और भाजपा के युवा संघटन बारी बारी से सभा भवन में घुस आये ,नारेबाजी की और गालियां दी ,केयूर भूषण जी और यशपाल जी दो बार उन्हें कारण पूछने और यात्रा का उद्देष्य बताने उनके पास गये भी.।
तब भी आज की तरह यह सब पुलिस के सरंक्षण में ही हो रहा था ।

जगदलपुर में पत्रकारों सहित भाजपा कांग्रेस ने किया घेराव

जब यात्रा जगदलपुर पहुची तब पत्रकार वार्ता के समय लगभग सारे पत्रकार हमारी सुनने को तैयार नही थे ,सब का कहना था की यह दल नक्सलियों के समर्थन में आया है.कोई शांति की बात सुनना नही चाहता था .पत्रकार भवन के बाहर करीब 399 लोग एकजुट रहे ,उनमे ज्यादातर व्यापारी थे जो हम लोगों के खिलाफ अपमानजनक नारे लगा रहे थे .
खैर जैसे तैसे रात्रि विश्राम के बाद यात्रा गीदम मोड़ पर पहुची तो ढाई तीन सौ लोग हाथ में पत्थर लिये बस की वापस जाने के नारे लगा रहे थे ,हम लोगों ने तय किया की गाडी वापस कर ली जाये ,और वापस मोड भी ली .
फिर सरकार और पुलिस को लगा की इससे पूरे देश में बदनामी हो जाएगी तो पुलिस ने आकर अपनी स्काट में गाड़ी को दंतेवाडा ले गये .
खैर हम लोग ओपचारिकता पूरी करते हुये उसी दिन उसी दिन रायपुर वापस आ गये .
शयद यही प्रोफेसर यशपाल की आखरी छत्तीसगढ़ यात्रा मानी जा सकती है.
बस्तर में शांति के सभी प्रयास ठीक एसे ही आज भी विफल करने का काम हो रहा हैं ,अब तो छत्तीसगढ़ पुलिस ने इसके लिए वाकायदा संघटन भी बना लिए है
प्रोफेसर यशपाल की विनम्र श्रध्दांजलि .
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डा. लाखन सिंह

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