छत्तीसगढ़ सरकार को अब याद आई की सोनी सोरी शिक्षा विभाग में पदस्थ है और उन्हें 6 साल पहले निलंबित कर दिया गया था,

और यह भी की उन्होंने तीन साल पहले लोकसभा का चुनाव लड़ा और पिछले 6 साल से वे निलंबन के बाद कार्य अनुपस्थित भी हैं.

दंतेवाडा ज़िले में कुआकोंडा के मुख्यकार्यपालन अधिकारी ने सोनी सोरी को नोटिस देकर पूछा है की उन्होंने कार्य के प्रति उदासीनता बरती और लपरवाही की है और वे बिना अनुमति के या बिना त्यागपत्र दिये चुनाव कैसे लड़ सकती हैं ?

सोनी सोरी आप पार्टी की नेता और सामाजिक कार्यकर्त्ता है, जिन्हें छत्तीसगढ़ शासन ने 6 साल पहले गिरफ्तार किया, उनके साथ यौन उत्पीडन हुआ उनके ऊपर 7 झूठे मुक़दमे लादे गए जिसमे वे एक एक कर निर्दोष साबित हुई,

जब सब तरह के क़ानूनी दावपेच और उत्पीडन से बाज़ नहीं आये तो अब अनुशासन का कारण बता कर उन्हें नौकरी से बर्खास्त करने की तैयारी कर ली हैं.

सोनी को कहा गया की वे 10 जुलाई तक जबाब प्रस्तुत करें जबकि उन्हें नोटिस ही दो दिन पहले मिला है, इसपर सोनी ने लिखित में कहा है की वे 15 जुलाई तक खुद सीओ ऑफिस आकर जबाब प्रस्तुत कर देंगी. सोनी का यह भी कहना है की उन्हें कभी मिलंबन का आदेश प्राप्त नहीं हुआ, यदि शिक्षा विभाग ने कोई निलंबन किया है तो वे पावती पर मेरे हस्ताक्षर दिखाए,

उन्होंने कहा की में पूरी जिम्मेदारी से अपना शिक्षक का कार्य कर रही थी, उन्हें पुलिस ने ही झूठे मुक़दमे में गिरफ्तार किया और मेरे साथ यौन उत्पीडन किया, जेल मे रहने के पश्चात् जमानत मिली और सभी केस झूठे निकले, सिर्फ एक केस बचा हैं.

रही बात चुनाव लड़ने की तो उन्हें मालूम होना चाहिए की शिक्षक को चुनाव लड़ने की पात्रता है,

यदि वे चुनाव जीत जाती तो एक पद से स्तीफा दे देती क्योकि कोई दो लाभ के पद पर नहीं रह सकता.

सोनी नें कहा की पुलिस और सरकार तरह तरह से मेरे खिलाफ षड्यंत्र करती रहती है में आदिवासियों के लिये काम करती रही हूँ और आगे भी करती रहूंगी.

मुझे इस तरह से डराया नहीं जा सकता.

मेरे ऊपर सभी आरोप झूठे और मुझे उत्पीडित करने के लिया लगाये गए हैं. मैने मुख्य कार्यपालन अधिकारी को जबाब देने की लिये 15 जुलाई तक का समय माँगा है और अभी अंतरिम पत्र उन्हें लिख भी दिया हैं.

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