26.07.2017

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चाहे डेहरी में किसान ने सूदखोरों के आतंक से अपनी जान दी हो या पंडरी में मुआवज़े में देरी से रामलाल केवट ने आत्महत्या की हो ,राज्य सरकार के नुमाईन्दे सिद्द करने में लग जाते है और बनी बनाई एक सी कहानी सुना देता है .या तो यह किम किसान शराब पिटा था ,निराश था या प्रेम प्रसंग और नहीं तो आपसी झगड़े के कारण जन देने का वाकया तैयार रहता हैं .छत्तीसगढ़ में अभी पिछले दो महीने में करीब 18 किसानो ने क़र्ज़ से परेशां होकर अपनी जान दी ,लेकिन सरकार ने एक बार भी इसे स्वीकार नहीं किया ,जब की प्रेस और किसान संघठन बार बार कहते रहे की उनके पास इसके सबूत है की किसान किस प्रकार क़र्ज़ से परेशान था और मज़बूरी में आत्महत्या कर रहा हैं .

मरवाही के ग्राम पंडरी में हुई आत्महत्या की जाँच पड़ताल पत्रिका के सतीश यादव और मधुकर द्वेदी ने अपनी रिपोर्ट में बताया की किसान रामलाल केवट सूखे के कारण बेंक का लों नहीं पटा पा रहा था .पटवारी ने किसानो की सुखा राहत कोष का मुआवज़ा  राशी भी नहीं बांटी थी . वही बेंक नोटिस पे नोटिस देकर सम्पति कुर्क करने की चेतावनी दे रहा था .

यही कारण है की किसान अपनी जान देने को मजबूर हो गया .जब की जिला प्रशाशन का दावा है कि रामलाल पर किसी प्रकार का क़र्ज़ था ही नहीं .और न ही वसूली का कोई डिमांड नोट भेजा गया .प्रशाशन ने यह भी कहा की राम लाल केवट को शराब की लत थिओ औ रवो बीमार रहता था .

प्रशःन ने ही इनके क्षेत्र की सुखा घोषित कर दिया था ,लेकिन सुखा राहत की राशी का भुगतान अभी तक नही हुआ ,किसान बार बार  पटवारी से लेकर तहसीलदार के  कार्यालय के चक्कर लगा रहे थे लेकिन  कीस को कोई राशी प्राप्त नहीं हुई थी ,एक तरफ राहत की राशी का न मिल्न और दूसरी तरह क़र्ज़ के तकादे से परेशांन किसान ने अपनी जान देदी .

प्रशाश्न कड़वे के खिलाफ [प्रेस के पास वो कागजात मोजूद है जिसमे उसे क़र्ज़ से ग्रस्त और नोटिस की बात हैं .

 

कोंग्रेस जाँच दल की रिपोर्ट की डेहरी के किसान ने सूदखोरों से परेशान होकर की थी आत्महत्या .

कवर्धा जिले ले डेहरी गाँव में किसान द्वारा की गई आत्महत्या की जाँच प्रदेश कांग्रेस दल ने की औ र्जंच के बाद प्रेस को बताया की किसान ने सुद्खोरो से परेशान होकर अपनी जान दी थी . किसान ने अपने सुसाईड नोट में मुख्यमंत्री रमन सिंह का भी नाम लिखा था ,साथ ही क़र्ज़ से परेशा होकर अपनी जन देने की बात भी लिखी थी .संतोष साहू ने अपनी आठ एकड़ जमींन भी बेच दी थी लेकिन इसके बाद भी वो पाने क़र्ज़ नहीं पटा पाया था .दल ने यह भी कहा की सूदखोर आठ आठ दिन का ब्याज लेते है जी चक्रवर्ती बयाज़ से भी कई गुना ज्यादा होता हैं .संतोष अपनी जमींन का डायवर्सन करना चाहता ठ अटकी वो अपनी जमी सही कीमत पर बेच कर क़र्ज़ अदा कर सके .

कांग्रेस नेताओ नेः भी कहा की डायवर्सन के लिया अधिकारियो ने पचास हज़ार की रिश्वत भी ली थी संतोष से .

भाजपा के प्रवक्ता सचिदानंद उपासने ने कहा की कांग्रेस झूट की राजनीती कर रही है ,किसान पर कोई क़र्ज़ नहीं था और वो वयवसाय भी करता था .

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