**

21.7.17

तेरा मेरा ये जो रिश्ता है सनम ,
बस इसी का नाम दुनिया है सनम।

हमको जब तुमने ख़ुदा माना है तो,
क्यूं ख़ुदा से अपने पर्दा है सनम।

ना करूंगा जग में ज़ाहिर तेरा नाम,
सच्चे आशिक़ का ये वादा है सनम।

हम हिफ़ाज़त ग़ैरों से कर लेंगे पर,
मुल्क को अपनों से ख़तरा है सनम।

बिकने को तैयार है हर इंसां आज,
कोई सस्ता कोई महंगा है सनम ।
**
मुझसे तन्हाई मेरी ये पूछती है,
बेवफ़ाओं से तेरी क्यूं दोस्ती है।

चल पड़ा हूं मुहब्बत के सफ़र में,
पैरों पर छाले रगों में बेख़ुदी है।

पानी के व्यापार में पैसा बहुत है,
अब तराजू की गिरह में हर नदी है।

बिल्डरों के द्वारा संवरेगा नगर अब,
सुन ये, पेड़ों के मुहल्ले में ग़मी है।

दिल की कश्ती को किनारों ने डुबाया,
इसलिये मंझधार को वो चाहती है।

मत लगाना हुस्न पर इल्ज़ाम दानी,
ऐसे केसों में गवाहों की कमी है।
**
अब इश्क़ की गली में कोई पारसा नहीं,
सुख, त्याग का सफ़र कोई जानता नहीं।

ये दौर है हवस का सभी अपना सोचते,
रिश्तों की अहमियत से कोई वास्ता नहीं।

जब फ़स्ले-उम्र सूख चुकी तब वो आई है,
मरते समय इलाज़ से कुछ फ़ायदा नहीं।

वे क़िस्से लैला मजनूं के सुन के करेंगे क्या,
आदेश हिज्र का कोई जब मानता नहीं।

मंदिर की शिक्षा बदले की,मस्जिद में वार का
अब धर्म ओ ग़ुनाह में कुछ फ़ासला नहीं।
**
तुम मेरे दर्द की दवा भी हो,
तुम मेरे ज़ख़्मों पर फ़िदा भी हो।

इश्क़ का रोग ठीक होता नहीं,
ये दिले नादां को पता भी हो।

महलों की खुश्बू से न हो परहेज़,
साथ फ़ुटपाथ की हवा भी हो।

उस समन्दर में डूबना चाहूं,
जो किनारों को चाहता भी हो।

हारे उन लोगों से बनाऊं फ़ौज़,
जिनके सीनों में हौसला भी हो।

 

  • ** डॉ संजय दानी 

CG Basket

Related Posts

Leave a Reply

Create Account



Log In Your Account



%d bloggers like this: