असमानता’ पर पी.साईनाथ का अहम भाषण सुनने मंच पर बैठे श्रोता ! आप भी सुनें..

ऐसे दौर में जब पत्रकारों की साख रसातल में जा रही है, पी.साईंनाथ के नाम का परचम पूरे देश में लहरा रहा है। पिछले बीस-25 साल से अगर कोई पत्रकार किसानों और ग्रामीण भारत की तक़लीफ़ों को बेहद प्रामाणिक ढंग से लिख रहा है तो वह साईंनाथ ही हैं। कुछ साल पहले तक वे ‘द हिंदू’ के संपादक (ग्रामीण मामले) थे, लेकिन अब स्वतंत्र पत्रकारिता कर रहे हैं।

पी.साईंनाथ कल दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल में दुर्गादास देशमुख मेमोरियल लेक्चर देने आए तो भारी भीड़ उमड़ी। कार्यक्रम शुरु होने के आधे घंटे पहले ही हॉल भर चुका था और भारी भीड़ बाहर थी। बाद में लेक्चर शुरू करने से पहले साईनाथ ने सीढ़ियों पर बैठे लोगों को मंच पर आकर बैठने का न्योता दिया ताकि बाहर खड़े तमाम लोग अंदर आ सकें। इस दौर में किसी पत्रकार की ऐसी प्रतिष्ठा ऐतिहासिक महत्व की बात है।

साईंनाथ ने अपने भाषण में भारत में भीषण असमानता, बेरोज़गारी, किसानों की आत्महत्या, पानी की समस्या आदि से जुड़े तमाम आँकड़ों को सामने रखते हुए विकास के मौजूदा मॉडल को भविष्य के लिए ख़तरनाक बताया। उन्होंने प्रतिवाद की तमाम कोशिशों को अपरााध बताने के सरकार के रवैये को लोकतंत्र के इतिहास में अभूतपूर्व बताते हुए इससे इमरजेंसी से भी ख़राब स्थिति बताया।

उन्होंने कहा कि देश के 1 फ़ीसदी लोगों के हाथ 58 फ़ीसदी संपत्ति है, ऐसी असमानता तो अमेरिका जैसे देशों में भी नहीं है। मीडिया इन प्रश्नों को  बिलकुल भी उठाने को तैयार नहीं है क्योंकि मीडिया अब बिग बिज़नेस के पक्ष में नहीं, ख़ुद बिग बिज़नेस है।

उन्होंने कहा कि जब दाभोलकर, पनसारे और कलबुर्गी जैसे विचारक और तर्कशास्त्री मारे जा रहे हैं, जब गाय के नाम पर भीड़ किसी को घेर कर मार दे रही हो तो समझिए कि समाज में कोई बुनियादी समस्या है। अफ़सोस कि मध्यवर्ग का बड़ा हिस्सा अब पीड़ितों के साथ सहानुभूति नहीं रखता जैसे कि पहले रखता और बोलता था। उन्होंने कहा कि किसानों और छात्रों-नौजवानों की ओर से प्रतिवाद हो रहा है लेकिन उनके दमन पर हमने चुप्पी साध रखी है जो अभूतपूर्व है।

हम यहाँ इस लेक्चर का लिंक दे रहे हैं। वीडियो के 19वें मिनट से साईंनाथ का लेक्चर शुरू होता है। यह लिंक आईआईसी के वेबकास्ट का है।

यहाँ चटका लगाकर वीडियो पर पहुँचा जा सकता है। 

 

 

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