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छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ के प्रतिनिधोयों ने आत्महत्या करने वाले किसान संतराम के परिजनो
से मिलने उनके गाँव अमडीह भाखरा धमतरी पहुचे ,परिजनो ने बताया की संतराम की आत्महत्या को सरकार जो कारण गिना रही है वो बिलकुल गलत है ,सही तो यही है की संतराम पर 5 लाख का कर्ज़ बचा था इससे वह बहुत परेशान था ,उन्होंने कर्ज पटाने के लिये 8 एकड जमीन बेच चुके थे .

परिजनो ने बताया की पहले तहसीलदार गाँव आये थे उन्होंने संतराम के भाई के बयान सही सही लिए लेकिन बाद में जब एसडी एम् ने बयान को देखा तो तहसीलदार पर बहुत नाराज हुए और पूरा बयान ही बदलवा दिया ,उसमें लिख दिया की संत राम सट्टा और नशे का आदी था .जब की यह बिलकुल झूट है ,.
संत राम अपने कर्ज़ से पीड़ित था ,उसे लोक अदालत में बुलाया गया था जहाँ उसे उम्मीद थी कि कुछ सेटिलमेंट हो जायेगा ,लेकिन वहाँ उसे बहुत धमकाया गया की वो कर्ज़ वापस कर दे .उसके पास कुल सवा एकड जमी बची थी .
वापस आने के बाद उसने फांसी लगा कर अपनी जान देदी.
आत्महत्या करने के दो दिन पहले उसे नोटिस देकर बेंक बुलाया गया था ,तब भी उसने कहां था की वह कर्ज़ पटा नहीं पायेगा क्योंकि उसके पास बेचने को अब जमीन भी नहीं बची है .और आखिर में उसने दस जुलाई को अपनी जान देदी .

छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ ने राज्य सरकार को से मांग की है की आत्महत्या करने वाले किसानों के परिजनों को 50 लाख का मुआवजा दे और उसका क़र्ज़ माफ़ करें ,नहीं तो महासंघ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट जाकर न्याय की गुहार करेगा.
परिजनो से चर्चा करने गये प्रतिनिधिमंडल में ,डा. संकेत ठाकुर ,रूपन चन्द्राकर ,लक्ष्मी नारायण और पुर्षोत्तम चन्द्राकर शामिल थे .
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